महेंद्र भट्ट का कांग्रेस से सवाल, हिमाचल में सही तो उत्तराखंड में विरोध क्यों?

वाइल्ड फ्लावर हॉल की ई-नीलामी का हवाला देकर कांग्रेस को घेरा, बोले- सरकारी परिसंपत्तियों के उपयोग पर दोहरा रवैया छोड़ें

3 Nov, 2026 08:12 PM
महेंद्र भट्ट का कांग्रेस से सवाल, हिमाचल में सही तो उत्तराखंड में विरोध क्यों?

देहरादून, 3 नवंबर। उत्तराखंड में सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब हिमाचल में सरकारी परिसंपत्तियों के आर्थिक उपयोग और राजस्व बढ़ाने के लिए ई-नीलामी की व्यवस्था अपनाई जा रही है, तो उत्तराखंड में इसी तरह की संभावनाओं पर विचार करने का कांग्रेस विरोध क्यों कर रही है?

महेंद्र भट्ट ने शिमला स्थित वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल का उदाहरण देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने होटल के संचालन एवं प्रबंधन के अधिकार प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी के माध्यम से प्रदान किए हैं। इस व्यवस्था के तहत राज्य सरकार को होटल के वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा मिलने की बात कही गई है। आगामी 35 वर्षों में इससे लगभग 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान भी व्यक्त किया गया है।

भट्ट ने कहा कि हिमाचल सरकार इस व्यवस्था को सार्वजनिक संपत्ति के बेहतर आर्थिक उपयोग और राज्य की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। ऐसे में उत्तराखंड में सरकारी परिसंपत्तियों के पुनर्विकास और आर्थिक उपयोग की संभावनाओं पर कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

पटवाडांगर से अलकनंदा होटल तक के प्रस्तावों पर उठाए सवाल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड में पटवाडांगर, एचएमटी रानीबाग, रामगढ़, डाकपत्थर और अलकनंदा होटल जैसी सरकारी परिसंपत्तियों के भूमि उपयोग, पुनर्विकास और पर्यटन निवेश की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार इन स्थानों पर फिलहाल कोई परियोजना क्रियान्वित नहीं की जा रही है। ऐसे में किसी प्रस्ताव, प्रारंभिक अध्ययन और अंतिम स्वीकृति के बीच अंतर समझना जरूरी है। केवल संभावित योजनाओं को अंतिम परियोजना या सरकारी जमीन बेचने का निर्णय बताकर प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

भट्ट ने कहा कि सरकारी संपत्तियों से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता, जनहित, पर्यावरण संरक्षण और राज्य के आर्थिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापार प्रभावित होने का दावा

महेंद्र भट्ट ने त्योहारों के दौरान आंदोलनों और प्रदर्शनों से व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने हालिया प्रदर्शनों के कारण व्यापार प्रभावित होने और हजारों करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान का दावा किया है। संगठन ने त्योहारों के दौरान बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां निर्बाध रखने की मांग भी की है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, श्रमिकों और आम नागरिकों की आजीविका एवं सुविधाओं का ध्यान रखना भी आवश्यक है। उत्तराखंड में भी राजनीतिक कार्यक्रमों और आंदोलनों के दौरान स्थानीय व्यापार तथा आमजन की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

तथ्यों के आधार पर चर्चा करे कांग्रेस : भट्ट

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस से सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों के उपयोग को लेकर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन राज्य के राजस्व और विकास की संभावनाओं से जुड़ा विषय है। इस पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों और जनहित के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस से यह भी पूछा कि हिमाचल प्रदेश में उसकी सरकार जिस तरह सरकारी परिसंपत्तियों के आर्थिक उपयोग की व्यवस्था अपना रही है, उत्तराखंड में समान उद्देश्य वाले प्रस्तावों पर उसका विरोध किस आधार पर है।


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