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श्रावण 2025 में आस्था का महाप्रवाह, उत्तर प्रदेश ने रचा धार्मिक पर्यटन का स्वर्णिम इतिहास
Go Back | Yugvarta , Aug 13, 2025 09:20 AM
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News Image Lucknow :  लखनऊः 12 अगस्त, 2025 : सावन के महीने में प्रदेश के लगभग सभी पवित्र स्थलों एवं घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्र हुई। इससे पर्यटन को गति मिली तथा स्थानीय कारोबारियों को व्यवसाय मिला। साथ ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और सुदृढ़ करने का जरिया बना। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ से लेकर वाराणसी के पौराणिक मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। बाराबंकी के शिवालयों, बागपत के श्रावण मेले और हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर घाट तक ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से पूरा माहौल गूंजता रहा। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह

आस्था, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का संगम, श्रावण में बढ़ा व्यापार और पर्यटन

घाटों से शिवालयों तक उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, धार्मिक पर्यटन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

पवित्र सावन के महीने में धार्मिक स्थलों एवं घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़

श्रावण मास के महापर्व से स्थानीय व्यापारियों एवं अर्थव्यवस्था को मिली गति- जयवीर सिंह

ने दी।

उन्होंने बताया कि लखनऊ के प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर में सामान्य दिनों में जहां 5 से 6 हजार श्रद्धालु आते थे, सावन मास में यह संख्या बढ़कर 15 से 20 हजार से ऊपर पहुंच गई। वहीं, बुद्धेश्वर मंदिर में हर बुधवार और सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या 20 हजार से भी अधिक रही। बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर में इस सावन करीब 12 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जिनमें से सिर्फ सोमवार को 2.05 से 3 लाख भक्तों ने जलाभिषेक किया। इसके अलावा, बागपत के श्रावण मेले में लगभग 14 लाख लोग शामिल हुए, जबकि सोमवार को अकेले 5 लाख से अधिक भक्तों ने पूजा-अर्चना की। गढ़मुक्तेश्वर घाट, हापुड़ से एक लाख से अधिक कांवड़िये गंगाजल लेकर लौटे। वहीं, लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ मंदिर में 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

जयवीर सिंह ने बताया कि इसी प्रकार श्री काशी विश्वनाथ धाम इस बार भी श्रावण मास का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आकर्षण बना रहा। अनुमान है, कि यहां पिछले साल की तुलना में भीड़ में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। प्रतिदिन औसतन 70,000 से 82,000 श्रद्धालु पहुंचे, जिसमें सोमवार को सर्वाधिक भीड़ दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी को काशी की आध्यात्मिक महत्ता और सरकार द्वारा प्रदान की गई बेहतर सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन की सफलता का परिणाम माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के जुलाई 2025 के रिकॉर्ड के मुताबिक, सावन माह में राजधानी लखनऊ में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। सिर्फ रिहायशी होटलों में करीब 3.50 लाख पर्यटक ठहरे, जिनमें लगभग 5,000 विदेशी पर्यटक भी शामिल थे। सावन के दौरान लगे पारंपरिक मेलों में 6.04 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ उमड़ी। इसी महीने लखनऊ में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और महोत्सवों में करीब 49,200 लोग शामिल हुए, जबकि पारम्परिक त्योहारों में 16,700 से अधिक लोग जुटे। ये आंकड़े साबित करते हैं कि प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है और सावन के उत्सव इस बढ़ोतरी के बड़े कारणों में से एक हैं।

इस सावन जहां मंदिरों में भोलेनाथ की जय-जयकार हुई, वहीं व्यापारियों के लिए भी यह समय बहुत अच्छा रहा। लखनऊ के प्रसिद्ध बुद्धेश्वर मंदिर की महंत लीलापुरी जी ने बताया कि 'यह मंदिर शहर के सबसे प्राचीन और पवित्र शिव मंदिरों में से एक है, जहां सावन माह में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। इस सावन में चार सोमवार और चार बुधवार को शाम 7:30 बजे भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जबकि प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे भोर की महाआरती होती थी। पर्यटन विभाग द्वारा किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों के कारण अब श्रद्धालुओं को यहां दर्शन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती। स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह समय बेहद लाभदायक रहा।' वाराणसी के दालमंडी बाजार के थोक व्यापारी संदीप केसरी ने बताया, 'पिछले साल के मुकाबले इस बार बिक्री लगभग पांच गुना बढ़ गई। महाकाल थीम वाली टी-शर्ट्स खूब बिकीं।'

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि श्रावण 2025 उत्तर प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में एक स्वर्णिम अध्याय साबित हुआ है। श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति ने प्रदेश को देश का अग्रणी धार्मिक पर्यटन केंद्र साबित किया। हमने सुनिश्चित किया कि हर भक्त को निर्बाध, सुरक्षित और सुखद अनुभव मिले। साथ ही, तीर्थ स्थलों के बुनियादी ढांचे को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ बनाया।

प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति, मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा श्रावण 2025 में उमड़ा यह अभूतपूर्व जनसैलाब हमारी धार्मिक पर्यटन नीति की बड़ी सफलता का जीवंत प्रमाण है। मंदिर परिसरों की व्यवस्थाओं से लेकर परिवहन, सुरक्षा और सुविधाओं तक, हर स्तर पर सूक्ष्मता से तैयारी की गई, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सहज और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।
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