नशा मुक्त समाज के लिए संकल्प, संवाद और सामुदायिक एकजुटता जरूरी: राज्यपाल

‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नशे के दुष्प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर किया मंथन, जारी हुआ ‘नशा मुक्त उत्तराखंड हेतु देहरादून घोषणा-पत्र’

YUGVARTA NEWS

YUGVARTA NEWS

Lucknow, 10 Sep, 2026 10:34 AM
नशा मुक्त समाज के लिए संकल्प, संवाद और सामुदायिक एकजुटता जरूरी: राज्यपाल

देहरादून, 9 सितंबर। नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत बुधवार को लोक भवन में ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ ही नशा मुक्त समाज के निर्माण में शिक्षण संस्थानों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान ‘नशा मुक्त उत्तराखंड हेतु देहरादून घोषणा-पत्र’ जारी किया गया। घोषणा-पत्र में नशे के खिलाफ जनभागीदारी बढ़ाने और ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया है। इसमें युवाओं को नशे से दूर रखने में परिवार की भूमिका मजबूत करने, नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार एवं पुनर्वास, सामुदायिक भागीदारी तथा जागरूकता को बढ़ावा देने सहित दस प्रमुख संकल्प शामिल किए गए हैं।

शिक्षण संस्थानों में नशा विरोधी वातावरण पर जोर

कार्यक्रम में ‘व्यसन मुक्त, सशक्त शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण’ विषय पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। परिचर्चा का संचालन अनूप नौटियाल ने किया। इसमें दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, सीआईएमएस ग्रुप ऑफ कॉलेज एवं सजग इंडिया के अध्यक्ष ललित जोशी, डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. संजय जसोला तथा स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, देहरादून के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने प्रतिभाग किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यार्थियों को नशे से बचाने के लिए शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक और नशा विरोधी वातावरण विकसित करना जरूरी है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए प्रभावी काउंसलिंग, जागरूकता कार्यक्रम और आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था को मजबूत किए जाने पर भी जोर दिया गया।

समुदाय की भागीदारी को बताया अहम

इसके बाद ‘नशा मुक्त समाज-समुदाय आधारित’ विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें विशेष प्रमुख सचिव, खेल अमित कुमार सिन्हा, मैक्स हॉस्पिटल की वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. सलोनी, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, देहरादून की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर तथा आईजी निलेश आनंद भरणे ने विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभाग किया।

विशेषज्ञों ने नशे की रोकथाम के लिए परिवार, समुदाय, शिक्षण संस्थानों, प्रशासन और युवाओं के बीच समन्वय को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या का समाधान केवल कानून और प्रशासनिक कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि जागरूकता, समय पर उपचार, काउंसलिंग, पुनर्वास और सामाजिक सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।

नशे के खिलाफ अभियान को जनआंदोलन बनाने की जरूरत: राज्यपाल

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली समस्या नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ चल रहे प्रयासों को केवल सरकारी अभियान तक सीमित रखने के बजाय जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवाओं, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी के बिना नशा मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल करना कठिन है। युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेल, शिक्षा, कौशल विकास, रचनात्मक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

जागरूकता से लेकर उपचार और पुनर्वास तक सामूहिक प्रयास जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि नशा मुक्ति के लिए जागरूकता, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना होगा। शिक्षण संस्थानों में नशा मुक्त वातावरण के साथ विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने पुलिस, मनोवैज्ञानिकों, सामाजिक संस्थाओं और अन्य संबंधित तंत्रों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि नशे की समस्या से बाहर निकलने में परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और विशेष रूप से मातृशक्ति इस लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नुक्कड़ नाटक के जरिए दिया नशा मुक्ति का संदेश

कार्यक्रम का शुभारंभ अपर सचिव, उच्च शिक्षा मनुज गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए नशे के खिलाफ जागरूकता और जनभागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इसके बाद जोनल निदेशक, उत्तराखंड देवानंद ने ‘नशा निवारण एवं युवा सतर्कता’ विषय पर अपने विचार रखे।

दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग की ओर से नशे के दुष्प्रभावों और उससे बचाव का संदेश देने के लिए प्रभावी नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

विद्यार्थियों से संवाद, पुस्तक का विमोचन और नशा मुक्ति संकल्प

कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के लिए प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से नशे की लत से बचाव, मानसिक स्वास्थ्य, उपचार एवं पुनर्वास तथा नशा छोड़ने के बाद सामान्य जीवन में लौटने से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे।

इस अवसर पर राज्यपाल ने डॉ. रोहित रस्तोगी द्वारा रचित पुस्तक ‘नशा मुक्त नव-निर्माण’ का विमोचन किया। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने उपस्थित विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को ‘नशा मुक्ति संकल्प’ दिलाया। कार्यक्रम का संदेश रहा कि नशा मुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

#नशामुक्तउत्तराखंड #नशामुक्तसमाज #DrugFreeUttarakhand #GurmeetSingh #Dehradun #Uttarakhand #Youth #NashaMukti


सर्वाधिक पसंद

Leave a Reply

comments

Loading.....
  1. No Previous Comments found.

moti2