ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाएगा उत्तराखंड: मदन कौशिक

रियल टाइम मॉनिटरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम मजबूत करने के निर्देश, बारिश को देखते हुए सभी विभाग 24×7 अलर्ट मोड पर रहें

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Lucknow, 30 Aug, 2026 07:06 PM
ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाएगा उत्तराखंड: मदन कौशिक

देहरादून, 30 अगस्त। उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने उनकी निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) पहुंचकर उन्होंने प्रदेश में स्थित ग्लेशियर झीलों की स्थिति और संभावित जोखिमों की विस्तृत समीक्षा की।

मदन कौशिक ने कहा कि भौगोलिक रूप से संवेदनशील उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच ग्लेशियर और ग्लेशियर झीलों में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी बेहद जरूरी है। उन्होंने ग्लेशियर झीलों के जलस्तर, आकार, जलभराव और संभावित बदलावों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन, सेंसर आधारित निगरानी और अन्य आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं का अध्ययन कर जरूरत के अनुसार उनका इस्तेमाल किया जाए। साथ ही संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।

संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत हो अर्ली वार्निंग सिस्टम

आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में जहां जरूरत हो, वहां अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जाएं। इससे किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाया जा सकेगा और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से सुरक्षित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की तैयारियों का उद्देश्य केवल घटना के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक निगरानी और पूर्व चेतावनी के जरिए जोखिम को पहले ही कम करना होना चाहिए।

बारिश की स्थिति की भी हुई समीक्षा

बैठक में प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और इससे उत्पन्न परिस्थितियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मदन कौशिक ने स्पष्ट किया कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर काम करने के निर्देश दिए।

उन्होंने राज्यभर में बारिश की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, बिजली-पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था और अन्य आवश्यक सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

संवेदनशील स्थानों पर पहले से तैनात रहे मशीनरी

मदन कौशिक ने SEOC को सभी जिलों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द खोलने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखने को कहा।

संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीन, आवश्यक उपकरण और तकनीकी दल तैयार रखने के निर्देश दिए गए, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके।

जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जलनिकासी की व्यवस्था, पर्याप्त पंप और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिए गए। बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं के प्रभावित होने की स्थिति में अतिरिक्त टीमों को तत्काल भेजने और वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने को कहा गया।

दूरस्थ क्षेत्रों में जरूरी सामान का पर्याप्त भंडारण

मंत्री ने निर्देश दिए कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति समेत सभी संबंधित विभाग पूर्ण समन्वय के साथ काम करें।

दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय लोगों को परेशानी न हो।

मौसम और मार्ग की स्थिति देखकर संचालित हो यात्रा

मदन कौशिक ने यात्रा संचालन को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौसम और मार्ग की वास्तविक स्थिति को देखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए।

अत्यधिक बारिश या मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाए।

नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी

मंत्री ने प्रदेश की नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए। नदी किनारे रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक करने और खतरे की आशंका होने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा गया।

डैम और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से सूचना देकर अलर्ट करने तथा जरूरत पड़ने पर पड़ोसी राज्यों को भी समय रहते सूचित करने के निर्देश दिए गए।

संचार व्यवस्था बाधित होने पर तत्काल सक्रिय हो वैकल्पिक सिस्टम

भारी बारिश या भूस्खलन से मोबाइल नेटवर्क अथवा अन्य संचार सेवाएं बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय करने के निर्देश दिए गए।

मंत्री ने दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में संचार व्यवस्था बाधित होने से किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की विशेष निगरानी

संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए।

मदन कौशिक ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं और अन्य गंभीर मरीजों को समय रहते सुरक्षित अथवा चिकित्सा सुविधाओं वाले स्थानों पर पहुंचाया जाए। जरूरत होने पर हेलीकॉप्टर सेवा का भी इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सहायता के अभाव में किसी भी स्थिति में जनहानि नहीं होनी चाहिए।

डेंगू की रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर अभियान

बैठक में प्रदेश में डेंगू की रोकथाम की भी समीक्षा की गई। मदन कौशिक ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने जलभराव वाले स्थानों की तत्काल पहचान कर पानी की निकासी सुनिश्चित करने, नियमित फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाने को कहा।

साथ ही जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट, पर्याप्त दवाइयां, रक्त, बेड और चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, उपाध्यक्ष ले. कर्नल (अ.प्रा.) रघुवीर सिंह भंडारी, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा, रोहित कुमार, प्रतिभा पुरोहित, मोहित माथुर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


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