पर्वतीय गांवों तक स्वास्थ्य-शिक्षा की मजबूत पहुंच से ही रुकेगा पलायन: दिनेश अग्रवाल
सेतु आयोग की प्रेस वार्ता में नीति सुधारों, स्मार्ट ग्राम केंद्र, कौशल विकास, शहरी नियोजन और डेटा आधारित सुशासन पर जोर
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 24 Aug, 2026 07:45 PMदेहरादून, 24 अगस्त। उत्तराखण्ड के वास्तविक और सतत विकास के लिए प्रदेश के पर्वतीय गांवों तक मजबूत अवसंरचना और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। खासतौर पर स्वास्थ्य और शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से पलायन रोकने, स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। यह बात अवस्थापना विकास सलाहकार सेतु आयोग के दिनेश अग्रवाल ने सोमवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
दिनेश अग्रवाल ने कहा कि गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के मजबूत अवसर उपलब्ध होने पर युवा अपने गांव में ही बेहतर भविष्य की संभावनाएं देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘विकसित उत्तराखण्ड’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए नीति निर्माण में जमीनी जरूरतों और वास्तविक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सेतु आयोग राज्य में नीतिगत सुधारों और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों—अर्थव्यवस्था एवं कौशल, अवसंरचना एवं कल्याण, शहरी एवं उप शहरी विकास, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन तथा डेटा एनालिटिक्स—पर काम कर रहा है। आयोग का उद्देश्य नीति निर्माण को साक्ष्य आधारित और परिणाम केंद्रित बनाना है।
बायोएनर्जी, वन पंचायत और सहकारिता नीति पर काम
अग्रवाल के अनुसार अर्थव्यवस्था एवं कौशल विकास के क्षेत्र में उत्तराखण्ड बायोएनर्जी नीति-2026, वन पंचायत नियमावली-2026 और सहकारिता नीति-2026 के प्रारूप तैयार किए जा रहे हैं। एनआईआईटी फाउंडेशन के सहयोग से विभिन्न संस्थानों में फ्यूचर स्किल्स और डिजिटल कौशल विकास तथा नैसकॉम के सहयोग से राज्य के 119 महाविद्यालयों में रोजगारपरक कौशल विकास पर भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों की बाजार तक पहुंच मजबूत करने के लिए प्रमुख संगठित खरीदारों के माध्यम से नए अवसर विकसित करने और युवाओं के लिए ओवरसीज प्लेसमेंट सेल की रूपरेखा तैयार करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है।
पांच जिलों में 17 स्मार्ट ग्राम केंद्र
अवसंरचना एवं कल्याण के क्षेत्र में आयोग द्वारा पांच जिलों में 17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्र विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय ग्रामीण विकास निधि, देहरादून में जेईई उत्कृष्टता केंद्र, कुमाऊं विश्वविद्यालय के हॉस्पिटैलिटी कौशल केंद्र में शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की व्यवस्था तथा एनीमिया, स्टंटिंग और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए लक्षित हस्तक्षेपों पर ध्यान दिया जा रहा है।
एम्स ऋषिकेश के सहयोग से ट्रॉमा केयर और टेलीमेडिसिन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
बढ़ते शहरी दबाव के बीच नए शहरी कानून की तैयारी
अग्रवाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ते जनसंख्या दबाव और तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए नगरीय स्थानीय निकायों को अधिकारों के हस्तांतरण पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने और प्रदेश के लिए नए शहरी अधिनियम का प्रारूप तैयार करने पर भी काम चल रहा है। इसका उद्देश्य नगरों में नियोजित विकास और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
योजनाओं के मूल्यांकन पर जोर
सेतु आयोग द्वारा राज्य की विभिन्न योजनाओं के व्यवस्थित मूल्यांकन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, अमृत सरोवर योजना, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का मूल्यांकन राज्य के विश्वविद्यालयों की भागीदारी से शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि ‘विकसित उत्तराखण्ड-2047’ के लिए व्यापक इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है और इसे राज्य सरकार द्वारा अंगीकृत किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
‘एक पहचान, अनेक समाधान’ पर आधारित डेटा नीति
डिजिटल और डेटा आधारित सुशासन को लेकर भी आयोग काम कर रहा है। अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य डेटा शासन नीति तैयार की जा रही है। इसका मार्गदर्शक सिद्धांत ‘एक पहचान, अनेक समाधान’ रखा गया है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को बार-बार दस्तावेजी औपचारिकताओं से राहत देना है। साथ ही डिजिटल कनेक्टिविटी में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बीच अधिक मजबूत और अनुकूल डिजिटल ढांचा विकसित करना भी इसका लक्ष्य है, ताकि तकनीकी बाधाओं का असर नागरिक सेवाओं और विकास कार्यक्रमों पर न्यूनतम हो।
गांवों में सेवाओं को प्राथमिकता देने का सुझाव
दिनेश अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने आयोग के समक्ष विशेष रूप से यह सुझाव रखा है कि पर्वतीय गांवों तक स्वास्थ्य और शिक्षा की मजबूत एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच को विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया जाए। उनके अनुसार गांवों में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर ही पलायन की समस्या का दीर्घकालिक समाधान संभव है।
उन्होंने कहा कि सेतु आयोग के कार्यों की प्रगति पर वे निकटता से नजर रखेंगे, ताकि आयोग राज्य सरकार को प्रभावी नीतिगत सहयोग प्रदान कर सके और ‘विकसित उत्तराखण्ड’ के लक्ष्य को साकार करने में अपनी भूमिका निभा सके।
प्रेस वार्ता में निदेशक नियोजन मनोज पंत, विशेषज्ञ विशाल पराशर और हनुमंत रावत भी मौजूद रहे।



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