अंकिता भंडारी केस पर सियासी घमासान, रेखा आर्या का कांग्रेस से सवाल—जेएनयू प्रकरण पर मौन क्यों?
धामी सरकार का दावा—अंकिता के परिवार की मांग पर सीबीआई जांच की सिफारिश, मंत्री बोलीं- न्याय से समझौता नहीं
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 15 Oct, 2026 09:25 PMदेहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अंकिता के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से जेएनयू प्रकरण में सामने आए आरोपों पर भी अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। वहीं, मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार अंकिता को न्याय दिलाने और उसके परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
‘अंकिता के नाम पर राजनीति नहीं, तथ्यों पर बात करे कांग्रेस’
रेखा आर्या ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना पूरे उत्तराखंड की भावनाओं और बेटियों के सम्मान से जुड़ा मामला है। ऐसे संवेदनशील प्रकरण को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि उसका उद्देश्य पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है या प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना।
मंत्री ने कहा कि न्याय की मांग ठोस तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से आरोप-प्रत्यारोप के बजाय किसी भी उपलब्ध साक्ष्य को संबंधित जांच एजेंसी और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा।
जेएनयू प्रकरण का जिक्र कर कांग्रेस नेतृत्व को घेरा
रेखा आर्या ने जेएनयू की छात्राओं द्वारा कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम पर लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से सवाल किए। उन्होंने पूछा कि महिला सम्मान और अधिकारों की बात करने वाले कांग्रेस नेताओं ने इस मामले पर क्या रुख अपनाया है।
मंत्री ने कहा कि महिला सम्मान का मुद्दा राजनीतिक सुविधा के अनुसार नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
धामी सरकार की कार्रवाई गिनाई, एसआईटी जांच से उम्रकैद तक का जिक्र
अंकिता भंडारी हत्याकांड में राज्य सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए रेखा आर्या ने कहा कि घटना सामने आने के बाद मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और महिला डीआईजी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। उन्होंने बताया कि मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई तथा अभियोजन के लिए विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया गया।
मंत्री के मुताबिक, आरोपपत्र में 100 से अधिक गवाहों के बयान और वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्य शामिल थे। उन्होंने कहा कि मुकदमे की सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। उन्होंने 19 अगस्त को उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा तीनों दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने का भी उल्लेख किया।
परिवार की मांग पर सीबीआई जांच की सिफारिश का दावा
रेखा आर्या ने कहा कि सरकार ने पीड़ित परिवार की मांगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सरकारी अधिवक्ता में तीन बार बदलाव किया और परिवार की मांग पर मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की। उन्होंने यह भी बताया कि अंकिता के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई तथा उनके पिता और भाई को रोजगार उपलब्ध कराया गया।
मंत्री ने कहा कि अंकिता की स्मृति को सम्मान देने के लिए डोभ स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नाम ‘स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज’ रखने की पहल भी की गई है।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर भी कांग्रेस से सवाल
रेखा आर्या ने दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि यह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति द्वारा की गई नियुक्ति है। उन्होंने इस नियुक्ति को अंकिता भंडारी प्रकरण से जोड़कर राजनीतिक अभियान चलाने पर कांग्रेस से सवाल किए।
मंत्री ने दोहराया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखने और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने के अपने संकल्प पर कायम है।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
#AnkitaBhandari #RekhaArya #PushkarSinghDhami #UttarakhandNews #Dehradun #Congress #Yugvarta



No Previous Comments found.