49 संकेतकों से परखी जाएगी महिला सशक्तीकरण की प्रगति, 30% भागीदारी के लक्ष्य पर योगी सरकार का जोर

वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स 2.0 से होगा जिलावार मूल्यांकन, 45 संकेतकों के विश्लेषण में 27 पर सकारात्मक रुझान

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Lucknow, 4 Nov, 2026 06:22 PM
49 संकेतकों से परखी जाएगी महिला सशक्तीकरण की प्रगति, 30% भागीदारी के लक्ष्य पर योगी सरकार का जोर

लखनऊ, 4 नवंबर। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सरकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन अब आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के नियोजन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स 2.0 तैयार किया है। इसके जरिए महिलाओं की उद्यमिता, रोजगार, शिक्षा एवं कौशल विकास, आजीविका, सुरक्षा और आवागमन से जुड़ी सुविधाओं में भागीदारी का जिलावार मूल्यांकन किया जा रहा है।

इस इंडेक्स के लिए 15 विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर 49 संकेतक निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य केवल योजनाओं के क्रियान्वयन का आंकड़ा जुटाना नहीं, बल्कि यह आकलन करना भी है कि योजनाओं का लाभ महिलाओं तक किस स्तर तक पहुंच रहा है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

सभी विभागीय योजनाओं में 30 प्रतिशत महिला भागीदारी का लक्ष्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 जुलाई 2025 को इंडेक्स के पहले संस्करण की समीक्षा के दौरान सभी विभागीय योजनाओं में महिलाओं की 30 प्रतिशत भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने सबसे निचले प्रदर्शन वाले पांच जिलों में विशेष अभियान चलाने और सभी विभागों को जेंडर एक्शन प्लान तैयार कर लागू करने को भी कहा था।

इसी क्रम में इंडेक्स के दूसरे संस्करण में वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके जरिए जिलों के प्रदर्शन की तुलना कर उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।

पांच प्रमुख क्षेत्रों में हो रहा मूल्यांकन

वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स में महिला आर्थिक सशक्तीकरण को पांच प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है। इनमें शिक्षा एवं कौशल विकास को 22.4 प्रतिशत, उद्यमिता को 22.1 प्रतिशत, रोजगार को 21.9 प्रतिशत, आजीविका को 17.4 प्रतिशत और आवागमन, सुरक्षा एवं समावेशी बुनियादी ढांचे को 16.1 प्रतिशत वेटेज दिया गया है।

इन क्षेत्रों के तहत ओडीओपी, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, पीएम स्वनिधि, स्वयं सहायता समूहों, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और रोजगार मेलों जैसी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी का आकलन किया जा रहा है।

स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों की संख्या में बढ़ोतरी

ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराने के लक्ष्य की उपलब्धि में महिलाओं की भागीदारी वित्तीय वर्ष 2023-24 के 38 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 65.3 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अनुपात भी 24.9 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत पहुंच गया।

एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत महिला उद्यमियों की संख्या 2023-24 के 1.87 लाख से बढ़कर 2025-26 में 2.90 लाख हो गई। वहीं, ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी 58.2 प्रतिशत से बढ़कर 63.1 प्रतिशत और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में 49.5 प्रतिशत से बढ़कर 63.3 प्रतिशत हो गई।

पीएम स्वनिधि में महिला स्ट्रीट वेंडर्स की डिजिटल भागीदारी बढ़ी

पीएम स्वनिधि योजना के तहत महिला स्ट्रीट वेंडर्स की डिजिटल भागीदारी में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में महिला लाभार्थियों में 54 प्रतिशत डिजिटल रूप से सक्रिय थीं, जबकि 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 69 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि में तीसरी किस्त का ऋण प्राप्त करने वाली महिला लाभार्थियों का अनुपात भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत पहुंचा।

45 संकेतकों के विश्लेषण में 27 पर सकारात्मक रुझान

इंडेक्स में शामिल 45 संकेतकों के रुझानों के विश्लेषण में 27 पर सकारात्मक प्रगति, 15 पर नकारात्मक रुझान और तीन पर स्थिति स्थिर पाई गई। एमएसएमई विभाग के सभी पांच संकेतकों में सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। इसके अलावा शहरी विकास विभाग के तीनों और संस्थागत वित्त विभाग के दोनों संकेतकों में भी सकारात्मक प्रगति सामने आई है।

जिलावार समीक्षा और विभागीय जवाबदेही पर जोर

इंडेक्स के माध्यम से जिलों के प्रदर्शन की तुलना कर कमजोर क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इसके लिए विभागीय स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, नियोजन विभाग के प्लेटफॉर्म पर डैशबोर्ड और क्षेत्रवार जेंडर एक्शन प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। परिवहन और व्यावसायिक शिक्षा के लिए क्षेत्र-विशिष्ट कार्ययोजनाएं भी विकसित की गई हैं।

सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने के साथ रोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। जिलावार आंकड़ों के नियमित विश्लेषण से योजनाओं की कमियों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने का आधार तैयार किया जा रहा है।

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