पारंपरिक रंग में रंगे मुख्यमंत्री धामी, कलाकारों के साथ थिरके और स्वयं बजाया ढोल

जनजातीय संस्कृति, परंपरा और गौरव का उत्सव बना उत्तराखंड आदि रंगोत्सव, खटीमा में बिखरे सांस्कृतिक विविधता के रंग, आदि रंगोत्सव में दिखी उत्तराखंड समेत देशभर की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति और परंपराओं की झलक

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Lucknow, 4 Oct, 2026 06:39 PM
पारंपरिक रंग में रंगे मुख्यमंत्री धामी, कलाकारों के साथ थिरके और स्वयं बजाया ढोल

खटीमा/चम्पावत, 4 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के खटीमा में रविवार को तीन दिवसीय ‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आयोजन में उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, लोकसंगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए देश की समृद्ध जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक विविधता की झलक पेश की।

आदि रंगोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पारंपरिक सांस्कृतिक रंग में नजर आए। उन्होंने कलाकारों के साथ थिरककर उनका उत्साह बढ़ाया और स्वयं ढोल बजाया। मुख्यमंत्री के इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों और दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम का पौधा और महाराणा प्रताप की प्रतिमा भेंट कर स्वागत किया। वहीं फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कलाकारों को भी पौधा, भगवान हनुमान की गदा और नीम करौली बाबा की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया गया।

जनजातीय संस्कृति और गौरव का उत्सव है आदि रंगोत्सव: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड आदि रंगोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरव का उत्सव है। ऐसे आयोजन विभिन्न जनजातीय समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि खटीमा अपने आप में ‘मिनी इंडिया’ है, जहां विभिन्न समुदायों की संस्कृति और परंपराओं के अनेक रंग एक साथ देखने को मिलते हैं। थारू, बोक्सा, जौनसारी और राजी समेत विभिन्न जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर उन्हें सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का संरक्षण करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

खटीमा एकलव्य विद्यालय के विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने खटीमा स्थित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल के विस्तार और सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले हॉस्टल का टेंडर पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा।

उन्होंने बताया कि विद्यालय में 240 बालकों और 240 बालिकाओं समेत कुल 480 विद्यार्थियों के अध्ययन की क्षमता होगी। केंद्रीय मंत्री ने विद्यालय के शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्रियों से पिथौरागढ़ क्षेत्र में भी एक आवासीय एकलव्य विद्यालय स्थापित करने का अनुरोध किया।

जनजातीय परिवारों के आवास पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अटल आवास योजना में आय सीमा को व्यावहारिक बनाया है और आवास निर्माण की लागत में भी वृद्धि की है, ताकि अधिक पात्र परिवार योजना का लाभ उठा सकें। ऊधम सिंह नगर जिले में योजना के तहत तीन करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत भी बड़ी संख्या में जनजातीय परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इस वर्ष आवास के लिए प्राप्त आवेदनों में करीब 28 प्रतिशत आवेदन जनजातीय समाज के परिवारों के हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत प्रथम चरण में 824 और दूसरे चरण में 101 आवासों का निर्माण किया जा चुका है।

शिक्षा और छात्रावासों पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के विद्यार्थियों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और आईटीआई संस्थानों के विकास पर भी काम किया जा रहा है। बाजपुर में 100 बेड के बालक छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी लागत 16 करोड़ रुपये से अधिक है। बालिका छात्रावास के लिए भी चार करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।

इसके अलावा थारू राजकीय इंटर कॉलेज के सौंदर्यीकरण और आधुनिकीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है।

एवरेस्ट फतह करने वाले मोहन सिंह राणा और टीला सेन को बधाई

मुख्यमंत्री ने खटीमा के अंजनिया गांव निवासी बीएसएफ जवान मोहन सिंह राणा और चारूबेटा की निवासी टीला सेन को माउंट एवरेस्ट फतह करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दोनों ने अपनी उपलब्धि से थारू समाज के साथ-साथ उत्तराखंड का भी गौरव बढ़ाया है और उनकी सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जनजातीय समाज को रोजगार और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। जनजातीय समुदायों के उत्पादों को बाजार से जोड़ने, उनके विपणन को बढ़ावा देने तथा रिवॉल्विंग फंड और निवेश सहायता के जरिए उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020 से 2025 तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं।

जनजातीय मंत्रालय के गठन का किया उल्लेख

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि वर्ष 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जनजातीय मामलों के लिए पृथक मंत्रालय का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य थारू, बोक्सा, जौनसारी सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना था।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से खटीमा में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल का निर्माण संभव हुआ है और केंद्र सरकार इसके विस्तार के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च करेगी। उन्होंने क्षेत्र की जनजातीय समस्याओं के समाधान के लिए प्राथमिकता से कार्य करने का आश्वासन दिया।

किरेन रिजिजू ने की जनजातीय विविधता की सराहना

केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखंड की जनजातीय विविधता और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि थारू, बोक्सा, जौनसारी और राजी समेत विभिन्न जनजातीय समुदायों की विशिष्ट संस्कृति और परंपराएं उत्तराखंड की पहचान को समृद्ध बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में जनजातीय समाज के कल्याण और उनकी पहचान को विशेष प्राथमिकता मिली है। जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को सम्मान देने के लिए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने पीएम-जनमन जैसी योजनाओं के जरिए दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक विकास की पहुंच बढ़ाने की बात कही।

देशभर के कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

आदि रंगोत्सव में उत्तराखंड के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मिजोरम और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक कला की प्रस्तुतियां दीं।

रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा और लोक प्रस्तुतियों ने आयोजन को जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से भर दिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कलाकारों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाओं को धरातल पर उतारने और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर लगातार काम कर रही है। जनजातीय समाज के सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार आगे भी इसी दिशा में कार्य करती रहेगी।


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