उत्तराखंड की संस्कृति और अनछुए पर्यटन स्थलों को दुनिया तक पहुंचाएं क्रिएटर्स : सीएम धामी
‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026’ में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से मुख्यमंत्री का संवाद, स्थानीय उत्पादों, महिला स्वयं सहायता समूहों और पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने का आह्वान
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 10 Oct, 2026 08:55 PMदेहरादून, 10 अक्टूबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स से उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं, पारंपरिक खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य और अनछुए पर्यटन स्थलों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच और युवाओं की रचनात्मकता उत्तराखंड की पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मुख्यमंत्री शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026’ कार्यक्रम में प्रदेश के प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, कलाकारों और मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों के साथ संवाद कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब दिए और उन्हें उत्तराखंड की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
स्थानीय उत्पादों और अनछुए पर्यटन स्थलों को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। राज्य में अनेक प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने मिलम और पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा और मलारी जैसे क्षेत्रों की संभावनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स की एक प्रभावशाली वीडियो या यात्रा-कथा किसी अनजान गांव अथवा पर्यटन स्थल को नई पहचान दिला सकती है। इससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने क्रिएटर्स से अपील की कि वे उत्तराखंड की वास्तविक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को तथ्यपरक एवं जिम्मेदार तरीके से प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सफलता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सही जानकारी देना जरूरी है।
सोशल मीडिया से स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार
मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय शिल्पकारों और पारंपरिक उत्पाद निर्माताओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया स्थानीय उत्पादों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
उन्होंने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
धामी ने कंटेंट क्रिएटर्स से पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प, पारंपरिक धातु के बर्तनों और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को अपनी डिजिटल सामग्री में जगह देने का आग्रह किया। इससे स्थानीय कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक हुनर को व्यापक पहचान मिल सकती है।
राज्यहित और भावी पीढ़ियों का कल्याण बड़े फैसलों का आधार
कार्यक्रम के दौरान नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे फैसलों पर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय राज्यहित और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े फैसले के प्रभाव को अगले 25 से 50 वर्षों के संदर्भ में देखना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके प्रारूप के लिए व्यापक जनसुझाव लिए गए थे। उन्होंने नकल विरोधी कानून को प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मेहनती युवाओं के हितों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनकी मेहनत और योग्यता का सम्मान होगा तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।
रिवर्स माइग्रेशन और स्वरोजगार पर भी हुई चर्चा
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन, होमस्टे और पर्यटन आधारित रोजगार की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की बिक्री, पर्यटन, होमस्टे और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी गतिविधियां लोगों को अपने गांवों में रहकर आजीविका अर्जित करने के अवसर प्रदान कर सकती हैं।
उन्होंने पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में रिवर्स माइग्रेशन के संबंध में मुख्यमंत्री ने लगभग 44 प्रतिशत का आंकड़ा भी साझा किया, हालांकि इस आंकड़े का आधार और संदर्भ स्पष्ट नहीं किया गया।
उत्तराखंड को वेडिंग और फिल्म डेस्टिनेशन बनाने पर जोर
कार्यक्रम में उत्तराखंड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के कारण विवाह पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने त्रियुगीनारायण, मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर और मुक्तेश्वर जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर होटल सुविधाओं, कनेक्टिविटी और अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा सकता है। उन्होंने इस दिशा में कंटेंट क्रिएटर्स से सुझाव भी मांगे।
फिल्म निर्माण और फिल्म सिटी की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्राकृतिक दृश्य, पर्वतीय क्षेत्र, नदियां और पारंपरिक गांव फिल्म शूटिंग के लिए विशिष्ट अवसर प्रदान करते हैं। फिल्म और मनोरंजन उद्योग से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
युवाओं को मेहनत, अनुशासन और सकारात्मकता का संदेश
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी जीवन यात्रा और ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने युवाओं को मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का महत्व समझाते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों से सीख लेकर आगे बढ़ना सफलता के लिए आवश्यक है।
उन्होंने अपनी व्यस्त दिनचर्या के संदर्भ में योग, ध्यान और अनुशासित जीवनशैली का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के बीच जाना, लोगों का स्नेह और विश्वास प्राप्त करना उन्हें निरंतर काम करने की प्रेरणा देता है।
हरिद्वार में आगामी कुंभ की तैयारियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कंटेंट क्रिएटर्स को किया सम्मानित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित किया और उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उपस्थित प्रतिभाओं में गायक पवनदीप राजन, यूट्यूबर सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी सहित मनोरंजन जगत से जुड़ी अन्य हस्तियां शामिल रहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का सशक्त साधन है।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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