सैनिक कल्याण में उत्तराखंड बना मॉडल, अग्निवीरों के लिए रोजगार सेल बनाने वाला पहला राज्य
धामी सरकार ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के हित में लिए कई फैसले; अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण, शहीदों के आश्रितों को नौकरी और अनुग्रह राशि में बढ़ोतरी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 27 Aug, 2026 09:51 PMदेहरादून। सैनिक कल्याण के क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार की पहल अब दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उत्तराखंड अग्निवीरों के लिए अलग रोजगार सेल गठित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
हाल ही में धामी कैबिनेट ने अग्निवीर रोजगार सेल के गठन को मंजूरी दी है। चार वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद वापस लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें विभिन्न अवसरों से जोड़ने में यह सेल मदद करेगा। इसके अलावा राज्य सरकार अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण का फैसला पहले ही कर चुकी है।
शहीदों की प्रतिमाएं पैतृक गांवों में होंगी स्थापित
शहीद सैनिकों की वीरता और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सरकार ने उनके पैतृक गांवों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इसका उद्देश्य बलिदानियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ उनकी शौर्य गाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
सरकार ने परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दी है। वहीं अन्य बलिदानियों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गई है।
जल्द जनता को समर्पित होगा सैन्य धाम
देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब इसके लोकार्पण की तैयारियां की जा रही हैं। राज्य के शहीद सैनिकों की स्मृति में बनाए गए सैन्य धाम में उनके घर-आंगन की मिट्टी को सम्मानपूर्वक लाया गया है। यहां प्रदेश के बलिदानी सैनिकों की शौर्य गाथाओं को भी प्रदर्शित किया गया है।
सैन्य धाम को उत्तराखंड की सैन्य परंपरा, वीरता और बलिदान की विरासत के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है।
28 शहीद आश्रितों को मिल चुकी सरकारी नौकरी
धामी सरकार की नीति के तहत प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया जारी है। अब तक 28 पात्र आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है। सरकार ने इस सुविधा के लिए आवेदन की समय सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी है।
सैनिकों को संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में छूट
सेवारत और पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीदने पर भी राहत दी जा रही है। 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों से जुड़े भूमि धोखाधड़ी के मामलों के निस्तारण के लिए भी सरकार ने पहल की है। जिला अदालतों में लंबित ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
‘सैनिकों और शहीद परिवारों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। शहीदों के आश्रितों और परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि समेत सैनिक कल्याण के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि देहरादून में तैयार सैन्य धाम राज्य की समृद्ध सैन्य विरासत, वीरता और बलिदान का प्रतीक बनेगा।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता



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