क्षेत्र पंचायत निधि होगी फिर से शुरू, ब्लॉक प्रमुखों के मानदेय-भत्तों में भी होगी वृद्धि : मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखण्ड प्रमुख संगठन सम्मेलन-2026 में मुख्यमंत्री की चार महत्वपूर्ण घोषणाएं, पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और ग्रामीण विकास को गति देने पर जोर
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 1 Nov, 2026 05:37 PMदेहरादून, 1 नवंबर। उत्तराखण्ड में क्षेत्र पंचायतों को सशक्त बनाने और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को और प्रभावी करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखण्ड प्रमुख संगठन सम्मेलन-2026 में मुख्यमंत्री ने क्षेत्र पंचायत निधि को पुनः प्रारंभ करने और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि के लिए कार्यवाही करने की घोषणा की। इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विकासखंड स्तरीय समिति में क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को शामिल करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों को नगरीय क्षेत्रों में शामिल करने की प्रक्रिया में संबंधित ग्राम पंचायतों से विचार-विमर्श करने की बात कही।
सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ब्लॉक प्रमुखों एवं पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने में ब्लॉक प्रमुखों और पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे सरकार और जनता के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करते हैं और स्थानीय समस्याओं एवं आवश्यकताओं की उन्हें बेहतर समझ होती है।
पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका होगी और प्रभावी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में क्षेत्र पंचायतों की अहम भूमिका है। पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याएं, सुझाव और मांगें सरकार के संज्ञान में हैं। संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर इनके समाधान के लिए सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार अंत्योदय की भावना के साथ काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है।
स्थानीय निकायों के लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार राज्य के कर राजस्व में स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पंचायत भवनों से वंचित ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से भवन निर्माण कराने का भी प्रयास किया जा रहा है। पंचायतों को संसाधन संपन्न बनाने के साथ ही डिजिटल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य गांवों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाए बिना हासिल नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार करने के साथ ही रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है। प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दिशा में और बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता के बीच पहुंचे हैं। अभियान के जरिए हजारों लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है और अनेक जनसमस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान किया गया है।
35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियों और नीतिगत निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और नकल विरोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया गया है तथा स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए सख्त भू-कानून लागू किया गया है।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। राज्य सरकार महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी अभियान के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ किसानों, वरिष्ठ नागरिकों, सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए भी विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय आजीविका को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य किए जा रहे हैं। केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख मंदिरों के विकास के साथ गोल्ज्यू कॉरिडोर, यमुना कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करने के साथ स्थानीय लोगों को वर्षभर रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर गांवों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है।
विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों को मिलने वाली धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ किया जाना चाहिए। विकास कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे हों और उनकी गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से सेवा, सुशासन और विकास की भावना के साथ काम करने तथा प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग और सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य मजबूत होगा।
सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख संगठन उत्तराखण्ड राजीव कण्डारी, महासचिव गणेश चन्दोला, ज्योति ग्रोवर, संरक्षक हरीश बिष्ट सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए ब्लॉक प्रमुख एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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