सीएम धामी ने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का किया विमोचन, GEP रिपोर्ट भी जारी

कार्बन क्रेडिट को नीति में शामिल करने और आम नागरिकों के लिए वाटर हार्वेस्टिंग को सरल बनाने के निर्देश, विशेषज्ञों के साथ हिमालयी राज्य की पर्यावरणीय चुनौतियों पर मंथन

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Lucknow, 26 Sep, 2026 11:04 PM
सीएम धामी ने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का किया विमोचन, GEP रिपोर्ट भी जारी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद सहित विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का विमोचन किया। साथ ही ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) से संबंधित तकनीकी रिपोर्ट वर्ष 2023-24 एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 भी जारी की गई।

बैठक में GEP की तकनीकी रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं, प्राकृतिक संसाधनों के आर्थिक मूल्यांकन और पर्यावरणीय सेवाओं को राज्य की विकास नीतियों से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने नीति में कार्बन क्रेडिट को शामिल करने तथा वाटर हार्वेस्टिंग को आम नागरिकों के लिए सरल और सहज बनाने के निर्देश दिए।

प्राकृतिक संसाधनों के आर्थिक मूल्यांकन पर जोर

बैठक में GEP के माध्यम से उत्तराखंड के वन, जल, जैव विविधता, मिट्टी संरक्षण, कार्बन अवशोषण और अन्य पर्यावरणीय सेवाओं के आर्थिक मूल्यांकन से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि GEP के माध्यम से राज्य की प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय संपदा के योगदान का वैज्ञानिक और आर्थिक आकलन किया जा सकता है। इससे पर्यावरणीय संसाधनों के महत्व को समझने तथा विकास योजनाओं और नीतियों में उनके योगदान को प्रभावी ढंग से शामिल करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां विशिष्ट हैं। इसलिए राज्य के लिए GEP का ऐसा मॉडल विकसित किया जाना चाहिए, जो स्थानीय परिस्थितियों, आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप हो। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों से इस दिशा में तकनीकी सहयोग और सुझाव देने की अपेक्षा की।

विज्ञान नीति में कार्बन क्रेडिट को शामिल करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में प्रभावी प्रयास किए जाने आवश्यक हैं। उन्होंने अधिकारियों को उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 में कार्बन क्रेडिट को शामिल करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कार्बन अवशोषण, वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय सेवाओं से जुड़े प्रयासों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार प्रदान करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय, वन, जल स्रोत, नदियां और जैव विविधता उत्तराखंड की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा हैं। इनका संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, आजीविका और सतत विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

वाटर हार्वेस्टिंग को आम लोगों के लिए बनाया जाए आसान

मुख्यमंत्री ने वाटर हार्वेस्टिंग को आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को केवल बड़े प्रोजेक्ट या संस्थागत स्तर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके लिए ऐसे सरल और कम लागत वाले तकनीकी मॉडल विकसित किए जाएं, जिन्हें लोग अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में भी आसानी से अपना सकें।

उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की तकनीकों को प्रोत्साहित करने तथा इसमें व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन जरूरी

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा राज्य की महत्वपूर्ण ताकत है। हिमालय, वन, जल स्रोत, नदियां और जैव विविधता पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं आजीविका में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए राज्य की विकास नीति को आगे बढ़ाना आवश्यक है। विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हिमालयी राज्य की चुनौतियों पर केंद्रित है नई विज्ञान नीति

उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 में राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए हिमनद विज्ञान, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, जल संसाधन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रवास, कौशल विकास, उद्यमिता, बौद्धिक संपदा अधिकार और नवाचार जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।

नीति के तहत अनुसंधान एवं विकास संस्थानों तथा नवाचार केंद्रों को मजबूत करने, प्राथमिकता वाले अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रभावी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया है। विज्ञान संचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान पहलों, आउटरीच प्लेटफॉर्म और विज्ञान संचार केंद्रों के माध्यम से क्षमता निर्माण की दिशा में भी कार्य किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों की भागीदारी

बैठक में विशेषज्ञों ने GEP के वैज्ञानिक आधार, पर्यावरणीय संसाधनों से जुड़े आंकड़ों के संकलन एवं विश्लेषण और हिमालयी राज्य में इसके उपयोग की संभावनाओं पर सुझाव दिए। वैज्ञानिक अध्ययनों और अनुसंधान के निष्कर्षों को राज्य की नीति निर्माण प्रक्रिया से जोड़ने तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. शिव कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. परमिंदर मैन, हिमालयन एनवायरनमेंट स्टडीज एंड कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन (HESCO) के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, शिक्षाविद् डॉ. रीमा पंत, UCOST के सुरेंद्र सिंह मनराल और डॉ. विपिन सती सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

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