एफएसडीए की जांच में सामने आईं अनियमितताएं, कम कीमत पर मिली दवाएं, मरीजों से वसूली जा रही लगभग पूरी एमआरपी
दवाओं की कीमतों पर यूपीएफएसडीए की सख्त निगरानी, विशेष अभियान के तहत 17 जिलों में 52 अस्पतालों की फार्मेसियों का हुआ औचक निरीक्षण, निर्माता कंपनियों ने दवाओं पर रखी काफी अधिक प्रिंटेड एमआरपी, अस्पतालों की फार्मेसी को मिल रहीं काफी कम परचेज प्राइस में, मरीजों को बिना उचित छूट के लगभग पूरी एमआरपी पर दवाएं बेचे जाने के मामले सामने आए
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 3 Oct, 2026 09:11 PMलखनऊ, 03 अक्टूबर। मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उचित कीमत पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए), उत्तर प्रदेश ने अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों में दवाओं के मूल्य निर्धारण और खरीद-बिक्री व्यवस्था की जांच तेज कर दी है। प्रदेशव्यापी विशेष अभियान के तहत 17 जनपदों में 09 राजकीय मेडिकल कॉलेज, 11 निजी मेडिकल कॉलेज और 32 निजी अस्पतालों की फार्मेसियों का सघन निरीक्षण किया गया।
अभियान के दौरान विभागीय टीमों ने विशेष रूप से यह पड़ताल की कि अस्पतालों की फार्मेसियों को निर्माता कंपनियों और सप्लायर्स से दवाएं किस कीमत पर प्राप्त हो रही हैं और मरीजों को उन्हीं दवाओं की बिक्री किस मूल्य पर की जा रही है। जांच में कुछ मामलों में सामने आया कि निर्माता कंपनियों द्वारा दवाओं पर प्रिंटेड एमआरपी काफी अधिक रखी गई है, जबकि अस्पतालों को वही दवाएं काफी कम परचेज प्राइस पर प्राप्त हो रही हैं। इसके बावजूद मरीजों को बिना उचित छूट के लगभग पूरी एमआरपी पर दवाएं बेचे जाने के मामले सामने आए हैं।
विभाग ने खरीद मूल्य और मरीजों से वसूले जा रहे बिक्री मूल्य के बीच इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अस्पतालों, सप्लायर्स और निर्माता फर्मों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगने की कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग द्वारा यह भी जांच की जा रही है कि दवाओं के खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच अंतर का आधार क्या है तथा संबंधित मामलों में औषधि मूल्य नियंत्रण से जुड़े प्रावधानों का पालन किया गया है या नहीं।
*डीपीसीओ के प्रावधानों के अनुपालन की भी जांच*
अभियान के दौरान औषधियों के मूल्य निर्धारण से संबंधित प्रावधानों की भी जांच की गई। फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा में मूल्य निर्धारण से संबंधित विसंगतियां सामने आईं और ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 2013 (डीपीसीओ) के प्रावधानों के अनुपालन की जांच की गई। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।विभाग के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल औषधियों की गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उचित कीमत पर उपलब्ध कराना भी है। इसी क्रम में अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद-बिक्री व्यवस्था, बिक्री बिल, स्टॉक रिकॉर्ड तथा मूल्य संबंधी अभिलेखों का सत्यापन किया जा रहा है।
*लाइसेंस, बिल और स्टॉक रिकॉर्ड में भी मिलीं विसंगतियां*
मूल्य संबंधी जांच के साथ ही फार्मेसियों में लाइसेंस और खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई। टेंडर पाल्म, लखनऊ, टी.एस. मेडिकल कॉलेज, लखनऊ, वाराणसी हॉस्पिटल, वाराणसी, एपेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वाराणसी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा तथा सर्वोदय हॉस्पिटल, नोएडा की फार्मेसियों में लाइसेंस, बिक्री बिलों पर अंकित पते तथा स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड से संबंधित अनियमितताएं पाई गईं। वहीं, जावित्री हॉस्पिटल, लखनऊ में संचालित थोक फर्म में औषधियों के भंडारण एवं रख-रखाव से संबंधित अनियमितता पाए जाने पर सुशांत धारा के अंतर्गत औषधियों के विक्रय पर रोक लगाई गई।
*फार्मासिस्ट की उपस्थिति और मैपिंग की भी जांच*
अभियान के दौरान अस्पतालों की फार्मेसियों में फार्मासिस्ट की उपलब्धता और उनकी मैपिंग की भी जांच की गई। वाराणसी हॉस्पिटल, वाराणसी में फार्मासिस्टों की उपस्थिति एवं मैपिंग से संबंधित कमियां पाई गईं। विभाग द्वारा संबंधित कमियों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त, औषधियों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक भंडारण मानकों की भी जांच की गई। टी.एस. मेडिकल कॉलेज, लखनऊ, क्लाउड नाइन, लखनऊ तथा फेलिक्स हॉस्पिटल, नोएडा में तापमान लॉगर अथवा कोल्ड चेन संधारण से जुड़े मानकों में कमियां दर्ज की गईं।
*गंभीर अनियमितताओं पर कानून के तहत होगी कार्रवाई*
एफएस डीए द्वारा स्पष्ट किया गया है कि निरीक्षण के दौरान सामने आई गंभीर अनियमितताओं के मामलों में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, मूल्य निर्धारण से जुड़े मामलों में संबंधित अस्पतालों, सप्लायर्स और निर्माता फर्मों से प्राप्त स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि दवाओं की कीमत, गुणवत्ता, सुरक्षित भंडारण और बिक्री व्यवस्था से जुड़े मामलों में निगरानी आगे भी जारी रहेगी।



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