समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

सीएम धामी ने SC-ST समुदाय के प्रतिनिधियों से किया सीधा संवाद, समस्याओं के समाधान के दिए निर्देश

6 Oct, 2026 09:28 PM
समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

देहरादून, 6 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद किया। टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्रों की विकास संबंधी आवश्यकताओं, समस्याओं और अपेक्षाओं को रखा। मुख्यमंत्री ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके प्राथमिकता के आधार पर समाधान के निर्देश दिए।

समेकित और समावेशी विकास सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक वर्ग, क्षेत्र और व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब सरकार और जनता के बीच सीधा एवं निरंतर संवाद बना रहे। इसी उद्देश्य से सरकार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत कर रही है, ताकि स्थानीय समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान किया जा सके।

धामी ने कहा कि चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से SC और ST समुदाय के लोगों के साथ पहले भी संवाद हुआ है। इन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय स्तर की समस्याओं और आवश्यकताओं को सीधे सरकार तक पहुंचाने में मदद मिली है।

बाबा साहेब के सामाजिक न्याय के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, सामाजिक न्याय और समान अवसर का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार इसी भावना के अनुरूप समाज के सभी वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि विकास का लाभ किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वंचित एवं कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

दूरस्थ क्षेत्रों के विकास पर विशेष जोर

धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका प्रयास देहरादून तक सीमित रहने का नहीं रहा है। पिछले लगभग पांच वर्षों में उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर, उत्तरकाशी सहित राज्य के अनेक पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों का दौरा किया है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करने से वहां की वास्तविक परिस्थितियों और जरूरतों को समझने में मदद मिलती है। सरकार का प्रयास है कि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं को धरातल पर उतारा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों के विकास तथा कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

पंचतीर्थ और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष और संविधान निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।

उन्होंने उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की परंपराओं, लोककला, लोकगीत, हस्तशिल्प और जीवनशैली को व्यापक मंच मिल रहा है। हाल ही में चंपावत में आयोजित आदि गौरव महोत्सव का भी उन्होंने उल्लेख किया।

धामी ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार इसके संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जनजातीय समुदाय के लिए योजनाओं का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहल संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, बिजली, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्तराखंड में भी SC-ST समुदाय के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

महिलाओं और पारंपरिक शिल्पकारों को बाजार से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड के उत्पादों की देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग कर रही है। बिना ब्याज ऋण जैसी सुविधाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक शिल्पकार सांस्कृतिक विरासत के वाहक हैं। उनके हुनर को आधुनिक डिजाइन, प्रशिक्षण, बाजार और बेहतर विपणन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है। सरकार स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को ‘लोकल से ग्लोबल’ पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है।

योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, कौशल विकास और स्वरोजगार सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि होमस्टे जैसी योजनाएं पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। सरकार चाहती है कि स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक संसाधन, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान को आजीविका से जोड़कर दूरस्थ क्षेत्रों के लोग आत्मनिर्भर बनें।

धामी ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में अन्य पात्र लोगों को भी सरकारी योजनाओं की जानकारी दें, ताकि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

लोगों ने रखीं सड़क, शिक्षा, रोजगार और पेयजल से जुड़ी समस्याएं

संवाद के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए SC और ST समुदाय के प्रतिनिधियों ने सड़क, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, आजीविका, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।

मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति विकास की दौड़ में पीछे न रहे और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी समान अवसर उपलब्ध हों। सरकार, समाज और जनता की सामूहिक भागीदारी से ही उत्तराखंड को सशक्त, समावेशी और विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप सहित अन्य अधिकारी और राज्य के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

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