UP News: जापानी प्रतिनिधिमंडल ने सारनाथ पहुंच बौद्ध विरासत को करीब से देखा

यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त बौद्ध विरासत से रूबरू हुआ जापानी प्रतिनिधिमंडल *विदेशी मेहमानों ने भगवान बुद्ध के पदचिन्हों का किया अनुसरण, दर्शन से हुए अभिभूत *सारनाथ ने उत्तर प्रदेश और जापान के साझा बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंधों को किया और मजबूत- जयवीर सिंह

YUGVARTA NEWS

YUGVARTA NEWS

Lucknow, 22 Aug, 2026 09:34 PM
UP News: जापानी प्रतिनिधिमंडल ने सारनाथ पहुंच बौद्ध विरासत को करीब से देखा

लखनऊ/वाराणसी, 22 अगस्त 2026 भगवान बुद्ध की पावन धरती सारनाथ पर शनिवार को उत्तर प्रदेश और जापान के बीच सदियों पुराने बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंधों की एक और सशक्त कड़ी जुड़ी। जापान के यामानाशी प्रांत के राज्यपाल कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में 75 सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल ने तथागत बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ का भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल में राज्यपाल नागासाकी की पत्नी भी शामिल थीं। इस दौरान अतिथियों ने धामेक स्तूप और चौखंडी स्तूप समेत बुद्ध से जुड़े प्रमुख स्थलों की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को करीब से जाना। हाल ही में सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा और भी खास मानी जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ सारनाथ देश का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। यूनेस्को की सूची में शामिल होने से प्रदेश के बौद्ध सर्किट को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिली है। माना जा रहा है कि जापान जैसे बौद्ध परंपरा से गहरे जुड़ाव वाले देशों से पर्यटकों की रुचि बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन की संभावनाओं को नई गति मिलेगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश की बौद्ध पर्यटन पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि यामानाशी प्रांत के प्रतिनिधिमंडल का सारनाथ आगमन भारत और जापान के सदियों पुराने बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है। इससे जापान के अधिक से अधिक पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत, ऐतिहासिक स्थलों और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराने में भी मदद मिलेगी।' जापानी प्रतिनिधिमंडल की सदस्य युमी साइटो ने सारनाथ यात्रा को अपने लिए बेहद खास अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में मान्यता मिलने के बाद सारनाथ की पावन धरती पर पहुंचना और भी विशेष रहा। भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़े स्थलों का भ्रमण करने के साथ धामेक और चौखंडी स्तूप को करीब से देखना, भारत और जापान के सदियों पुराने साझा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को महसूस करने जैसा अनुभव था। इस यात्रा ने उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बौद्ध, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई संभावनाओं को भी रेखांकित किया। बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ अब तेजी से प्रदेश की बौद्ध विरासत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। यहां पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों की बढ़ती रुचि से सारनाथ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिल रही है।

सर्वाधिक पसंद

Leave a Reply

comments

Loading.....
  1. No Previous Comments found.

moti2