योगी सरकार में स्कूल शिक्षा को परिणामोन्मुख बनाने की पहल, तीन माह के केपीआई से तय होंगे लक्ष्य और जवाबदेही
- गुणवत्ता शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, निपुण आकलन और विद्यालय निरीक्षण सहित प्रमुख गतिविधियों के लिए समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित - नवंबर-दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 केएपीआई के अनुसार जिला एवं ब्लॉक स्तर पर होगी नियमित निगरानी - 75 जनपदों में मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों के निर्माण कार्यों की प्रगति पर नजर - बालिका शिक्षा, आरटीई, प्री-प्राइमरी, सामुदायिक सहभागिता, समेकित शिक्षा और एमआईएस के लिए भी गतिविधिवार लक्ष्य - केपीआई की मासिक समीक्षा और निर्धारित पोर्टल पर प्रगति अपलोड करना अनिवार्य
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 2 Nov, 2026 06:35 PMलखनऊ, 2 नवंबर। उत्तर प्रदेश में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख बनाने के लिए योगी सरकार ने नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत नवंबर-दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 की शैक्षिक गतिविधियों के लिए की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) निर्धारित किए गए हैं। अब शिक्षा विभाग के जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के कामकाज तथा योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से जारी निर्देशों में गुणवत्ता शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के निपुण आकलन, विद्यालय निरीक्षण और निर्माण कार्यों समेत विभिन्न गतिविधियों के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। अधिकारियों को निर्धारित पोर्टल पर प्रगति रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य होगा। इन KPI की मासिक समीक्षा भी की जाएगी।
शिक्षा अधिकारियों की होगी नियमित समीक्षा
कार्ययोजना के तहत जिला स्तरीय बैठकों, डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स (DTF) की मासिक समीक्षा और बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) द्वारा खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) के साथ साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा BEO और अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) की मासिक बैठक भी होगी। सभी बैठकों का कार्यवृत्त संबंधित पोर्टल पर अपलोड करना होगा। समग्र शिक्षा और पीएम पोषण योजना के क्रियान्वयन एवं खर्च का विवरण भी समय पर दर्ज किया जाएगा।
शिक्षक प्रशिक्षण और निपुण लक्ष्य पर रहेगा फोकस
सरकार की कार्ययोजना में शिक्षकों के प्रशिक्षण और कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने को प्राथमिकता दी गई है। दीक्षा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री, निष्ठा कोर्स, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण और कैच-अप शिक्षण के उपयोग की निगरानी होगी। विद्यार्थियों के निपुण लक्ष्य, आकलन, प्रगति पत्रक और शैक्षिक उपलब्धियों को भी नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा।
कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों का निपुण विद्यालय आकलन 21 से 30 दिसंबर 2026 और 20 से 30 जनवरी 2027 के बीच कराया जाएगा। इसके माध्यम से बच्चों की बुनियादी भाषा एवं गणितीय दक्षताओं का आकलन कर निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति देखी जाएगी।
75 जिलों में बन रहे मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों की निगरानी
प्रदेश के सभी 75 जनपदों में मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों के निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। बालिका शिक्षा के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) के निर्माण कार्यों, छात्राओं के नामांकन और उपस्थिति की भी समीक्षा होगी। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित संख्या में विद्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
RTE से लेकर बाल वाटिका तक तय होंगे लक्ष्य
कार्ययोजना में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत आवंटित बच्चों का पोर्टल पर शत-प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्री-प्राइमरी शिक्षा के अंतर्गत 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के बाल वाटिका में प्रवेश, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) गतिविधियों और आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ समन्वय की निगरानी होगी।
इसके साथ ही स्कूल चलो अभियान, आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान एवं नामांकन और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियों को भी निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार संचालित किया जाएगा।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और डिजिटल शिक्षा पर भी जोर
समेकित शिक्षा के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उन्हें सहायक उपकरण उपलब्ध कराने और आवश्यक शैक्षिक सुविधाओं की निगरानी की जाएगी। वहीं, MIS के अंतर्गत U-DISE+ पोर्टल पर विद्यार्थियों के नामांकन, जिला रैंकिंग, ICT, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और APAAR ID से जुड़े कार्यों की प्रगति दर्ज की जाएगी।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के बेहतर अधिगम के लिए प्रतिबद्ध है। निर्धारित KPI के माध्यम से शैक्षिक गतिविधियों की नियमित निगरानी और समयबद्ध लक्ष्यपूर्ति सुनिश्चित होगी।


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