यूआईआईडीबी की जमीनों पर सरकार का मालिकाना हक रहेगा बरकरार, निजीकरण और बिक्री के आरोप निराधार: सुबोध उनियाल
कांग्रेस पर विकास और निवेश के माहौल को खराब करने का आरोप, आतिथ्य क्षेत्र में 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये के निवेश और 15 हजार से अधिक रोजगार के अवसरों का दावा
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 4 Nov, 2026 07:28 PMदेहरादून, 4 नवंबर। उत्तराखंड में यूआईआईडीबी (उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड) के माध्यम से निवेश के लिए चिह्नित सरकारी जमीनों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे जमीनों के निजीकरण और बिक्री के आरोपों पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने पलटवार करते हुए इन्हें भ्रामक और निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवेश के लिए दी जाने वाली जमीनों का मालिकाना हक पूरी तरह राज्य सरकार के पास ही रहेगा। निजी निवेशकों को केवल स्वीकृत परियोजनाओं के विकास और संचालन का सीमित अधिकार दिया जाएगा।
सुबोध उनियाल ने कहा कि भूमि का स्वामित्व, नियामक नियंत्रण और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद परिसंपत्तियों को वापस राज्य को हस्तांतरित करने के अधिकार सरकार के पास सुरक्षित रहेंगे। निवेशकों को दिए जाने वाले अधिकार भी कड़ी शर्तों, चरणबद्ध विकास, निवेश प्रतिबद्धताओं और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के अधीन होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक हितों के लिए निवेश और विकास के अनुकूल माहौल को खराब करने तथा जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
आतिथ्य क्षेत्र में 2,000 करोड़ तक निवेश की संभावना
कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि सरकार की इस पहल से प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उनके अनुसार, केवल आतिथ्य सत्कार क्षेत्र में ही 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त राज्य को 200 से 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय खरीद, कर राजस्व और पर्यटन गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।
परिसंपत्ति मुद्रीकरण को बताया केंद्र सरकार की स्थापित नीति
सुबोध उनियाल ने कहा कि यूआईआईडीबी के माध्यम से की जा रही प्रक्रिया परिसंपत्ति मुद्रीकरण की राष्ट्रव्यापी नीति के अनुरूप है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA) का उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थाएं भी सार्वजनिक परिसंपत्तियों की क्षमता का उपयोग निवेश और विकास के लिए करती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसंपत्ति मुद्रीकरण को निजीकरण या सरकारी संपत्तियों की बिक्री के रूप में देखना गलत है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों का स्वामित्व सुरक्षित रखते हुए उनका बेहतर उपयोग करना और राज्य के लिए दीर्घकालिक आर्थिक अवसर तैयार करना है।
एचएमटी, आईडीपीएल और सरकारी परिसंपत्तियों को लेकर कांग्रेस पर पलटवार
कांग्रेस के उन आरोपों पर भी सुबोध उनियाल ने प्रतिक्रिया दी, जिनमें एचएमटी, आईडीपीएल, लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृहों और उद्यान विभाग के बगीचों को बेचे जाने की बात कही जा रही है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि ये सभी परिसंपत्तियां आज भी अपने मूल विभागों के पास सुरक्षित हैं।
उन्होंने बताया कि आतिथ्य सत्कार और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए चिह्नित भूमि के भूखंड अभी मास्टर प्लानिंग और प्री-फिजिबिलिटी के शुरुआती चरण में हैं। ऐसे में जमीनों की बिक्री या निजीकरण का प्रचार करना जनता को गुमराह करने जैसा है।
कांग्रेस की भूमि बचाओ मुहिम पर उठाए सवाल
सुबोध उनियाल ने कांग्रेस के ‘भूमि बचाओ अभियान’ पर निशाना साधते हुए कहा कि यह भूमि संरक्षण की मुहिम नहीं, बल्कि राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश है। उन्होंने कांग्रेस के पूर्ववर्ती शासनकाल में हुए भूमि आवंटनों का उल्लेख करते हुए नानीसार प्रकरण, धौलास भूमि विवाद, सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं को भूमि आवंटन, टाटा मोटर्स-सिडकुल भूमि आवंटन और एनएच-74 प्रकरण जैसे मामलों पर सवाल उठाए।
उन्होंने वर्ष 2015 में विकासनगर, कालसी और बाजपुर में नदी तटबंध की जमीन तथा खनन कारोबार से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। इसके साथ ही सिडकुल में कथित 500 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं का हवाला देते हुए कांग्रेस से अपने शासनकाल का जवाब देने की मांग की।
13 हजार एकड़ सरकारी भूमि कब्जामुक्त कराने का दावा
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की नीति सरकारी जमीन बेचने की नहीं, बल्कि सरकारी स्वामित्व सुरक्षित रखते हुए उसका सदुपयोग करने की है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लगभग 13,000 एकड़ सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। इसके साथ ही डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और व्यवस्थित भूमि प्रबंधन की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पलायन और सीमित रोजगार अवसरों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में बंद औद्योगिक इकाइयों, खाली परिसरों और अनुपयोगी सरकारी जमीनों का विकास कार्यों में इस्तेमाल जरूरी है। पर्यटन और औद्योगिक परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के साथ टैक्सी संचालकों, होटल व्यवसायियों, दुकानदारों, किसानों, ठेकेदारों और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को भी रोजगार एवं कारोबार के अवसर मिलेंगे।
अंत में सुबोध उनियाल ने प्रदेश की जनता से कांग्रेस के कथित भ्रामक प्रचार के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा, निवेश को प्रोत्साहन और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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