पीलीभीत में 200 एकड़ में बनेगा बायो-फार्मा पार्क, वैक्सीन और इंसुलिन निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
भरा पचपेड़ा में 951.79 एकड़ में विकसित हो रहा औद्योगिक क्षेत्र, नेपाल सीमा से निकटता और कनेक्टिविटी से निवेश की संभावनाएं
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 3 Nov, 2026 05:57 PMलखनऊ, 3 नवंबर। उत्तर प्रदेश को फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना के तहत पीलीभीत में 200 एकड़ भूमि पर बायो-फार्मा पार्क विकसित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ओर से अमरिया तहसील के भरा पचपेड़ा में 951.79 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसी परियोजना के तहत बायो-फार्मा पार्क के लिए 200 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है।
इस पार्क में वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसी आधुनिक जैविक औषधियों के निर्माण को प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके जरिए प्रदेश में दवा निर्माण के साथ बायोटेक्नोलॉजी आधारित अनुसंधान, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
951.79 एकड़ में विकसित हो रहा औद्योगिक क्षेत्र
उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के डायरेक्टर एवं विशेष विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसरों को बड़े शहरों से आगे क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाने की है। इसी दिशा में पीलीभीत के भरा पचपेड़ा में औद्योगिक परियोजना विकसित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि कुल 951.79 एकड़ भूमि में से 575.79 एकड़ औद्योगिक भूखंडों, 60.98 एकड़ कॉमन फैसिलिटी, 109.23 एकड़ ग्रीन एरिया और 96.20 एकड़ सड़क नेटवर्क के लिए निर्धारित की गई है। औद्योगिक क्षेत्र में फिलहाल 14 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त 200 एकड़ में बायो-फार्मा पार्क विकसित करने की योजना है।
वैक्सीन, इंसुलिन और जीन थेरेपी के निर्माण पर जोर
बायो-फार्मा पार्क को फार्मा फॉर्मूलेशन और बायोटेक्नोलॉजी आधारित उत्पादन की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की योजना है। यहां वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के निर्माण से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
डॉ. जीएन सिंह के अनुसार, इन उत्पादों का आधुनिक चिकित्सा और गंभीर बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण उपयोग है। ऐसे में पार्क के माध्यम से प्रदेश में उच्च तकनीक आधारित औषधि निर्माण और अनुसंधान की संभावनाओं को विस्तार मिल सकता है।
नेपाल सीमा से निकटता और रेल कनेक्टिविटी का मिलेगा लाभ
भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को भी निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। पीलीभीत शहर से लगभग 36 किलोमीटर, बरेली से 100 किलोमीटर तथा लखनऊ और दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह क्षेत्र नेपाल सीमा के भी निकट है।
बेहतर रेल कनेक्टिविटी और प्रमुख शहरों से संपर्क के कारण कच्चे माल की आपूर्ति तथा तैयार उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। नेपाल सीमा से निकटता को भविष्य में क्षेत्रीय व्यापार और निर्यात की संभावनाओं के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
स्किल डेवलपमेंट और इंक्यूबेशन पर भी रहेगा फोकस
परियोजना के तहत औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करने की भी योजना है। इसके लिए बायोटेक्नोलॉजी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट विकसित करने और स्किल डेवलपमेंट व इंक्यूबेशन के लिए विशेष विंग स्थापित करने का प्रस्ताव है।
इससे बायोटेक्नोलॉजी और फार्मा क्षेत्र में प्रशिक्षण, नई तकनीकों के विकास और स्टार्टअप गतिविधियों को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य है। स्थानीय युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है।


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