ऋषिकेश के सुनियोजित विकास पर धामी सरकार का फोकस, महायोजना को अंतिम रूप देने की कवायद तेज
आवास, पर्यटन, यातायात और पार्किंग व्यवस्था को मिलेगी नियोजित दिशा, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 30 Aug, 2026 05:20 PMदेहरादून, 30 अगस्त 2026। धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश के सुनियोजित और सर्वांगीण विकास को लेकर धामी सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ऋषिकेश महायोजना को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। महायोजना से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण और विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर निर्णय के लिए आवास विभाग ने संबंधित विकास प्राधिकरणों के साथ समीक्षा की।
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल के संबंधित विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें भवनों की ऊंचाई, सड़क की चौड़ाई, यातायात व्यवस्था, आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों, पार्किंग तथा क्षेत्र की नियोजन आवश्यकताओं सहित महायोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
तीन जिलों से जुड़े क्षेत्र के लिए समन्वित योजना
ऋषिकेश महायोजना का क्षेत्र देहरादून, टिहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल जिलों से जुड़ा है। इसी को देखते हुए तीनों जिलों के संबंधित विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए थे। शासन स्तर पर पहले हुई बैठक में प्राधिकरणों को अपने-अपने बोर्ड से अनुमोदित प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
निर्देशों के अनुपालन में टिहरी और पौड़ी के विकास प्राधिकरणों ने अपने प्रस्ताव शासन को उपलब्ध करा दिए हैं। समीक्षा बैठक में इन प्रस्तावों के साथ संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियों का परीक्षण किया गया। क्षेत्र की आवश्यकताओं और सड़क की चौड़ाई के अनुरूप भवनों की ऊंचाई निर्धारित करने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
भवन ऊंचाई में क्षेत्रीय परिस्थितियों का रखा जाएगा ध्यान
टिहरी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग की मौजूदगी और विकासात्मक आवश्यकताओं को देखते हुए भवन ऊंचाई को मैदानी क्षेत्रों के मानकों के अनुरूप रखने का अनुरोध किया गया है। वहीं, पौड़ी जनपद का क्षेत्र राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटा होने के कारण यहां पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भवनों की ऊंचाई सीमित रखने के सुझाव को उपयुक्त माना गया।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को महायोजना से जुड़े सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश जैसे धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर के लिए महायोजना केवल भूमि उपयोग से जुड़ा दस्तावेज नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों के शहरी और आर्थिक विकास की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि ऋषिकेश देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ शहर की आबादी, यातायात दबाव और व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो रही है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी विकास योजना जरूरी है, जो शहर के विस्तार को व्यवस्थित दिशा देने के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी बनाए रखे।
पार्किंग और यातायात व्यवस्था को मिलेगी नियोजित दिशा
महायोजना में आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ पर्यटन गतिविधियों, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, सड़क नेटवर्क और आधारभूत ढांचे के विकास को भी समग्र रूप से शामिल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य बढ़ते पर्यटन और शहरीकरण के बीच स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है।
राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से लगे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
आवास विभाग के अनुसार, महायोजना तैयार करते समय स्थानीय जरूरतों के साथ क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विशेष रूप से राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से लगे क्षेत्रों में निर्माण एवं विकास गतिविधियों के नियोजन में पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
महायोजना में देरी पर सख्त रुख
सचिव आवास ने संबंधित विभागों और विकास प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने तकनीकी अथवा विभागीय स्तर पर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऋषिकेश महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
धार्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक सुविधाओं पर जोर
धामी सरकार ऋषिकेश को धार्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक, सुविधायुक्त और सुव्यवस्थित पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। महायोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में भविष्य के आवासीय, व्यावसायिक, पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास को स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि ऋषिकेश का विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले, लेकिन पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय नागरिकों की जरूरतों से समझौता न हो। इसी संतुलित दृष्टिकोण के साथ महायोजना को जल्द अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता



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