साहित्य और संस्कृति से सशक्त होगी नई पीढ़ी: प्रदीप बत्रा

अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव में साहित्यिक विरासत, भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने पर जोर

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Lucknow, 26 Oct, 2026 09:19 PM
साहित्य और संस्कृति से सशक्त होगी नई पीढ़ी: प्रदीप बत्रा

देहरादून, 25 अक्टूबर। उत्तराखंड में साहित्य, संस्कृति और कला को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव में देश-विदेश की प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने शिरकत की, जबकि लेखक गाँव के संस्थापक एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने साहित्य और संस्कृति के सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे। महोत्सव के दौरान पुस्तकों का लोकार्पण किया गया और साहित्यिक सृजन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।

साहित्य समाज की चेतना और संस्कृति का प्रतिबिंब: प्रदीप बत्रा

कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि साहित्य किसी भी समाज की वैचारिक चेतना, सांस्कृतिक पहचान और मानवीय संवेदनाओं का प्रतिबिंब होता है। साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने लेखक गाँव की परिकल्पना की सराहना करते हुए इसके माध्यम से साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की बात कही।

साहित्य और कला से मजबूत होते हैं मानवीय मूल्य: डॉ. निशंक

कार्यक्रम में लेखक गाँव के संस्थापक, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने साहित्य, संस्कृति और कला को समाज की चेतना तथा राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं, सद्भाव और सकारात्मक परिवर्तन की भावना को भी मजबूत करता है।

उन्होंने लेखक गाँव की परिकल्पना के पीछे साहित्यकारों, विद्वानों, शोधार्थियों और युवा रचनाकारों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराने की भावना को महत्वपूर्ण बताया, जहाँ विचारों का आदान-प्रदान हो और साहित्यिक सृजन को प्रोत्साहन मिले। उन्होंने भारतीय भाषाओं, सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

पुस्तकों का लोकार्पण, मंत्री प्रदीप बत्रा का सम्मान

महोत्सव के दौरान कई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही साहित्य और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ तथा रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक और आर्यन देव ने कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा को सम्मानित किया। यह सम्मान महोत्सव में उनकी सहभागिता के प्रति अभिनंदन के रूप में प्रदान किया गया।

देश-विदेश की प्रतिष्ठित हस्तियों ने की सहभागिता

महोत्सव में मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी, गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. भाग्येश झा और वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध साहित्यकार एवं उद्योगपति इंद्रजीत शर्मा, ऑस्ट्रेलिया की सुप्रसिद्ध लेखिका मृदुल कीर्ति, लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक और आर्यन देव सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

भारतीय साहित्यिक विरासत को वैश्विक मंच देने की पहल

अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव ने साहित्यकारों, कलाकारों और विद्वानों को एक साझा मंच प्रदान किया। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक संवाद का विस्तार करना है। महोत्सव के माध्यम से साहित्यिक विचारों के आदान-प्रदान, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किया गया।


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