उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल से प्रभावित हुए हिमाचल के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, दोनों राज्यों में सहयोग बढ़ाने पर जोर

देहरादून में यूएसडीएमए की कार्यप्रणाली का किया अवलोकन, चारधाम यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग, क्विक रिस्पांस टीमों और भूदेव ऐप की सराहना

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Lucknow, 9 Oct, 2026 07:29 PM
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल से प्रभावित हुए हिमाचल के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, दोनों राज्यों में सहयोग बढ़ाने पर जोर

देहरादून, 9 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण कर राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं और तकनीकी नवाचारों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आपसी सहयोग एवं समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया।

भ्रमण के दौरान दीपक राठौर ने विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संचालित राहत एवं बचाव कार्यों, उत्तराखंड की इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) व्यवस्था, मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की कार्यप्रणाली को समझा। उन्होंने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) यानी हिमनदीय झील के फटने से आने वाली बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए उत्तराखंड में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी ली।

पर्वतीय राज्यों के बीच समन्वय जरूरी

दीपक राठौर ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से समान परिस्थितियों वाले पर्वतीय राज्य हैं। दोनों प्रदेशों को भूस्खलन, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में साझा रणनीति और बेहतर तालमेल से राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से भूस्खलन प्रबंधन, पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा जोखिम कम करने और ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न संभावित खतरों से निपटने के लिए दोनों राज्यों के बीच तकनीकी जानकारी, अनुभव और संसाधनों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया।

चारधाम यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग व्यवस्था का किया अवलोकन

भ्रमण के दौरान दीपक राठौर ने यूएसडीएमए की चारधाम यात्रा निगरानी एवं प्रबंधन प्रणाली का विस्तार से अवलोकन किया। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के माध्यम से केदारनाथ यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग, रियल टाइम अलर्ट सिस्टम, भीड़ प्रबंधन तथा मौसम और मार्गों की लगातार निगरानी की व्यवस्था को समझा।

उन्होंने यह भी जाना कि यात्रा के दौरान विभिन्न संबंधित एजेंसियों के बीच किस प्रकार त्वरित समन्वय स्थापित किया जाता है, ताकि संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

तहसील स्तर की क्विक रिस्पांस टीमों की सराहना

हिमाचल प्रदेश के एचपीएसडीएमए उपाध्यक्ष ने उत्तराखंड में तहसील स्तर पर गठित क्विक रिस्पांस टीमों (क्यूआरटी) की विशेष सराहना की। उन्होंने इन टीमों की संरचना, कार्यप्रणाली और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता के बारे में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने इसे स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की महत्वपूर्ण पहल बताया। इस व्यवस्था के माध्यम से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शुरुआती प्रतिक्रिया और राहत कार्यों को गति देने में मदद मिल सकती है।

एसईओसी, एसओपी और भूदेव ऐप की जानकारी ली

दीपक राठौर ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें विभिन्न स्रोतों और एजेंसियों से प्राप्त होने वाले अलर्ट, सूचनाओं के विश्लेषण तथा उन्हें समयबद्ध तरीके से आमजन तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया।

उन्होंने यूएसडीएमए द्वारा तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और भूदेव मोबाइल ऐप की भी सराहना की। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से आपदा संबंधी सूचनाओं के प्रसार, विभागीय समन्वय और जनसुरक्षा को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

तकनीकी नवाचारों से मजबूत हो रही आपदा प्रबंधन व्यवस्था

इस अवसर पर उत्तराखंड के सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने प्राधिकरण के विभिन्न कार्यों, नवाचारों और संस्थागत व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में विभिन्न आपदाओं के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ तकनीकी संसाधनों और बेहतर समन्वय के माध्यम से आपदा प्रबंधन प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने दोनों राज्यों के बीच अनुभव साझा करने और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, यूपीआरआईपीएआर के एपीडी एसके बिरला, डॉ. पीडी माथुर तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

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