उत्तराखंड : 1.75 लाख विद्यार्थियों से जुड़े DGP दीपम सेठ, साइबर सुरक्षा के दिए टिप्स
1100 से अधिक राजकीय विद्यालयों में हुआ राज्यव्यापी वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम, AI, डीपफेक, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी से बचाव की दी जानकारी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 27 Aug, 2026 09:35 PMदेहरादून। प्रधानमंत्री के डिजिटल सुरक्षा संदेश और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड पुलिस ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों और डिजिटल जोखिमों के प्रति जागरूक करने के लिए राज्यव्यापी वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में प्रदेश के 1100 से अधिक राजकीय विद्यालयों के कक्षा छह से 12 तक के करीब 1.75 लाख छात्र-छात्राएं वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
कार्यक्रम राजकीय नवोदय विद्यालय, तपोवन, नालापानी, देहरादून स्थित ICT वर्चुअल क्लासरूम स्टूडियो से संचालित हुआ। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, ऑनलाइन फ्रॉड, हैकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर बुलिंग और साइबर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान और कौशल के लिए करें
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए DGP दीपम सेठ ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। विद्यार्थियों के सामने सीखने, नवाचार करने और कौशल विकसित करने के नए अवसर हैं। ऐसे में तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के साथ किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए बच्चों और युवाओं समेत समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक और सतर्क रहना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं ‘Cyber Smart Citizen’ बनने और अपने परिवार व मित्रों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
DGP ने विद्यार्थियों को किसी भी सूचना, फोटो या वीडियो को बिना सत्यापन के फॉरवर्ड नहीं करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी।
AI, डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट पर भी समझाया
कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक साइबर नीलेश आनंद भरणे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF अजय सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक साइबर शांतनु परासर ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। अधिकारियों ने बदलते साइबर अपराधों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
इस दौरान सोशल मीडिया सेफ्टी, AI, डीपफेक, डिजिटल अरेस्ट, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, सेक्सटॉर्शन, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन गेमिंग जैसे विषयों को सरल उदाहरणों, प्रस्तुतीकरण और वीडियो के माध्यम से समझाया गया।
अधिकारियों ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की।
स्कूलों में नियमित होंगे जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और साइबर सुरक्षा से जुड़े सवालों को देखते हुए DGP दीपम सेठ ने राजकीय विद्यालयों में साइबर जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की उम्र और जरूरत के अनुसार सरल एवं व्यावहारिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साइबर सुरक्षा के साथ नशा मुक्ति और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर भी राज्य और जिला स्तर पर नियमित वर्चुअल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही डिजिटल जोखिमों के प्रति सजग बनाना और उन्हें सुरक्षित, जिम्मेदार एवं जागरूक नागरिक के रूप में तैयार करना है।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता



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