हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल इकाइयों पर प्रदेशव्यापी कार्रवाई, करीब एक करोड़ का संदिग्ध माल सीज
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 13 जिलों में 63 इकाइयों का किया निरीक्षण, 43 नमूने लिए, अभियान के दौरान खाद्य सचल दलों और औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीमों ने किया व्यापक निरीक्षण, भ्रामक स्वास्थ्य दावों, गलत लेबलिंग, लाइसेंस संबंधी अनियमितताओं और खराब गुणवत्ता पर कार्रवाई
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 24 Sep, 2026 07:57 PMलखनऊ, 24 सितंबर। प्रदेश में हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रामक स्वास्थ्य दावों के जरिए गुमराह करने वाली गतिविधियों पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से हेल्थ सप्लीमेंट, न्यूट्रास्यूटिकल्स, डाइटरी फूड सप्लीमेंट्स के विनिर्माताओं, रिलेबलर्स, रीपैकर्स और थोक विक्रेताओं के विरुद्ध प्रदेशव्यापी संयुक्त जांच अभियान चलाया गया।
अभियान में खाद्य सचल दलों और औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीमों ने आगरा, बाराबंकी, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, झांसी, प्रयागराज, मुरादाबाद, लखनऊ, बरेली, हाथरस, मथुरा, गोरखपुर और वाराणसी में विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं इकाइयों का निरीक्षण किया। इस दौरान करीब 63 इकाइयों का निरीक्षण, 43 नमूने संग्रहित और करीब एक करोड़ रुपये मूल्य के संदिग्ध, भ्रामक दावों वाले अथवा नियमों के विपरीत पाए गए हेल्थ सप्लीमेंट एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स को जब्त किया गया।
न्यूट्रास्यूटिकल्स ऐसे खाद्य या खाद्य-आधारित उत्पाद होते हैं, जिनमें विटामिन, मिनरल, प्रोटीन, ओमेगा-3, प्रोबायोटिक्स या अन्य पोषक तत्व शामिल होते हैं और जिनका उद्देश्य शरीर को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य को सपोर्ट करना होता है। इन्हें सामान्यतः दवाओं के रूप में नहीं, बल्कि पोषण एवं स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों के रूप में देखा जाता है।
कच्चे माल से लेकर लेबलिंग तक हुई गहन जांच-
अभियान के दौरान केवल तैयार उत्पादों की जांच तक कार्रवाई सीमित नहीं रही। संयुक्त टीमों ने रॉ मैटेरियल की गुणवत्ता और उसके स्रोत, खरीद संबंधी अभिलेख, उपलब्ध स्टॉक, निर्माण एवं भंडारण की स्थिति, लेबलिंग, हेल्थ क्लेम, औषधीय अथवा भ्रामक दावे, स्वच्छता एवं सैनिटरी कंडीशन तथा लाइसेंस की वैधता की भी जांच की।निरीक्षण के दौरान कई प्रतिष्ठानों में स्वच्छता एवं सैनिटरी कमियां, मिसब्रांडिंग, भ्रामक स्वास्थ्य दावे, अनुचित लेबलिंग, लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं और एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों के भंडारण जैसी कमियां सामने आईं। अभियान के दौरान निरीक्षण किए गए करीब 63 प्रतिष्ठानों में से 18 प्रतिष्ठान संचालित मिले, जबकि 45 प्रतिष्ठान गैर-संचालित अथवा बंद पाए गए। विभाग ने प्रत्येक मामले की प्रकृति के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई शुरू की है।
लखनऊ में करीब 39.50 लाख का माल सीज-
राजधानी लखनऊ में कार्रवाई के दौरान जेवीएस फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का विशेष रूप से निरीक्षण किया गया। यहां से पांच नमूने लिए गए और करीब 39.50 लाख रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थ सीज किए गए। विभाग के अनुसार प्रतिष्ठान में मिसब्रांडिंग और भ्रामक दावों के साथ-साथ स्वच्छता एवं सैनिटरी स्थिति भी अत्यंत खराब पाई गई।
इसी प्रकार लखनऊ स्थित सेंटर फ्यूरेरा हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में तीन न्यूट्रास्यूटिकल्स के साथ करीब 10 लाख रुपये मूल्य की एलोपैथिक औषधियां भी भंडारित पाई गईं। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान द्वारा केवल मार्केटिंग गतिविधि किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई। टीम ने यहां रिलेबलिंग, मार्केटिंग और पैकिंग से संबंधित गतिविधियों की भी जांच की।
गोरखपुर में 27 लाख का माल जब्त-
गोरखपुर स्थित बुद्ध मेडिको प्राइवेट लिमिटेड में लेबलिंग संबंधी गतिविधियां पाए जाने पर तीन नमूने लिए गए। साथ ही करीब 27 लाख रुपये मूल्य का माल सीज किया गया। विभाग ने लेबलिंग से जुड़ी गतिविधियों और उत्पादों की नियामकीय स्थिति की जांच की।
झांसी में वैदिक एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड से 13 खाद्य सप्लीमेंट के नमूने लिए गए। निरीक्षण के दौरान 161 बोरी एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ पाए गए, जिन्हें नष्ट कराया गया। इसके अलावा उपलब्ध अन्य खाद्य पदार्थों को भी सीज किया गया।
नोएडा में उत्पाद भंडारण की स्थिति पर कार्रवाई-
गौतमबुद्धनगर स्थित बायोरीहेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में फिनिश्ड प्रोडक्ट के भंडारण की स्थिति असंतोषजनक पाई गई। टीम ने यहां तीन नमूने लिए और करीब छह लाख रुपये मूल्य का माल सीज किया।
वहीं गाजियाबाद में मिसब्रांडेड और भ्रामक दावों से संबंधित तीन नमूने लिए गए तथा करीब 27 लाख रुपये मूल्य का माल सीज किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतिष्ठानों से हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स के नमूने भी लिए गए।
‘पावरफुल रिजल्ट’, ‘क्विक रिकवरी’ जैसे दावों की भी जांच-
आगरा स्थित एएसएच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड में उत्पाद निर्माण की गतिविधि नहीं पाई गई, लेकिन उत्पादों के लेबल पर *‘पावरफुल रिजल्ट’ और ‘क्विक रिकवरी’ जैसे दावे अंकित मिले। विभाग ने इन दावों को भ्रामक मानते हुए मामले में सक्षम न्यायालय के समक्ष विधिक कार्रवाई प्रस्तावित की है।
दूसरी तरफ, वाराणसी के सुधविन हेल्थकेयर में विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर प्रतिष्ठान को बंद किए जाने की संस्तुति की गई है।
गंभीर मामलों में लाइसेंस कार्रवाई की तैयारी-
विभाग की ओर से बताया गया कि अभियान के दौरान जहां कमियां सुधार योग्य पाई गईं, वहां सुधार सूचना/नोटिस जारी किए गए। वहीं गंभीर अनियमितताओं वाले मामलों में लाइसेंस के निलंबन या निरस्तीकरण की संस्तुति की गई है। जिन प्रतिष्ठानों में निर्माण गतिविधि नहीं पाई गई अथवा जो बंद मिले, वहां भी नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की गई।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का कहना है कि हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स के क्षेत्र में उपभोक्ता हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग विशेष रूप से उन उत्पादों और प्रतिष्ठानों पर निगरानी कर रहा है, जहां खाद्य या सप्लीमेंट उत्पादों को औषधीय प्रभाव, त्वरित उपचार, रोग निवारण अथवा अन्य स्वास्थ्य लाभ के भ्रामक दावों के साथ बाजार में प्रस्तुत किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं को गुमराह करने वालों पर कार्रवाई रहेगी जारी-
विभाग ने स्पष्ट किया है कि हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स के नाम पर नियमों का उल्लंघन करने, गलत अथवा भ्रामक स्वास्थ्य दावे करने और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य केवल अनियमित उत्पादों को बाजार से हटाना ही नहीं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, सही लेबलिंग, पारदर्शी स्वास्थ्य दावों, सुरक्षित भंडारण और नियमानुसार लाइसेंस व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। विभाग की ओर से कहा गया है कि प्रदेश में हेल्थ सप्लीमेंट एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी मजबूत करते हुए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी।



No Previous Comments found.