धामी ने दिन-रात एक कर संभाली कमान, माणा हिमस्खलन बचाव कार्य तेज करने के निर्देश
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Yugvarta
, Mar 01, 2025 12:07 AM 0 Comments
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Dehradun :
देहरादून, 28 फ़रवरी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिले के माणा गांव के पास हुए हिमस्खलन की जानकारी लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, आईटी पार्क पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक की और रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए।
जोशीमठ में भी आपदा कंट्रोल रूम बने
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्च ऑपरेशन तेजी से चलाया जाए और जोशीमठ में भी आपदा कंट्रोल रूम की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना मिलकर बर्फ हटाने के कार्य में तेजी लाएं। जिन श्रमिकों को निकाला गया है, उनका विशेष ख्याल रखा जाए। साथ ही, माणा स्थित हेलीपैड को प्राथमिकता से खोले जाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने जोशीमठ स्थित आर्मी अस्पताल, जिला अस्पताल और एम्स ऋषिकेश तक सभी अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एम-आई 17 हेलीकॉप्टर की मदद से घायलों को एयरलिफ्ट करने की भी पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए।
32 लोग सुरक्षित निकाले गए
अब तक 32 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। इनमें से 4 लोगों को आईटीबीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीआरओ स्नो कटर और अन्य मशीनों के जरिए लगातार बर्फ हटाने का काम कर रही है। शनिवार सुबह एमआई 17 हेलीकॉप्टर भी माणा क्षेत्र के लिए रवाना होंगे।
रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घटनास्थल पर आवागमन जल्द से जल्द सुचारू किया जाए और नजदीकी हेलीपैड को शीघ्र सक्रिय किया जाए, ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके। उन्होंने ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने जरूरत पड़ने पर घायलों को एयर एंबुलेंस के जरिए एम्स ऋषिकेश भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से निरंतर समन्वय बनाए रखने और प्रभावितों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
हिमस्खलन प्रभावितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आईटीबीपी, सेना, जिला प्रशासन, वायुसेना और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण फिलहाल हेलीकॉप्टर संचालन संभव नहीं है, लेकिन स्नो एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है।
आईटीबीपी की विशेष टीमें लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हिमस्खलन में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। प्रभावितों के परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जा रहा है।
राज्य और केंद्र सरकार में समन्वय
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में है। प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री से भी बातचीत हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी अतिरिक्त एजेंसी की जरूरत होगी, तो तुरंत उनकी मदद ली जाएगी।
अब तक 32 लोगों को आईटीबीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार हो रही बर्फबारी के कारण रास्ते अवरुद्ध हो रहे हैं, लेकिन जैसे ही मौसम में सुधार होगा, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज किया जाएगा। सभी राहत एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया गया है और माणा हेलीपैड को भी सक्रिय किया जा रहा है। एम्स ऋषिकेश, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज और गोपेश्वर जिला अस्पताल को भी तैयार रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी से पूरी जानकारी ली
मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी से घटना की विस्तृत जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बताया कि हिमस्खलन बद्रीनाथ धाम से 6 किमी आगे हुआ, जहां सीमा सड़क संगठन के तहत बर्फ हटाने वाले मजदूर मौजूद थे। आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत राहत कार्यों में जुट गईं। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, अब तक 32 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि शेष लोगों को बचाने का अभियान जारी है।
मुख्यमंत्री रात 8 बजे फिर पहुंचे आपदा कंट्रोल रूम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रात 8 बजे दोबारा आपदा कंट्रोल रूम पहुंचकर हालात की समीक्षा की। वे लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों के साथ नियमित अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर प्रभावित व्यक्ति की सुरक्षा और सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सभी एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं और जल्द ही सभी फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा।
आपदा रिस्पॉन्स टाइम कम करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने भारी बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हो रहे हिमपात को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन से लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को आपदा के दौरान रिस्पॉन्स टाइम कम से कम रखने के निर्देश भी दिए, ताकि त्वरित राहत पहुंचाई जा सके।