क्यों मशहूर है कुंभलगढ़? इतिहास और प्रकृति के अनोखे संगम वाला राजस्थानी शहर
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 29 Jan, 2026 01:42 PMराजस्थान का ये सूंदर शहर भव्य किलों और समृद्ध विरासत के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है, और इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में कुंभलगढ़ का नाम बेहद खास है। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा कुंभलगढ़ न सिर्फ एक किला है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का ऐसा संगम है, जो हर सैलानी को अपनी ओर आकर्षित करता है। यही वजह है कि देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी कुंभलगढ़ को देखने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। कुंभलगढ़ किला और उसकी विशाल दीवार कुंभलगढ़ किला अपनी 36 किलोमीटर लंबी विशाल दीवार के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस दीवार को एशिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार माना जाता है और इसकी तुलना अक्सर चीन की महान दीवार से की जाती है। 15वीं शताब्दी में मेवाड़ शासक राणा कुंभा द्वारा निर्मित यह किला स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। इतिहास में यह भी दर्ज है कि इसी किले में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। अपने विशाल आकार और ऐतिहासिक महत्व के कारण कुंभलगढ़ किले को 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। कुंभलगढ़ में घूमने लायक प्रमुख स्थल कुंभलगढ़ किले के भीतर बने भव्य महल राजपूत वास्तुकला की शानदार झलक पेश करते हैं। यहां स्थित शाही कक्ष, प्राचीन संरचनाएं और संग्रहालय पर्यटकों को मेवाड़ के गौरवशाली अतीत से रूबरू कराते हैं। किले की ऊंची दीवारों और सीढ़ियों से पूरे क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जो प्रकृति प्रेमियों को खासा आकर्षित करता है। किले परिसर में मौजूद लक्ष्मी नारायण मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर धार्मिक और कलात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य यहां की प्राकृतिक सुंदरता को और खास बना देता है, जहां घने जंगलों, वन्य जीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अनुभव मिलता है। कुंभलगढ़ घूमने का सही समय कुंभलगढ़ की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और किले व आसपास के क्षेत्रों को आराम से घूमा जा सकता है। गर्मियों में यहां तापमान काफी अधिक हो जाता है, जिससे घूमना थोड़ा कठिन हो सकता है। कुंभलगढ़ कैसे पहुंचें कुंभलगढ़ तक पहुंचने के लिए हवाई, रेल और सड़क तीनों विकल्प उपलब्ध हैं। नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर है, जहां से टैक्सी द्वारा लगभग 85 किलोमीटर का सफर तय कर कुंभलगढ़ पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए नाथद्वारा नजदीकी स्टेशन है, जो कुंभलगढ़ से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है। सड़क मार्ग से उदयपुर, राजसमंद जैसे शहरों से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर कुंभलगढ़ उन यात्रियों के लिए एक आदर्श गंतव्य है, जो इतिहास की गहराइयों को महसूस करना चाहते हैं और साथ ही प्रकृति की शांति में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं।
क्यों मशहूर है कुंभलगढ़?
राजस्थान का ये सूंदर शहर भव्य किलों और समृद्ध विरासत के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है, और इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में कुंभलगढ़ का नाम बेहद खास है। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा कुंभलगढ़ न सिर्फ एक किला है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का ऐसा संगम है, जो हर सैलानी को अपनी ओर आकर्षित करता है। यही वजह है कि देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी कुंभलगढ़ को देखने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। कुंभलगढ़ किला और उसकी विशाल दीवार कुंभलगढ़ किला अपनी 36 किलोमीटर लंबी विशाल दीवार के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
क्यों मशहूर है कुंभलगढ़?
इस दीवार को एशिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार माना जाता है और इसकी तुलना अक्सर चीन की महान दीवार से की जाती है। 15वीं शताब्दी में मेवाड़ शासक राणा कुंभा द्वारा निर्मित यह किला स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। इतिहास में यह भी दर्ज है कि इसी किले में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। अपने विशाल आकार और ऐतिहासिक महत्व के कारण कुंभलगढ़ किले को 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
इतिहास और प्रकृति
कुंभलगढ़ में घूमने लायक प्रमुख स्थल कुंभलगढ़ किले के भीतर बने भव्य महल राजपूत वास्तुकला की शानदार झलक पेश करते हैं। यहां स्थित शाही कक्ष, प्राचीन संरचनाएं और संग्रहालय पर्यटकों को मेवाड़ के गौरवशाली अतीत से रूबरू कराते हैं। किले की ऊंची दीवारों और सीढ़ियों से पूरे क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जो प्रकृति प्रेमियों को खासा आकर्षित करता है।
अनोखे संगम वाला राजस्थानी शहर
किले परिसर में मौजूद लक्ष्मी नारायण मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर धार्मिक और कलात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य यहां की प्राकृतिक सुंदरता को और खास बना देता है, जहां घने जंगलों, वन्य जीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अनुभव मिलता है। कुंभलगढ़ घूमने का सही समय कुंभलगढ़ की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और किले व आसपास के क्षेत्रों को आराम से घूमा जा सकता है। गर्मियों में यहां तापमान काफी अधिक हो जाता है, जिससे घूमना थोड़ा कठिन हो सकता है।
लक्ष्मी नारायण मंदिर
किले परिसर में मौजूद लक्ष्मी नारायण मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर धार्मिक और कलात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य यहां की प्राकृतिक सुंदरता को और खास बना देता है, जहां घने जंगलों, वन्य जीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अनुभव मिलता है। कुंभलगढ़ घूमने का सही समय कुंभलगढ़ की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और किले व आसपास के क्षेत्रों को आराम से घूमा जा सकता है। गर्मियों में यहां तापमान काफी अधिक हो जाता है, जिससे घूमना थोड़ा कठिन हो सकता है।
कुंभलगढ़
कुंभलगढ़ कैसे पहुंचें कुंभलगढ़ तक पहुंचने के लिए हवाई, रेल और सड़क तीनों विकल्प उपलब्ध हैं। नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर है, जहां से टैक्सी द्वारा लगभग 85 किलोमीटर का सफर तय कर कुंभलगढ़ पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए नाथद्वारा नजदीकी स्टेशन है, जो कुंभलगढ़ से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है। सड़क मार्ग से उदयपुर, राजसमंद जैसे शहरों से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर कुंभलगढ़ उन यात्रियों के लिए एक आदर्श गंतव्य है, जो इतिहास की गहराइयों को महसूस करना चाहते हैं और साथ ही प्रकृति की शांति में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं।


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