देवभूमि से निकले विचारों ने हमेशा समाज को आगे बढ़ाया: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, ‘धरती का स्वर्ग उत्तराखंड’ पत्रिका और ‘देवभूमि का काव्य पुष्प’ पुस्तिका का किया विमोचन
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 29 Oct, 2026 03:36 PMदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव में आयोजित लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने लेखक गाँव की पत्रिका ‘धरती का स्वर्ग उत्तराखंड’ और ‘देवभूमि का काव्य पुष्प’ पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से ज्ञान, साहित्य, रचनात्मकता और संस्कृति का केंद्र रही है। यहां से निकले विचारों ने हमेशा समाज को नई दिशा देने और आगे बढ़ाने का काम किया है।
साहित्य समाज का मार्गदर्शक, राष्ट्र निर्माण में शब्दों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लेखक गाँव केवल साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले विचारों का प्रतीक है। यह पहल वर्तमान के साथ भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लेखक गाँव स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ उत्तराखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर नई पहचान दिला रहा है।
मुख्यमंत्री ने भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए कहा कि अटल जी शब्दों के साधक थे। उनकी लेखनी में पर्वतों जैसी दृढ़ता और गंगा जैसी गहराई थी। उन्होंने अपने विचारों और रचनाओं से यह संदेश दिया कि शब्द भी राष्ट्र निर्माण के प्रभावशाली माध्यम बन सकते हैं।
ऋषियों की ज्ञान परंपरा और उत्तराखंड का प्राकृतिक सौंदर्य साहित्य की प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की धरती ने सदियों से ऋषियों, मनीषियों, लेखकों, कवियों और विचारकों को प्रेरित किया है। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत ने साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साहित्य हमारे मूल्यों, विचारों और सामाजिक चेतना का प्रतिबिंब है।
उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा देने में लेखकों, कवियों और साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी प्रकार उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी साहित्यकारों और रचनाकारों ने अपने विचारों तथा लेखनी के माध्यम से जनचेतना को मजबूत किया। लेखक और रचनाकार केवल शब्दों के सृजक नहीं होते, बल्कि वे समाज के चिंतक और मार्गदर्शक भी होते हैं।
साहित्यकारों को सम्मान और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। प्रदेश के उत्कृष्ट साहित्यकारों को उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान, साहित्य भूषण और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसे पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हिंदी सहित प्रदेश की विभिन्न स्थानीय भाषाओं में ग्रंथों के प्रकाशन के लिए साहित्यकारों को अनुदान भी दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इसके साथ ही उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
प्रदेश में स्थापित किए जा रहे दो साहित्य ग्राम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में दो साहित्य ग्रामों की स्थापना की जा रही है। इन ग्रामों में साहित्यकारों के लिए आवासीय सुविधाओं के साथ आधुनिक पुस्तकालय, संगोष्ठी कक्ष और अध्ययन स्थल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे लेखकों और साहित्यकारों को रचनात्मक कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर के पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखंड के बिखरे हुए साहित्य को संकलित, संरक्षित और पुनर्स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना भी सरकार की प्राथमिकता है।
सीमांत क्षेत्रों में बढ़ रही पर्यटकों की संख्या: अजय टम्टा
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में ऐतिहासिक विकास कार्य हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से सीमांत क्षेत्रों में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा मिल रहा है। आदि कैलाश और नीति-माणा क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क और संपर्क सुविधाओं के कारण अब उन क्षेत्रों तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हुआ है, जहां पहुंचने में पहले कई दिन लग जाते थे। विकास कार्यों से सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को नई गति मिल रही है।
कई गणमान्य व्यक्ति रहे मौजूद
लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 के समापन समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह, प्रो. प्रदीप भारद्वाज, प्रो. राकेश सुंदरियाल, डॉ. विदुषी निशंक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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