» ज्योतिष/धर्म/वास्तु
गंगा दशहरा 2022: कैसे राजा भागीरथ की तपस्या से धरती पर अवतरित हुईं मां गंगा, जानें गंगा दशहरा मनाने के पीछे की वजह की वजह
Go Back | Yugvarta , Jun 09, 2022 05:54 PM
0 Comments


0 times    0 times   

News Image Lucknow : 
Ganga Dassehra: हिंदू धर्म में गंगा दशहरा पर्व को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि पापों को नष्ट करने वाली इस दशमी तिथि को ही मां गंगा पहली बार पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।

हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का त्योहार मनाया जाता। इस साल 2022 में 9 जून को गुरुवार के दिन गंगा दशहरा पड़ रहा है। इस तिथि को गंगावतरण तिथि के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा पहली बार पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस मोक्षदायनी और पापनाशिनी तिथि को गंगा दशहरा क्यों मनाते हैं इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है। मान्यता है कि राजा भागीरथ की तपस्या के परिणामस्वरूप मां गंगा ने अपना कदम पहली बार धरती पर रखा था। तो आइए जानते हैं गंगा दशहरा की पूरी कथा...



क्यों मनाते हैं गंगा दशहरा?

पौराणिक कथा के अनुसार, अयोध्या में भगवान श्रीराम के पूर्वज माने जाने वाले एक राजा भागीरथ हुआ करते थे। राजा भागीरथ को अपने पूर्वजों को मुक्ति प्रदान करने के लिए गंगा के जल में तर्पण करना था। लेकिन उस वक्त गंगा माता केवल स्वर्ग में ही निवास करती थीं। गंगा माता को धरती पर लाने के लिए राजा भागीरथ के पिताजी और दादा जी ने भी खूब तपस्या की लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। इसके पश्चात राजा भागीरथ भी मां गंगा को धरती पर लाने के लिए हिमालय की तरफ चले गए और कठोर तपस्या करने लगे।

भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा देवी ने धरती पर आने की विनती स्वीकार कर ली। लेकिन उस समय भी एक परेशानी यह थी कि गंगा नदी का वेग बहुत ज्यादा होने के कारण यदि वह धरती पर एक भी कदम रखती तो विनाश हो सकता था। राजा भागीरथ को जब इस बात का पता चला कि भगवान शिव ही केवल गंगा के वेग को संभाल सकते हैं तो फिर वह भोलेनाथ की तपस्या में लीन हो गए। एक साल बीत गया और राजा भागीरथ पैर के अंगूठे के सहारे खड़े होकर ही भगवान शिव की तपस्या करते रहे। तब राजा की तपस्या से खुश होकर भोलेनाथ ने गंगा को धरती पर लाने की उनकी विनती स्वीकार कर ली।

इसके बाद भगवान ब्रह्मा ने अपने कमंडल से गंगा की धारा को प्रवाहित किया और साथ ही शिवजी अपनी जटाओं में उस धारा को समेटते हुए। माना जाता है कि करीबन बत्तीस दिनों तक गंगा नदी शिव जी की जटाओं में ही रहीं। इसके बाद ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भोलेनाथ ने अपनी जटाएं खोली तब जाकर गंगा नदी पहली बार पृथ्वी पर अवतरित हुईं। फिर राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों का गंगा जल से तर्पण करके उन्हें मुक्ति दिलाई।
  Yugvarta
Previous News Next News
0 times    0 times   
(1) Photograph found Click here to view            | View News Gallery


Member Comments    



 
No Comments!

   
ADVERTISEMENT




Member Poll
कोई भी आंदोलन करने का सही तरीका ?
     आंदोलन जारी रखें जनता और पब्लिक को कोई परेशानी ना हो
     कानून के माध्यम से न्याय संगत
     ऐसा धरना प्रदर्शन जिससे कानून व्यवस्था में समस्या ना हो
     शांतिपूर्ण सांकेतिक धरना
     अपनी मांग को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाना
 


 
 
Latest News
UP News: मुख्यमंत्री फेलोशिप के लिए आवेदन
योगी सरकार के प्रयास से प्रधानमंत्री स्वामित्व
Varalakshmi Vrat 2022: कल है वरलक्ष्मी व्रत,
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार मुलाकात करने
Raksha Bandhan 2022: मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ और
Laal Singh Chaddha Review: अतीत की यादें
 
 
Most Visited
मेक्सिको की Andrea Meza बनी Miss Universe
(4122 Views )
CBSE Board Exam Date: सीबीएसई ने बदली
(2396 Views )
यूपी में टेस्टिंग बढ़ी, एक्टिव केस घटे,
(1662 Views )
UP Board Exam 2021: यूपी बोर्ड परीक्षा
(1430 Views )

(1399 Views )
चन्द्रशेखर आजाद को देश नमन करता हैं
(935 Views )