फिनलैंड की धरती से
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 12 Jun, 2026 07:37 PMहेलसिंकी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने फिनलैंड दौरे के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई दी और वैश्विक मंच पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का कड़ा रुख स्पष्ट किया। बुल्गारिया की सफल यात्रा संपन्न कर हेलसिंकी पहुंचे विदेश मंत्री ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और अपनी समकक्ष एलीना वाल्टोनेन से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। उनके इस दौरे के दौरान दोनों ही देशों ने डिजिटल और सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) में अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। राष्ट्रपति स्टब से मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा हमने बदलती जियोपॉलिटिकल स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और लगातार अनिश्चित होते ग्लोबल माहौल में कूटनीति के महत्व पर ज़ोर दिया। भारत और फ़िनलैंड डिजिटलाइज़ेशन और सस्टेनेबिलिटी में अपनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के साथ-साथ, साझा हितों के मुद्दों पर मल्टीलेटरल मंचों पर आपसी सहयोग को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस दौरे के सबसे प्रमुख पड़ाव के रूप में विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब द्वारा आयोजित '14वीं कुल्तारांता वार्ता' में हिस्सा लिया, जिसका मुख्य विषय "परिवर्तनशील दुनिया: वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय परिप्रेक्ष्य" था। इस सम्मेलन के दौरान एक पैनल चर्चा में जब रूसी तेल के आयात को लेकर पश्चिमी मीडिया ने भारत को घेरने की कोशिश की, तो जयशंकर ने अपनी चिरपरिचित आक्रामक शैली में करारा जवाब दिया। उन्होंने यूरोप के दोहरे रवैये को उजागर करते हुए कहा कि जब यूक्रेन संघर्ष की वजह से यूरोपीय देशों ने मध्य-पूर्व से भारी मात्रा में तेल खरीदना शुरू किया (जो कि भारत का पारंपरिक आपूर्तिकर्ता रहा है), तो बाजार की उन परिस्थितियों ने भारत को रूस की तरफ जाने पर मजबूर किया। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका का संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि 2022 में वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए स्वयं अमेरिका ने भारत से रूसी तेल खरीदने का आग्रह किया था। जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा लागत और उपलब्धता के आधार पर फैसले लेता है। वहीं दूसरी ओर यूरोप को कड़ा आईना दिखाते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा यूरोपीय देश उन हथियारों को बेचते हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से भारत पर हमलों के लिए किया जाता रहा है। इसके विपरीत, हम भारतीयों ने कभी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे यूरोप की सुरक्षा खतरे में पड़े। विदेश मंत्री के इस सफल और कूटनीतिक रूप से बेहद सक्रिय दौरे ने न केवल नॉर्डिक देशों के साथ भारत के व्यापारिक समीकरणों को मजबूत किया, बल्कि यह भी स्थापित किया कि नई दिल्ली वैश्विक दबावों के आगे डिगे बिना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)



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