भारत ने यूएन में कहा- स्थायी श्रेणी में वीटो के साथ विस्तार अनिवार्य
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 15 Apr, 2026 06:37 PMन्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों पर आईजीएन की बैठक में जोर देकर कहा कि वास्तविक सुधार के लिए स्थायी श्रेणी में वीटो पावर के साथ विस्तार अनिवार्य है। भारत ने दो-स्तरीय सदस्यता का विरोध करते हुए कहा कि भेदभावपूर्ण ढांचा मौजूदा असंतुलन को बढ़ाएगा। न्यूयॉर्क स्थित यूएन में भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान में बताया कि भारत ने बैठक में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दो बुनियादी पहलू ऐसे हैं, जिनकी वजह से यूएनएससी की बनावट असंतुलित है, ये दो पहलू हैं, सदस्यता और वीटो। यूएनएससी में सुधार की सख्त ज़रूरत है और इस बात पर व्यापक सहमति है। यह साफ है कि 80 साल से भी पहले बनाई गई कोई बनावट आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकती। बयान के अनुसार राजदूत हरीश ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा, 60 के दशक में परिषद में जो एकमात्र सुधार हुआ था, जिसमें सिर्फ़ अस्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार किया गया था, उसकी वजह से वीटो रखने वाले सदस्यों की सापेक्ष शक्ति में और बढ़ोतरी हो गई। तुलनात्मक रूप से देखें तो, जहां पहले वीटो रखने वाले स्थायी सदस्यों और अस्थायी सदस्यों का मूल अनुपात 5:6 था, वहीं बाद में इसे संशोधित करके 5:10 कर दिया गया, जिससे वीटो रखने वालों को और ज़्यादा फ़ायदा हुआ। कोई भी ऐसा सुधार जिसके साथ वीटो रखने वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार न हो, वह इस अनुपात को और भी बिगाड़ देगा और इस तरह, मौजूदा असंतुलन और असमानताओं को और भी पक्का कर देगा। इसलिए सुरक्षा परिषद में असली सुधार के लिए वीटो रखने वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार करना बेहद ज़रूरी है। हरीश ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दायरे में किसी नई श्रेणी पर विचार करना, चाहे उसे वीटो दिया जाए या न दिया जाए, पहले से चल रही उस चर्चा को और भी पेचीदा बना देगा, जिसमें पहले से ही अलग-अलग तरह के विचार शामिल हैं। उन्होंने कहा, भारत दोहराता है कि हमारे विचार 'अफ़्रीकी मॉडल' के अनुरूप हैं यानी, जब तक वीटो की व्यवस्था मौजूद है, तब तक नए स्थायी सदस्यों को भी वीटो का अधिकार जरूर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा भारत ने मंगलवार को यूएन मुख्यालय में डॉ. बी. आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया। कार्यक्रम का विषय था, 'डॉ. बी. आर. अंबेडकर का संवैधानिक नैतिकता का दृष्टिकोण और बहुपक्षवाद के लिए इसकी प्रासंगिकता'। इस दौरान राजनयिक हरीश ने भारतीय नागरिकों में संवैधानिक नैतिकता की भावना जगाने के लिए डॉ. अंबेडकर की जोरदार वकालत को काफी महत्वपूर्ण और अद्वितीय बताया। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)


No Previous Comments found.