एससीओ बैठक: भारत ने मध्य एशिया को बताया 'विस्तारित पड़ोस'
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 12 Jun, 2026 07:40 PMदुशान्बे। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने मध्य एशिया के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। दो दिवसीय सम्मेलन (12-13 जून) की थीम "मध्य एशिया - एससीओ का केंद्र: शांति और संयुक्त विकास का क्षेत्र" रखी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय और राज्य मंत्री सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस महत्वपूर्ण भागीदारी और कूटनीतिक यात्रा की जानकारी एवं तस्वीरें साझा की हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया गया कि इस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने मध्य एशिया और एससीओ के साथ भारत की स्थायी साझेदारी की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने संगठन के भीतर भारत की मुख्य प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला, जिनमें मुख्य रूप से युवाओं की भागीदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी) को मजबूत करना और सभ्यताओं के ऐतिहासिक संबंधों को पुनर्जीवित करना शामिल है। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य विषय युवा, संस्कृति और सभ्यता के मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं के साथ पूरी तरह मेल खाता है। राज्य मंत्री ने कहा भारत मध्य एशिया को अपने "विस्तारित पड़ोस" के रूप में देखता है। यह क्षेत्र क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रगति, समृद्धि और बेहतर संपर्क को बढ़ावा देने में भारत का एक बेहद अहम भागीदार है। सिंह ने एक्स पर लिखा मध्य एशिया और एससीओ के साथ भारत की मज़बूत और लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। एससीओ में भारत की प्राथमिकताओं पर ज़ोर दिया, जिनमें युवाओं की भागीदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और सभ्यतागत संबंधों को मज़बूत करना शामिल है; साथ ही अगले महीने कोलकाता में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच के बारे में भी बात की। उल्लेखनीय है कि ताजिकिस्तान गणराज्य वर्तमान में एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। इस सम्मेलन के इतर, विदेश राज्य मंत्री एससीओ के अन्य सदस्य देशों के अपने समकक्षों और प्रतिनिधियों के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी कर रहे हैं। इन बैठकों में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और आपसी हितों के क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इस यात्रा से भारत और मध्य एशियाई देशों के संबंधों को एक नई गति मिलने की उम्मीद है। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)



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