उत्तराखंड में दो माह तक चलेगा ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’, जल संरक्षण और कृषि विकास को मिलेगा बढ़ावा

जलागम मंत्री राम सिंह कैड़ा ने दी जानकारी, प्रदेशभर में जनजागरूकता, बीज वितरण और ग्रामीण गोष्ठियों के माध्यम से योजनाओं का होगा प्रचार1प्रसार

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Lucknow, 5 Nov, 2026 06:24 PM
उत्तराखंड में दो माह तक चलेगा ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’, जल संरक्षण और कृषि विकास को मिलेगा बढ़ावा

देहरादून। उत्तराखंड में जल संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्यभर में दो माह तक ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’ संचालित किया जाएगा। जलागम विभाग की ओर से आयोजित इस अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को जल एवं कृषि संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। जलागम मंत्री राम सिंह कैड़ा ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहभागिता को मजबूत करना है।

बीज वितरण से लेकर जनजागरूकता कार्यक्रमों तक होंगी विभिन्न गतिविधियां

जलागम मंत्री ने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निर्बल वर्ग के लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने, बीज वितरण, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ संवाद और गोष्ठियों सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के जरिए किसानों को कृषि की आधुनिक एवं जलवायु अनुकूल तकनीकों के प्रति जागरूक करने के साथ ही जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जाएगा।

चार प्रमुख योजनाओं और परियोजनाओं पर रहेगा विशेष फोकस

‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’ के अंतर्गत जलागम विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इनमें उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना, ग्रीन एजी (GEF-6) परियोजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-जलागम घटक 2.0 तथा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARRA) की गतिविधियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इन परियोजनाओं के माध्यम से वर्षा आधारित कृषि को प्रोत्साहन, जल संसाधनों का संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों एवं नदियों का पुनर्जीवन तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने से संबंधित प्रयासों को गति दी जाएगी।

यक्षवती नदी क्षेत्र में नदी उत्सव, पीली पड़ाव में किसानों को दी जानकारी

प्रदेश में अभियान का शुभारंभ पिथौरागढ़ और हरिद्वार से किया जा चुका है। पिथौरागढ़ के यक्षवती नदी क्षेत्र में आयोजित नदी उत्सव के दौरान जनजागरूकता गतिविधियों, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय लोगों को नदियों एवं जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

वहीं, हरिद्वार की पीली पड़ाव ग्राम पंचायत में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों और किसानों को उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के तहत संचालित गतिविधियों की जानकारी दी गई। इसमें धान की सीधी बुवाई (डीएसआर), गोबर गैस संयंत्र और अन्य कृषि एवं पर्यावरण अनुकूल उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया।

ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

जलागम विभाग का यह दो माह का अभियान प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, कृषि विकास और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने, पात्र लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने और किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

अभियान की सफलता में ग्रामीणों, किसानों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।


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