दीपोत्सव 2026 : कदमों को सहारा, आस्था को उड़ान, व्हीलचेयर से आसान हुए दीपोत्सव और सरयू आरती के दर्शन
दिव्यांगों और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए दीपोत्सव में विशेष व्यवस्था, आस्था के उत्सव में सहभागिता बनी माध्यम, सरयू घाट, हनुमानगढ़ी और श्रीराम मंदिर तक पहुंचने में मिल रही सहूलियत, बहराइच और श्रावस्ती से आए लोग व्हीलचेयर से करा रहे श्रद्धालुओं को दर्शन, शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं के लिए आसान हुई रामनगरी की धार्मिक यात्रा
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 5 Nov, 2026 08:38 PMअयोध्या, 05 नवंबर। दीपोत्सव में अयोध्या की जगमगाती रोशनी के बीच आस्था का एक ऐसा पक्ष भी सामने आ रहा है, जो संवेदनाओं से जुड़ा है। दीपोत्सव और रामलला के दर्शन की अभिलाषा लेकर पहुंचने वाले दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था उनकी आस्था की राह आसान बना रही है। जिन श्रद्धालुओं के लिए पैदल चलकर मंदिरों तक पहुंचना कठिन है, वे अब व्हीलचेयर के सहारे हनुमानगढ़ी और श्रीराम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में सुविधापूर्वक दर्शन कर पा रहे हैं। दीपोत्सव की आरती और उत्सव में सहभागिता सुनिश्चित करने की यह पहल उनके लिए विशेष सहारा बन रही है।
बहराइच के देशराज बताते हैं कि वह व्हीलचेयर के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंदिरों तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं। कई दिव्यांग और बुजुर्ग रामलला के दर्शन की इच्छा लेकर अयोध्या पहुंचते हैं, लेकिन शारीरिक कठिनाइयों के कारण उनके लिए मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसे श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर से दर्शन कराने पर उनके चेहरे पर जो खुशी दिखाई देती है, वह सबसे सुखद अनुभव है। उनका कहना है कि दिव्यांग होना किसी की आस्था या भगवान के दर्शन की इच्छा में बाधा नहीं बनना चाहिए।
बहराइच के सतीश कुमार भी व्हीलचेयर के माध्यम से श्रद्धालुओं को दर्शन कराने में सहयोग दे रहे हैं। वह बताते हैं कि कई बुजुर्ग श्रद्धालु लंबी दूरी तक चलने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में व्हीलचेयर उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। श्रावस्ती के मणिकापुर खुर्द निवासी जगराम चौहान भी इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं को मंदिरों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। इन लोगों के प्रयासों से दिव्यांग और शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालु भी दीपोत्सव के उल्लास और रामनगरी की आध्यात्मिक अनुभूति से जुड़ पा रहे हैं।
दीपोत्सव की भव्यता के बीच व्हीलचेयर की यह व्यवस्था एक संवेदनशील संदेश भी दे रही है कि आस्था के उत्सव में हर व्यक्ति की सहभागिता महत्वपूर्ण है। दीपों की रोशनी तभी सार्थक है, जब उसकी चमक हर श्रद्धालु तक पहुंचे। दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधाजनक दर्शन की व्यवस्था इसी भावना को साकार कर रही है। रामनगरी में यह पहल उन लोगों के लिए उम्मीद और खुशी का सहारा बनी है, जिनकी आस्था अटूट है, लेकिन कदमों को सहारे की जरूरत है।


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