उत्तराखंड : 16 नवंबर से शुरू होगी जनगणना की स्व-गणना प्रक्रिया, आमजन की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
उत्तराखंड में 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक होगा जनगणना कार्य, कार्यालयों में संस्कृत में लगेंगी नाम पट्टिकाएं; किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत कृषि मॉडल को मिलेगा बढ़ावा
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 30 Oct, 2026 10:43 AMपीपलकोटी। उत्तराखंड में आगामी जनगणना की तैयारियों को गति देने के साथ ही सरकारी कार्यालयों में संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में सचिव, संस्कृति, शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग, उत्तराखंड शासन दीपक कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को पीपलकोटी में विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनगणना, शिक्षा, कृषि, महिला सशक्तीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में सचिव दीपक कुमार ने बताया कि प्रदेश में 16 नवंबर से स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक जनगणना का कार्य संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्व-गणना की प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में आमजन को व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। साथ ही अधिक से अधिक लोगों को अपनी गणना संबंधी जानकारी स्वयं दर्ज करने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि जनगणना का कार्य सुचारु और प्रभावी ढंग से पूरा हो सके। उन्होंने संबंधित विभागों को सभी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूरी करने के निर्देश भी दिए।
सरकारी कार्यालयों में संस्कृत भाषा को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश की सांस्कृतिक और भाषायी विरासत के संरक्षण की दिशा में सचिव ने सभी कार्यालयाध्यक्षों को अपने-अपने कार्यालयों में द्वितीय राजकीय भाषा संस्कृत में नाम पट्टिकाएं लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में संस्कृत भाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
एकीकृत कृषि मॉडल से बढ़ेगी किसानों की आय
कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से सचिव ने कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और पशुपालन गतिविधियों को एक साथ जोड़कर एकीकृत कृषि मॉडल विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप इस मॉडल को विकसित किया जाए। इससे किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि आधारित गतिविधियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
महिला स्वयं सहायता समूहों को सीएससी से जोड़ने पर जोर
महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर सचिव ने महिला स्वयं सहायता समूहों को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सेवा आधारित गतिविधियों और विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं से जोड़कर उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
छात्राओं को स्वच्छ और सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश
शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान सचिव ने विद्यालयों में बालिका शौचालयों की नियमित साफ-सफाई और उचित रखरखाव सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को विद्यालयों में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
जन औषधि केंद्रों को बढ़ावा देने पर बल
स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में सचिव ने जन औषधि केंद्रों को प्रोत्साहित करने तथा आमजन तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किफायती दरों पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी पंकज उप्रेती, अधिशासी अभियंता तनुज काम्बोज, जिला कार्यक्रम अधिकारी हिमांशु बडोला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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