वंदे मातरम पर कांग्रेस का रुख विभाजनकारी: भट्ट

भाजपा चलाएगी राष्ट्रगीत के इतिहास, अर्थ और गौरवशाली विरासत को लेकर जनजागरण अभियान

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Lucknow, 24 Aug, 2026 06:24 PM
वंदे मातरम पर कांग्रेस का रुख विभाजनकारी: भट्ट

देहरादून, 24 अगस्त। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस के रुख पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस के 1937 के निर्णय को दोबारा स्वीकार करने और राष्ट्रगीत के केवल दो छंदों तक सीमित करने के फैसले को विभाजनकारी राजनीति से प्रेरित बताया। भट्ट ने कहा कि भाजपा ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसके गायन के संवैधानिक अधिकार से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी।

प्रदेश भाजपा मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में भट्ट ने दिल्ली में हुई भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के राजनीतिक प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी देशभर में ‘वंदे मातरम’ के इतिहास, अर्थ और गौरवशाली विरासत को जन-जन, विशेषकर युवाओं तक पहुंचाने के लिए जनजागरण अभियान चलाएगी। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा, राष्ट्रीय चेतना और भारत माता के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।

भट्ट ने कहा कि भाजपा कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के निर्णय को दोबारा स्वीकार किए जाने का विरोध करती है। उनके मुताबिक, राष्ट्रगीत किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है और इसका सम्मान चुनावी गणित या वोट बैंक की राजनीति से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद और संविधान सर्वोच्च हैं तथा संसद से पारित कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का पालन सभी को करना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी आजादी के आंदोलन से जुड़े इस राष्ट्रगीत के पूर्ण स्वरूप को लेकर देश में भ्रम पैदा कर रही है। भट्ट ने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि ‘वंदे मातरम’ पूरे भारत का है और इसके सम्मान की रक्षा के लिए पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता प्रतिबद्ध है।

भट्ट ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी ‘वंदे मातरम’ को शुद्ध राष्ट्रीय भावना से जुड़ा बताया था। उन्होंने 1937 के संदर्भ में सी. राजगोपालाचारी की चेतावनी का उल्लेख करते हुए कहा कि सांप्रदायिक दबाव में किए गए समझौते आगे नई मांगों का आधार बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 24 जनवरी 1950 को ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ को लेकर लिए गए निर्णयों को भी व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार के हालिया कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसके पूर्ण स्वरूप के सम्मान को लेकर देश में व्यापक चर्चा हुई। भट्ट ने कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान और सार्वजनिक गायन की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है तथा किसी भी प्रकार के जानबूझकर व्यवधान को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

‘हरदा कार्यकर्ताओं को वंदे मातरम के सम्मान के लिए प्रेरित करें’

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा ‘वंदे मातरम’ को लेकर दिए गए बयान पर भट्ट ने कहा कि रावत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनसे अपेक्षा है कि वे अपने कार्यकर्ताओं को राष्ट्रगीत के सम्मान और गायन के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन से जुड़े इस गीत के प्रति सभी को सम्मान की भावना रखनी चाहिए।

पूरा राष्ट्रगीत याद नहीं होने के सवाल पर भट्ट ने कहा कि लंबे समय तक इसके पूर्ण स्वरूप को पर्याप्त रूप से सामने नहीं लाया गया, इसलिए संभव है कि कई लोगों को सभी छंद याद न हों। उन्होंने कहा कि नियमित गायन और अभ्यास से यह लोगों के व्यवहार का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, जो लोग पूरा राष्ट्रगीत नहीं गा सकते, वे भी उसके सम्मान में अपनी गतिविधियां रोककर खड़े हो सकते हैं।

भट्ट ने कहा कि भाजपा का अभियान किसी राजनीतिक दल के खिलाफ मात्र अभियान नहीं होगा, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं और आम लोगों को ‘वंदे मातरम’ के इतिहास, अर्थ और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि पार्टी देशभर में यह संदेश लेकर जाएगी कि राष्ट्रगीत का सम्मान राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय है।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, मीडिया सह प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी और हनी पाठक मौजूद रहे।


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