माउंट त्रिशूल फतह के लिए रवाना हुआ सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स का पर्वतारोहण दल
रुड़की के बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से अभियान को मिली हरी झंडी, 7,120 मीटर ऊंची चोटी पर चढ़ाई के लिए जवानों ने की है विशेष तैयारी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 6 Sep, 2026 04:03 PMरुड़की, 5 सितंबर 2026। भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स ने हिमालय की चुनौतीपूर्ण चोटियों में शामिल माउंट त्रिशूल पर पर्वतारोहण अभियान शुरू किया है। 7,120 मीटर (23,360 फीट) ऊंची इस चोटी पर चढ़ाई के लिए अभियान दल को शनिवार को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
माउंट त्रिशूल गढ़वाल हिमालय की कठिन चोटियों में गिनी जाती है। अत्यधिक ऊंचाई, तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण मार्ग और तेजी से बदलता मौसम इस अभियान को बेहद कठिन बनाते हैं। ऐसे में अभियान दल के सामने शारीरिक क्षमता के साथ-साथ तकनीकी दक्षता, मानसिक मजबूती और विपरीत परिस्थितियों में टीम के रूप में काम करने की क्षमता की भी परीक्षा होगी।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने बढ़ाया अभियान दल का उत्साह
अभियान के फ्लैग-ऑफ समारोह में सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला तथा बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया समेत वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कोर ऑफ इंजीनियर्स के पर्वतारोहण अभियानों में अनुभव रखने वाले कई वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में शामिल हुए और अभियान दल के सदस्यों से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया।
कठिन चढ़ाई के लिए विशेष प्रशिक्षण
अभियान दल में अनुभवी अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी और अन्य रैंक के जवान शामिल हैं। दल ने माउंट त्रिशूल की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रशिक्षण और तैयारी की है। इसमें ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए अनुकूलन, कठोर शारीरिक प्रशिक्षण, पर्वतारोहण की तकनीकों का अभ्यास तथा अभियान से जुड़ी तकनीकी और लॉजिस्टिक तैयारियां शामिल हैं।
फ्लैग-ऑफ समारोह से पहले अभियान टीम लीडर ने विस्तृत ऑपरेशनल ब्रीफिंग दी। इसमें प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम, चढ़ाई के मार्ग, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम और कठिन भू-भाग से निपटने के लिए किए गए प्रशासनिक इंतजामों की जानकारी दी गई।
नेतृत्व और टीमवर्क पर जोर
सभा को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान दल की शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कोर ऑफ इंजीनियर्स की रोमांच और पर्वतारोहण की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे अभियान सैनिकों में नेतृत्व, अनुशासन, सहनशक्ति, टीमवर्क और परिस्थितियों का आकलन कर जोखिम लेने जैसे महत्वपूर्ण गुणों को मजबूत करते हैं।
विशेष रूप से ऊंचाई वाले सैन्य क्षेत्रों में इन क्षमताओं का महत्व और बढ़ जाता है। पर्वतारोहण अभियानों को सैन्य प्रशिक्षण और परिचालन तैयारी के व्यापक अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
अभियान ध्वज सौंपकर दल को किया गया रवाना
समारोह के अंत में अभियान टीम लीडर को औपचारिक रूप से ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपा गया। इसके बाद दल को बेस कैंप की ओर रवाना किया गया, जहां से माउंट त्रिशूल की चढ़ाई के अगले चरण की शुरुआत होगी।
माउंट त्रिशूल अभियान कोर ऑफ इंजीनियर्स की साहस, दृढ़ता, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला प्रयास है। चुनौतीपूर्ण हिमालयी परिस्थितियों में यह अभियान भारतीय सेना के जवानों की पेशेवर क्षमता और विपरीत परिस्थितियों में मिशन पूरा करने के संकल्प को भी प्रदर्शित करेगा।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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