अटल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण न करने पर अखिलेश यादव पर बरसे भाजपा सांसद

राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा बोले- अटल जी से अखिलेश राजनीतिक मर्यादा सीखें, अखिलेश यादव के अवंती बाई की पुण्यतिथि पर छुट्टी के ऐलान को डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया ‘ढपोरशंखी घोषणा’, राज्यसभा सांसद बृजलाल का आरोप- लोधी समाज के वोट के लिए अवंती बाई के नाम पर राजनीति कर रहे अखिलेश

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Lucknow, 16 Aug, 2026 11:38 PM
अटल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण न करने पर अखिलेश यादव पर बरसे भाजपा सांसद

लखनऊ, 16 अगस्त। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं करने को लेकर भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा और बृजलाल ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। डॉ. शर्मा ने कहा कि श्रद्धांजलि देना व्यक्ति की श्रद्धा का विषय है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक मर्यादा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे नेता थे, जिन्हें उनके राजनीतिक विरोधी भी सम्मान देते थे और उन्हें राजनीति का 'अजातशत्रु' कहा जाता था।


डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद सैफई जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। विधानसभा में भी उनके सम्मान में शोक प्रस्ताव पारित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आज भी मुलायम सिंह यादव की जयंती और पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हैं। इससे पता चलता है कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद सम्मान की भावना बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि दी, लेकिन कुछ ही दूरी पर स्थित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर नहीं किया। अटल जी जैसे विराट व्यक्तित्व से कम से कम राजनीतिक मर्यादा जरूर सीखनी चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का भी उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर पिछड़ों की राजनीति की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर स्वर्गीय कल्याण सिंह जैसे पिछड़े समाज के बड़े नेता की अनदेखी की गई।


पीडीए की परिभाषा को लेकर खुद भ्रमित हैं अखिलेशः डॉ. शर्मा-


भाजपा सांसद डॉ. शर्मा ने अखिलेश यादव के पीडीए पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष कभी पीडीए का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताते हैं तो कभी पंडित और पीड़ित वर्ग की बात करते हैं। अखिलेश यादव स्वयं तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनका पीडीए आखिर क्या है। वहीं, वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि पर छुट्टी घोषित करने के अखिलेश यादव के बयान पर डॉ. दिनेश शर्मा ने इसे ढपोरशंखी घोषणा करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा को प्रदेश में लंबे समय तक शासन करने का अवसर मिला, लेकिन उस दौरान ऐसी घोषणाएं क्यों नहीं की गईं। जनता अब केवल घोषणाओं से प्रभावित होने वाली नहीं है और राजनीतिक दलों को अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए।


अखिलेश यादव के बागी नेताओं को लेकर 'चवन्नी से अठन्नी' बनाने वाले बयान पर डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि किसी व्यक्ति को कोई नेता नहीं बनाता, जनता बनाती है और जनता ही बिगाड़ती है। वहीं पीडीए के जरिए पिछड़ों और वंचितों को सम्मान व अधिकार देने के सपा अध्यक्ष के दावे पर उन्होंने कहा कि जब सपा सरकार के दौरान लोगों को उनका हक नहीं मिला तो अब ऐसे दावों की गारंटी क्या है।


राज्यसभा सांसद बृजलाल बोले- लोधी समाज के वोट के लिए हो रही राजनीति-


भाजपा के राज्यसभा सांसद व यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह लोधी समाज के वोट को साधने के लिए अवंती बाई लोधी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता थे और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बृजलाल ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के समय अखिलेश यादव उनके अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे, जबकि अब वीरांगना रानी अवंती बाई के कार्यक्रम में शामिल होकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है। 


सांसद बृजलाल ने कहा कि भाजपा और योगी सरकार ने महापुरुषों एवं वीरांगनाओं के सम्मान को केवल राजनीतिक नारों तक सीमित नहीं रखा है। अवंती बाई लोधी के नाम पर बदायूं में महिला बटालियन, ऊदा देवी पासी के नाम पर लखनऊ में और झलकारी बाई कोरी के नाम पर गोरखपुर में महिला बटालियन स्थापित की गई है। भाजपा ने इन वीरांगनाओं के सम्मान को धरातल पर उतारने का काम किया है।


अटल जी राष्ट्र प्रथम की राजनीति के प्रतीक थे-


सांसद बृजलाल ने कहा कि वीरांगना रानी अवंती बाई की प्रतिमा से कुछ ही दूरी पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा है, लेकिन अखिलेश यादव वहां श्रद्धांजलि देने नहीं गए। उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी पांच बार लखनऊ से सांसद रहे और राष्ट्र प्रथम की राजनीति के लिए जाने जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की राजनीति राष्ट्र प्रथम के बजाय परिवार और वोट बैंक के इर्द-गिर्द केंद्रित है। बृजलाल ने पीडीए को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए इसे परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी तक कह दिया।


दलित मुद्दे पर भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को घेरा-


बृजलाल ने खुद को दलित बताते हुए अखिलेश यादव के दलित हितों से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान बड़ी संख्या में दलित कर्मचारियों और अधिकारियों की पदावनति की गई। उन्होंने अपने ऊपर दर्ज एक पुराने मुकदमे का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि सपा सरकार में उनके साथ राजनीतिक कार्रवाई की गई।


उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम से जुड़े संस्थानों और स्थलों के नाम बदले जाने का भी आरोप लगाया। बृजलाल ने कहा कि जो लोग आज पीडीए और सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं, उनके शासनकाल का रिकॉर्ड जनता के सामने है। बृजलाल ने सपा-बसपा गठबंधन और 1995 के गेस्ट हाउस कांड का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बीजेपी ने मायावती को बचाया था। बीजेपी ने ही दलित महिला को मुख्यमंत्री बनाया था। बीजेपी जो कहती है, वह करती है। लेकिन अखिलेश कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं। मायावती का फ़ायदा लेकर सपा ने 1993 में सरकार तो बना ली थी, लेकिन उनकी हत्या का प्रयास किया। सपा ने बाबा साहब का अपमान किया है, यह दलित कभी नहीं भूलेगा।

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