कांग्रेस के महंगे बिजली करार के मुकाबले धामी सरकार ने सस्ती बिजली का इंतजाम किया: महेंद्र भट्ट
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य पर साधा निशाना, बोले—कांग्रेस के समय 11.26 रुपये प्रति यूनिट का करार, धामी सरकार ने 5.74 रुपये में किया थर्मल पावर का समझौता
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 26 Aug, 2026 09:21 PMदेहरादून, 26 अगस्त। अडाणी पावर के साथ 1320 मेगावाट थर्मल पावर की खरीद के करार को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए महंगे गैस पावर करार की याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में हुए समझौते के चलते राज्य को आज भी 11.26 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली का भुगतान करना पड़ रहा है।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार के दौरान काशीपुर के गैस पावर प्लांटों के लिए किए गए करार के कारण राज्य पर महंगी बिजली का बोझ पड़ा। उनके मुताबिक, गैस की कीमत बढ़ने पर इन संयंत्रों को चलाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन उत्पादन न होने की स्थिति में भी फिक्स चार्ज के रूप में हर महीने करोड़ों रुपये का भुगतान करना पड़ता है।
उन्होंने दावा किया कि इसके विपरीत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अगले 25 वर्षों के लिए 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से थर्मल पावर का करार किया है। भट्ट के अनुसार, ट्रांसमिशन चार्ज जोड़ने के बाद भी इसकी लागत छह रुपये प्रति यूनिट से अधिक नहीं होगी। उन्होंने इसे राज्य की भविष्य की बिजली जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
‘अडाणी पावर को मुफ्त में नहीं मिला कोल ब्लॉक’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष के उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कोल ब्लॉक को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अडाणी पावर को कोई कोल ब्लॉक मुफ्त में नहीं दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड को आवंटित कोल ब्लॉक का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा और इसके लिए केंद्र को भुगतान किया जाएगा।
भट्ट ने कहा कि यदि थर्मल पावर प्लांट उत्तराखंड में स्थापित किया जाता तो छत्तीसगढ़ से कोयला लाने में परिवहन लागत बढ़ती। ऐसे में सरकार ने बिजली की लागत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होंने इसे राज्य के हित में लिया गया स्मार्ट फैसला बताया।
‘थर्मल पावर बिजली का भरोसेमंद स्रोत’
भट्ट ने कहा कि मानसून और आपदा के दौरान सौर एवं जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वहीं युद्ध जैसी परिस्थितियों में विदेशों से गैस की आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतें बढ़ने से गैस आधारित बिजली संयंत्रों के संचालन में भी कठिनाई आती है। ऐसे में थर्मल पावर को बिजली के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में देखा जाता है।
उन्होंने कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश में बिजली कटौती का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि उस समय कई क्षेत्रों में 10 घंटे से अधिक की बिजली कटौती होती थी, जबकि वर्तमान में राज्य में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को भी सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
‘ऊर्जा प्रदेश बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा उत्तराखंड’
महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस शासन में उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ। इसके विपरीत धामी सरकार ने वर्षों से लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में सोलर पावर उत्पादन एक हजार मेगावाट से अधिक हो चुका है। इसके अलावा वर्षों से लंबित लघु जल विद्युत परियोजनाओं का पारदर्शी तरीके से आवंटन कर उन्हें धरातल पर उतारने का काम किया गया है।
भट्ट ने कहा कि 300 मेगावाट की लखवाड़ और 660 मेगावाट की किसाऊ परियोजना के साथ त्यूणी-प्लासू तथा सरकारी भ्योल-रसियाबगड़ जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के साथ स्मॉल हाइड्रो, सोलर पावर, जियोथर्मल और पंप स्टोरेज पावर प्लांट के माध्यम से आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश के अग्रणी ऊर्जा राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ता उत्पादन भविष्य में राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों में भी योगदान देगा। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार तथा परियोजना क्षेत्रों में स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने यह जानकारी दी।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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