प्रवासी बुद्धिजीवियों से संवाद में CM धामी ने साझा की उत्तराखंड के विकास की प्राथमिकताएं

प्रवासी उत्तराखंडियों के सुझावों को विकास नीतियों में शामिल करने का मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा; पर्यटन, निवेश, रोजगार, कनेक्टिविटी और रिवर्स माइग्रेशन पर जोर

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Lucknow, 27 Sep, 2026 08:57 PM
प्रवासी बुद्धिजीवियों से संवाद में CM धामी ने साझा की उत्तराखंड के विकास की प्राथमिकताएं

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में विभिन्न संस्थानों से जुड़े उत्तराखंड के प्रवासी बुद्धिजीवियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की विकास प्राथमिकताओं, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की। प्रवासी बुद्धिजीवियों ने भी उत्तराखंड के विकास को लेकर अपने सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा में प्रवासी उत्तराखंडवासियों और प्रबुद्धजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि संवाद के दौरान प्राप्त सुझावों को राज्य के विकास के लिए तैयार की जाने वाली नीतियों में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपनी व्यस्तताओं के बावजूद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रवासी बुद्धिजीवियों का आभार भी व्यक्त किया।

बजट बढ़ाकर 1.12 लाख करोड़ रुपये करने का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संपदा वाला राज्य है। राज्य सरकार विकास को गति देने के लिए बुनियादी ढांचे, निवेश, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के बजट का आकार बढ़ाकर करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये किया गया है।

पलायन की चुनौती का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को राज्य के विकास में उपयोगी बनाना है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री द्वारा हाल के कार्यक्रमों में भी साझा किया गया है।

मजबूत कनेक्टिविटी को निवेश की ताकत बताया

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को निवेश और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा समय में कमी आई है।

उन्होंने कहा कि देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार को राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल बताते हुए उन्होंने ऊधमसिंह नगर और पंतनगर की औद्योगिक एवं कृषि क्षेत्र में भूमिका का भी उल्लेख किया। पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को उन्होंने औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

SDG रैंकिंग में उत्तराखंड के शीर्ष स्थान का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने राज्य की विकास उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए नीति आयोग की SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड के शीर्ष स्थान पर रहने की बात कही। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, इस इंडेक्स में उत्तराखंड ने 79 अंक के साथ देश में प्रथम स्थान हासिल किया था।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास के साथ-साथ सुशासन, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक क्षेत्र को मजबूत करना है।

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और युवाओं पर जोर

युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पेपर लीक और नकल के मामलों में कार्रवाई की गई तथा नकल से जुड़े मामलों में 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल विरोधी कानून का उद्देश्य मेहनत करने वाले युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नियुक्ति के पीछे किसी युवा की मेहनत और उसके परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की बात कही। उन्होंने पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक, आध्यात्मिक, साहसिक और प्राकृतिक पर्यटन के विस्तार से सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। हालिया सरकारी बयानों में भी मुख्यमंत्री ने पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को रिवर्स माइग्रेशन से जोड़ते हुए 44 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख किया है।

समान नागरिक संहिता और कानूनों का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए इसे समान अधिकार और सुशासन की दिशा में राज्य सरकार की प्रमुख पहल बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूत करना है।

उन्होंने राज्य की अस्मिता और जनसांख्यिकीय संतुलन से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर भी चर्चा

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने मदरसा बोर्ड से संबंधित व्यवस्था में किए गए बदलाव और उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलें। मुख्यमंत्री के अनुसार, निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं होने वाले 250 से अधिक मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार कर रही है। चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं ने खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य खेल सुविधाओं के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

प्रवासी उत्तराखंडियों की भूमिका महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे उत्तराखंड के प्रवासी बुद्धिजीवी अपने अनुभव, विशेषज्ञता और सुझावों के माध्यम से राज्य के विकास में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रवासी उत्तराखंडवासियों के बीच संवाद को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि उनकी विशेषज्ञता और अनुभव का लाभ राज्य की विकास योजनाओं को मिल सके।

कार्यक्रम में प्रसून जोशी, प्रो. प्रदीप जोशी, अश्विनी लोहानी, प्रो. हर्ष वी. पंत, सुभाष धुलिया, प्रो. धनंजय जोशी, सुष्मिता रावत, डॉ. सरिता पाठक, कुलानंद जोशी, निर्मल पाठक, हरिसुमन बिष्ट, देव रतूड़ी, डॉ. सुषमा रावत, डॉ. निधि गुसाईं, देवेंद्र गुसाईं, डॉ. के.के. पाण्डेय, विनोद बछेती, डी.एस. रावत, डॉ. सरोज पाण्डेय, शंकर पाण्डेय, प्रो. दिनेश सकलानी, प्रो. पवन कुमार जोशी, वीरेंद्र सिंह नेगी, पवन कुमार मैठानी, हरेंद्र असवाल, संजय जोशी, डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय, विजय जोशी, डॉ. मेघा बिष्ट और लक्ष्मी रावत सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गोविंद सिंह ने किया।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

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