उत्तराखण्ड के छह बच्चों को मिला पहला मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार, अमित शाह और सीएम धामी ने किया सम्मानित

भालू के हमले से साथी को बचाने से लेकर बाढ़ और आपदा में लोगों की जान बचाने तक, छह बच्चों ने दिखाया अदम्य साहस; प्रत्येक को 51 हजार रुपये की सम्मान राशि

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Lucknow, 6 Nov, 2026 03:19 PM
उत्तराखण्ड के छह बच्चों को मिला पहला मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार, अमित शाह और सीएम धामी ने किया सम्मानित

देहरादून, 06 नवंबर। उत्तराखण्ड में अदम्य साहस, वीरता और सूझबूझ का परिचय देने वाले छह बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया। शुक्रवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित उत्तराखण्ड राज्योत्सव समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन बच्चों को पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को 51 हजार रुपये की धनराशि भी डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली बार शुरू किए गए इस पुरस्कार के लिए प्रदेशभर से प्राप्त आवेदनों में छह बच्चों का चयन किया गया। इनमें चमोली जिले के तीन तथा चम्पावत, देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के एक-एक बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों ने अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की सुरक्षा और जीवन बचाने के लिए असाधारण साहस का परिचय दिया।

भालू के हमले के दौरान तीन बच्चों ने दिखाई बहादुरी

चमोली जिले के दिव्या, दीपिका और आरव सिंह को विद्यालय परिसर में भालू के हमले के दौरान साहस और सूझबूझ दिखाने के लिए सम्मानित किया गया।

घटना 22 दिसंबर 2025 की है। सुबह करीब 9:30 बजे जीआईसी यूपीएस हरिशंकर, चमोली के विद्यालय परिसर में एक भालू घुस आया और उसने कक्षा छह के छात्र आरव सिंह पर हमला कर दिया। इस दौरान आरव ने खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया। वहीं, कक्षा आठ की छात्रा दिव्या ने साहस दिखाते हुए भालू का पीछा किया और आरव को बचाने का प्रयास किया। दिव्या ने आरव को सुरक्षित विद्यालय तक पहुंचाने में भी मदद की।

इसी दौरान दीपिका ने असाधारण सूझबूझ का परिचय देते हुए नौ अन्य विद्यार्थियों को तत्काल कक्षा सात के कमरे में पहुंचाया और उन्हें सुरक्षित किया। इस प्रकार तीनों बच्चों ने संकट की घड़ी में साहस, तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया।

तेज बहाव में फंसी बालिका को बचाने के लिए माया सम्मानित

चम्पावत जिले की कु. माया को नदी के तेज बहाव में फंसी एक बालिका का जीवन बचाने के लिए मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार प्रदान किया गया।

5 अगस्त 2025 को भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। इस दौरान एक बालिका तेज धारा में बहने लगी। माया ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने का प्रयास किया और तेज बहाव से सुरक्षित बाहर निकाला। इस साहसिक प्रयास में माया स्वयं भी घायल हो गईं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बालिका का जीवन बचाने में सफलता हासिल की।

बादल फटने की घटना में आराध्या ने बचाई 17 लोगों की जान

देहरादून जिले की कु. आराध्या को 2 जून 2026 को भारी बारिश और अचानक मलबा-पानी आने की स्थिति में असाधारण सतर्कता एवं साहस दिखाने के लिए सम्मानित किया गया।

शाम के समय अचानक उत्पन्न हुई आपदा की स्थिति को भांपते हुए आराध्या ने अपने घर में मौजूद सभी 17 लोगों को तत्काल सतर्क किया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में मदद की। इतना ही नहीं, उन्होंने तीन वर्षीय एक बच्ची को पानी के तेज बहाव से भी बचाया। उनकी त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

श्वेता ने सड़क दुर्घटना से बचाई बुजुर्ग की जान

टिहरी गढ़वाल जिले की कु. श्वेता को एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया। घटना 30 जनवरी 2025 की है। एक बुजुर्ग व्यक्ति सड़क पर लाठी के सहारे चल रहे थे। इसी दौरान सामने से एक वाहन तेज गति से आ रहा था। खतरे को भांपते हुए श्वेता ने तत्काल बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क के किनारे सुरक्षित पहुंचाया। उनकी तत्परता से बुजुर्ग व्यक्ति संभावित दुर्घटना का शिकार होने से बच गए।

बच्चों के साहस को पहचान देने की पहल

मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार की शुरुआत का उद्देश्य कठिन और विषम परिस्थितियों में असाधारण साहस, वीरता, संवेदनशीलता और सूझबूझ का परिचय देने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करना है। इस पहल के माध्यम से ऐसे बच्चों के प्रेरणादायक कार्यों को सार्वजनिक पहचान देने के साथ ही प्रदेश के अन्य बच्चों को भी संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और साहस के साथ आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

उत्तराखण्ड राज्योत्सव के अवसर पर छह बच्चों को प्रदान किया गया यह सम्मान न केवल उनके साहसिक कार्यों की पहचान है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि उम्र छोटी होने के बावजूद हिम्मत, समझदारी और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता से बड़े से बड़ा कार्य किया जा सकता है।


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