सीएम धामी ने किया राज्य आंदोलनकारी रणजीत सिंह वर्मा पर आधारित पुस्तक का विमोचन, बोले\- उनका संघर्ष नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 5 Nov, 2026 06:27 PMदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून के आईआरडीटी सभागार, सर्वे चौक में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पृथक उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण में उनके योगदान और संघर्ष को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक जननायक की जीवनगाथा नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के संघर्ष, त्याग, समर्पण और संकल्प का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने पुस्तक के माध्यम से स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा के जीवन और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास के लिए वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी एवं अजय वर्मा की सराहना की।
राज्य आंदोलन में रणजीत सिंह वर्मा की रही अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण दशकों के संघर्ष और असंख्य आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान का परिणाम है। पृथक राज्य की स्थापना प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं और जनभावनाओं की ऐतिहासिक जीत थी। स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा ने पृथक उत्तराखण्ड की मांग को बुलंद करने, लोगों को एकजुट करने और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया कि स्वर्गीय वर्मा ने उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में विभिन्न संगठनों और आंदोलनकारियों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया। वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी उन्होंने देहरादून में राज्य आंदोलन को सक्रिय बनाए रखा। बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे आंदोलनों का नेतृत्व कर उन्होंने पृथक राज्य की मांग को मजबूती प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने उनके संघर्ष को याद करते हुए बताया कि स्वर्गीय वर्मा ने डोईवाला के प्रेमनगर बाजार स्थित अपनी ससुराल को भी आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया था। यहां उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों के ठहरने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाएं आंदोलन के पीड़ादायक अध्याय
मुख्यमंत्री ने खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास के अत्यंत पीड़ादायक अध्याय हैं। आंदोलनकारियों ने तमाम कठिनाइयों, दमन और यातनाओं के बावजूद पृथक राज्य की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखा। उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप 9 नवंबर 2000 को उत्तराखण्ड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
दो बार विधायक रहे, राज्य निर्माण के संकल्प को दी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे। इसके बावजूद उन्होंने राज्य निर्माण के अपने संकल्प को सर्वोपरि रखा। राज्य गठन के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और सामाजिक कार्यों के माध्यम से जनसेवा में सक्रिय रहे। उनका जीवन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता, निःस्वार्थ सेवा और सार्वजनिक जीवन में समर्पण की प्रेरणा देता है।
आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाना सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के योगदान और उनके संघर्ष की गाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। साथ ही उनके सपनों के अनुरूप विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का संकल्प ऐसा उत्तराखण्ड बनाना है, जहां युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को नमन करते हुए आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले जननायकों का त्याग और उनका संकल्प हमेशा प्रदेशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी, अजय वर्मा सहित राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


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