हल्द्वानी घटना पर राहुल गांधी के आरोपों पर अजय टम्टा का पलटवार, बोले- बिना प्रमाण भाजपा को कटघरे में खड़ा करना राजनीतिक हताशा

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा- दलित सम्मान के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश कर रही कांग्रेस, स्थानीय घटना को भाजपा से जोड़ना राजनीतिक जल्दबाजी

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Lucknow, 30 Aug, 2026 10:03 AM
हल्द्वानी घटना पर राहुल गांधी के आरोपों पर अजय टम्टा का पलटवार, बोले- बिना प्रमाण भाजपा को कटघरे में खड़ा करना राजनीतिक हताशा

देहरादून। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने हल्द्वानी की कथित शुद्धीकरण घटना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से भाजपा पर लगाए गए आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसी स्वतंत्र सामाजिक संस्था के कार्यक्रम को बिना ठोस प्रमाण भाजपा से जोड़ना राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कांग्रेस से आरोपों के समर्थन में प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की।

अजय टम्टा ने कहा कि यदि कांग्रेस के पास कार्यक्रम और भाजपा के बीच किसी आधिकारिक संबंध का प्रमाण है तो उसे जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि कार्यक्रम का आयोजक कौन था, उसका भाजपा से क्या आधिकारिक संबंध था और किस आधार पर पूरे भाजपा संगठन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक बयान देने से कोई आरोप तथ्य नहीं बन जाता।

कार्यक्रम के आयोजन और राजनीतिक प्रतिक्रिया को अलग विषय बताया

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि हल्द्वानी में हुआ शुद्धीकरण कार्यक्रम श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से आयोजित किए जाने की बात सामने आई है और संस्था ने भाजपा से किसी आधिकारिक संबंध से इनकार किया है। ऐसे में कार्यक्रम को भाजपा की विचारधारा या संगठन से जोड़ना तथ्यों की अनदेखी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा किसी घटना पर प्रतिक्रिया देना कार्यक्रम के आयोजन में भाजपा की भूमिका का प्रमाण नहीं हो सकता। उनके मुताबिक राजनीतिक प्रतिक्रिया और किसी कार्यक्रम का आयोजन दो अलग-अलग विषय हैं।

गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्य जरूरी: टम्टा

अजय टम्टा ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा इस घटना को अपराध, दलित विरोधी मानसिकता और भाजपा की कथित विचारधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्य और प्रमाण आवश्यक हैं। किसी घटना की जिम्मेदारी केवल राजनीतिक भाषण के आधार पर तय नहीं की जा सकती।

उन्होंने SC-ST Act का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून का नाम लेने और उसके तहत अपराध सिद्ध होने के बीच स्पष्ट अंतर है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध बनने का ठोस कानूनी आधार क्या है।

खड़गे की रैली से जुड़े दावों पर भी कांग्रेस से मांगा जवाब

टम्टा ने कहा कि कांग्रेस की ओर से घटना को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की दलित पहचान से जोड़ना भी गंभीर आरोप है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पास इसके समर्थन में प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आयोजक संस्था ने ऐसी मंशा से इनकार किया है और कार्यक्रम के पीछे खड़गे की रैली में लगाए गए कथित आपत्तिजनक नारों तथा कथित हिंदू विरोधी तत्वों की मौजूदगी के विरोध को कारण बताया है। उन्होंने कांग्रेस से इन दावों पर भी अपना स्पष्ट पक्ष रखने को कहा।

‘दलित सम्मान किसी दल की बपौती नहीं’

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि दलित सम्मान किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। टम्टा ने कहा कि हर विवाद को ‘दलित बनाम भाजपा’ के रूप में प्रस्तुत करना सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि समाज को राजनीतिक आधार पर बांटने का प्रयास है।

उन्होंने रुद्रपुर में समाज विशेष द्वारा कथित धमकी के मामले में कांग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में भय और धमकी की राजनीति के खिलाफ है तो उसे ऐसे मामलों में समान रूप से स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी को विवाद में घसीटना राजनीतिक अतिशयोक्ति: टम्टा

अजय टम्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस स्थानीय विवाद में घसीटना राजनीतिक अतिशयोक्ति है। उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम को भाजपा का आधिकारिक कार्यक्रम तक साबित नहीं किया जा रहा है, उसे प्रधानमंत्री से जोड़ना केवल राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता जातीय और राजनीतिक ध्रुवीकरण से ऊपर उठकर विकास, शांति और सामाजिक सौहार्द की राजनीति चाहती है।

आंबेडकर को लेकर कांग्रेस के इतिहास पर भी उठाए सवाल

टम्टा ने कांग्रेस पर डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को अपने इतिहास पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने वर्ष 1952 से 1954 के चुनावों में डॉ. आंबेडकर के साथ कांग्रेस के राजनीतिक व्यवहार और वर्ष 1990 में उन्हें भारत रत्न दिए जाने का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से सवाल किए।

उन्होंने कहा कि आज भाजपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि डॉ. आंबेडकर को भारत रत्न दिए जाने में इतनी देरी क्यों हुई।

‘जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर भेदभाव के लिए स्थान नहीं’

अजय टम्टा ने कहा कि भाजपा का रुख स्पष्ट है कि जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि दलित सम्मान भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सभी वर्गों के सम्मान के संकल्प का हिस्सा है।

उन्होंने राहुल गांधी से आरोप लगाने से पहले उनके समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग करते हुए कहा कि उत्तराखंड को जातीय और राजनीतिक ध्रुवीकरण नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, विकास और सभी वर्गों के सम्मान की राजनीति चाहिए।


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