उत्तराखंड में हर माह 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा भूकम्प चेतावनी सायरन
पूर्व चेतावनी प्रणाली के सेंसर और सायरनों की होगी नियमित जांच, आमजन को भी सायरन की आवाज से कराया जाएगा परिचित
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 7 Oct, 2026 11:16 PMदेहरादून। उत्तराखंड में भूकम्प के प्रति आमजन को जागरूक करने और भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को नियमित रूप से परखने के लिए नई पहल शुरू की जा रही है। अब हर माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे राज्य में भूकम्प चेतावनी सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन किसी वास्तविक भूकम्प की सूचना नहीं होगा, बल्कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के नियमित परीक्षण और जनजागरूकता के उद्देश्य से बजाया जाएगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने देर शाम सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के साथ बैठक कर इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर चर्चा की।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड भूकम्प की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है और राज्य का बड़ा भू-भाग भूकम्पीय दृष्टि से संवेदनशील जोन-4 एवं जोन-5 में आता है। ऐसे में भूकम्प के प्रति जनजागरूकता, पूर्व तैयारी और समय रहते चेतावनी प्राप्त करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत स्थापित सेंसर और सायरनों की नियमित जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक आपदा के समय पूरी प्रणाली प्रभावी ढंग से काम कर सके।
नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की होगी पहचान
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित समय पर सायरन बजाने के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार राज्य में नए सेंसर और सायरन भी स्थापित किए जाएं। नियमित परीक्षण के दौरान यह जांच की जाएगी कि विभिन्न स्थानों पर स्थापित सायरन और संबंधित प्रणाली सही ढंग से काम कर रही है या नहीं।
यदि किसी स्थान पर तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसे तत्काल दूर करने की कार्रवाई की जाएगी। इससे वास्तविक भूकम्प की स्थिति में चेतावनी प्रणाली के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। इन सेंसरों के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है और निर्धारित प्रणाली के जरिए चेतावनी प्रसारित की जाती है।
उन्होंने बताया कि यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली परियोजना के अंतर्गत अतिरिक्त सेंसर स्थापित करने का प्रस्ताव भी गतिमान है। इससे भविष्य में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता को और मजबूत किया जा सकेगा।
6 अक्टूबर के भूकम्प में पूर्व चेतावनी प्रणाली ने किया काम
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास ने बताया कि 6 अक्टूबर 2026 को रात 10:23 बजे चमोली जिले के थराली के निकट 4.9 तीव्रता का भूकम्प दर्ज किया गया था। भूकम्प का केंद्र लगभग 13 किलोमीटर की गहराई में बताया गया।
उन्होंने कहा कि इस दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के आम लोगों तक पहुंचने से पहले ही चेतावनी प्राप्त हुई। भूदेव मोबाइल ऐप और स्थापित सायरनों के माध्यम से लोगों को चेतावनी मिली।
उन्होंने कहा कि यह घटना भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की उपयोगिता को रेखांकित करती है। अचानक आने वाली भूकम्प जैसी आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी लोगों को सुरक्षित स्थान लेने, गैस एवं विद्युत उपकरण बंद करने और आवश्यक सावधानी बरतने के लिए महत्वपूर्ण समय दे सकती है।
सायरन की आवाज से परिचित होंगे लोग
हर माह सायरन बजाने का एक प्रमुख उद्देश्य आमजन को भूकम्प चेतावनी सायरन की आवाज से परिचित कराना भी है। सामान्य परिस्थितियों में लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि वास्तविक भूकम्प की स्थिति में चेतावनी मिलने पर सायरन किस प्रकार सुनाई देगा।
निर्धारित समय पर नियमित रूप से सायरन बजने से लोग इसकी ध्वनि को पहचान सकेंगे। इससे वास्तविक भूकम्प के समय चेतावनी मिलने पर भ्रम और अनावश्यक भय की स्थिति को कम करने में मदद मिलेगी।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं बल्कि जागरूक, सतर्क और आपदा के लिए तैयार करना है।
भूदेव ऐप पर भी मिलेगा परीक्षण संदेश
हर माह की 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन परीक्षण के साथ भूदेव मोबाइल ऐप के उपयोगकर्ताओं को भी परीक्षण चेतावनी संदेश प्राप्त होगा। मोबाइल फोन पर वाइब्रेशन और बीप-बीप की ध्वनि के जरिए चेतावनी संकेत दिया जाएगा।
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल फोन में भूदेव मोबाइल ऐप और सचेत ऐप का अपडेटेड वर्जन इंस्टॉल/अपडेट रखें। साथ ही दोनों ऐप को आवश्यक लोकेशन अनुमति प्रदान करें, ताकि संबंधित क्षेत्र के लिए जारी भूकम्प पूर्व चेतावनी समय पर मोबाइल फोन तक पहुंच सके।
यूएसडीएमए ने आमजन से की अपील
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने लोगों से अपील की है कि हर माह की 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन बजने पर घबराएं नहीं। यह सायरन भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के परीक्षण और जनजागरूकता के लिए बजाया जाएगा।
प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे—
● मोबाइल फोन में भूदेव और सचेत ऐप का अपडेटेड वर्जन रखें।
● दोनों ऐप को आवश्यक लोकेशन अनुमति प्रदान करें।
● सायरन की आवाज को ध्यान से पहचानें, ताकि वास्तविक भूकम्प के समय चेतावनी को समझने में परेशानी न हो।
● निर्धारित समय पर होने वाले सायरन परीक्षण के दौरान घबराएं नहीं।
● परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को भी इस व्यवस्था की जानकारी दें।
● भूकम्प के दौरान सुरक्षित व्यवहार और आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करें।
● आवश्यकता पड़ने पर आयोजित होने वाली मॉक ड्रिल में सक्रिय रूप से भाग लें।
इस पहल के जरिए उत्तराखंड सरकार का उद्देश्य भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पूर्व चेतावनी प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को नियमित परीक्षण के माध्यम से मजबूत करना है।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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