माउंट किलिमंजारो फतह करने वाले नन्हे पर्वतारोहियों से मिले सीएम धामी, बोले- साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल हैं रियांश-प्रिशा

9 वर्षीय रियांश पंत और 10 वर्षीय प्रिशा रावत ने 22 अगस्त को 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो चोटी पर फहराया था तिरंगा

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Lucknow, 8 Sep, 2026 03:19 PM
माउंट किलिमंजारो फतह करने वाले नन्हे पर्वतारोहियों से मिले सीएम धामी, बोले- साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल हैं रियांश-प्रिशा

देहरादून। उत्तराखंड के दो नन्हे पर्वतारोहियों ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण करने वाले 9 वर्षीय मास्टर रियांश पंत और 10 वर्षीय प्रिशा रावत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट की।

मुख्यमंत्री धामी ने दोनों बाल पर्वतारोहियों को उनकी उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने दोनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटी का सफल आरोहण करना उनके साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रियांश और प्रिशा ने अपनी उपलब्धि से न केवल अपने परिवार और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है, बल्कि प्रदेश के अन्य बच्चों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश दिया है। उनकी सफलता युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देगी।

22 अगस्त को फहराया तिरंगा

अल्मोड़ा के चीनाखान निवासी 9 वर्षीय रियांश पंत और नैनीताल जिले के बैलपड़ाव निवासी 10 वर्षीय प्रिशा रावत ने 22 अगस्त 2026 को 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो चोटी का सफल आरोहण किया था। दोनों ने चोटी पर तिरंगा फहराकर उत्तराखंड और देश का गौरव बढ़ाया।

युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ा रही सरकार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के युवा पर्वतारोहण, खेल और अन्य साहसिक गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रतिभाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप मंच और आवश्यक सुविधाएं मिलें, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

रियांश और प्रिशा की यह उपलब्धि उत्तराखंड की पर्वतारोहण परंपरा और यहां के बच्चों में मौजूद साहसिक जज्बे की एक और मिसाल के रूप में सामने आई है।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

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