चित्रकूट में 20 साल बाद सबसे भयंकर बाढ़, मंदाकिनी खतरे के निशान से 13 मीटर ऊपर
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में तबाही, करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 30 Aug, 2026 09:17 PMभोपाल। पूर्वी मध्य प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने चित्रकूट में दो दशक से अधिक समय बाद सबसे गंभीर बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 13 मीटर ऊपर पहुंच गया, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसे तीर्थनगरी के दोनों ओर घर, होटल, मंदिर और धर्मशालाएं बाढ़ की चपेट में आ गईं। अब तक दोनों राज्यों में करीब 1,000 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
14-15 घंटे की मूसलाधार बारिश से बिगड़े हालात
शुक्रवार रात और शनिवार को सतना जिले के ऊपरी इलाकों में करीब 14-15 घंटे तक हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। बाढ़ के कारण चित्रकूट में सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।
मंदाकिनी नदी सतना जिले के पहाड़ी क्षेत्र से निकलती है और चित्रकूट से होकर गुजरने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सीमा का हिस्सा बनाती है। भारी बारिश के बाद नदी का पानी तेजी से बढ़ा और शनिवार तक यह खतरे के निशान से करीब 12-13 मीटर ऊपर बहने लगी।
घरों और धार्मिक स्थलों में घुसा पानी
मंदाकिनी के जलस्तर में असाधारण वृद्धि से चित्रकूट का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया। नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों तथा श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। कई लोग पानी बढ़ने के बाद मकानों की छतों और ऊपरी मंजिलों पर शरण लेने को मजबूर हुए।
नदी किनारे स्थित कई इमारतों में बाढ़ का पानी घुस गया। घरों के साथ होटल, मंदिर और धर्मशालाएं भी प्रभावित हुईं।
करीब 300 मीटर लंबे पुल का बड़ा हिस्सा बहा
मंदाकिनी के रिकॉर्ड जलस्तर का असर नदी पर बने प्रमुख पुल पर भी पड़ा। मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश सीमा पर नयागांव के रामघाट को हनुमान धारा से जोड़ने वाले करीब 300 मीटर लंबे पुल का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी की तेज धारा में बह गया।
पुल क्षतिग्रस्त होने से तीर्थनगरी के दोनों हिस्सों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क बाधित हो गया है।
दोनों राज्यों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान
चित्रकूट के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, दोनों हिस्सों में बचाव एजेंसियों ने लगातार अभियान चलाया। मध्य प्रदेश की ओर सतना जिले के चित्रकूट क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावित इलाकों से करीब 700 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। वहीं उत्तर प्रदेश की ओर 200 से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बाहर निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि नदी का जलस्तर वर्ष 2003 में आई पिछली बड़ी बाढ़ के मुकाबले काफी अधिक रहा।
उन्होंने रविवार को कहा, “शनिवार को मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से 13 मीटर ऊपर बह रही थी, जो 2003 में दर्ज की गई सबसे भीषण बाढ़ से एक मीटर अधिक थी।” गर्ग ने बताया कि नदी का जलस्तर अब घट रहा है, लेकिन अभी भी यह खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर बह रही है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की ओर 200 से अधिक लोगों को बचाकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में 2,700 भोजन के पैकेट भी वितरित किए गए हैं।
फंसे लोगों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से निकाला
मध्य प्रदेश की ओर बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बाद भारतीय वायुसेना को भी बचाव अभियान में लगाया गया। शनिवार शाम प्रयागराज से पहुंचे वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने रामघाट के पास मंदाकिनी के बीच बाढ़ के पानी में आंशिक रूप से डूबी इमारत की छत पर फंसे लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला।
सतना के कई इलाकों में भी बाढ़ का असर
बाढ़ का संकट केवल चित्रकूट तक सीमित नहीं रहा। सतना जिले के कई हिस्सों में लगातार बारिश और नदियों के उफान से हालात प्रभावित हुए हैं। चित्रकूट, कोटर और रामपुर बघेलान तहसीलों के कई गांवों में व्यापक नुकसान की सूचना है।
मंदाकिनी और सेमरावल नदियों के उफान से कई गांवों में पानी घुस गया। बाढ़ के कारण मकानों, सड़कों और फसलों को नुकसान पहुंचा है। पशुधन और मुर्गीपालन को भी भारी क्षति हुई है।
भाजपा सांसद का घर भी डूबा
सतना के भाजपा सांसद गणेश सिंह ने बताया कि उनके गांव स्थित घर में भी बाढ़ का पानी भर गया है। उन्होंने राज्य सरकार से जिले के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
गणेश सिंह ने कहा, “अब तक किसी इंसानी जान के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पशुधन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और घरों तथा फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। एक गांव में एक किसान की हजारों मुर्गियां बह गईं।”
उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से विशेष रूप से चित्रकूट के लिए राहत पैकेज घोषित करने का आग्रह किया है। चित्रकूट में पुल, सड़क और मकानों को काफी नुकसान हुआ है। पानी और कम होने के बाद नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू किए जाने की उम्मीद है।
एक सितंबर तक स्कूल बंद रखने का फैसला
मौसम विभाग ने पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी और बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इसके मद्देनजर प्रशासन अलर्ट पर है। एहतियात के तौर पर सतना जिले के सभी स्कूलों को एक सितंबर तक बंद रखने की सूचना है।
सिंगरौली में भी बिगड़े हालात
पड़ोसी सिंगरौली जिले के कुछ हिस्सों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। खखन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। देवसर के पास बनाया गया अस्थायी पुल नदी के उफान में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने इस पुल पर यातायात रोक दिया।
पुल क्षतिग्रस्त होने से सिंगरौली और सीधी जिलों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के पन्ना तथा टीकमगढ़ जिलों से भी भारी बारिश और बाढ़ की खबरें सामने आई हैं। बारिश जारी रहने पर इन क्षेत्रों में भी स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
चित्रकूट पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव
मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली से रीवा पहुंचे। उन्होंने देर रात वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर सतना में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में चित्रकूट के हालात पर विशेष रूप से चर्चा की गई।
रविवार को निवाड़ी जिले के ओरछा में भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने से पहले मुख्यमंत्री चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने मौके पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पैदल निरीक्षण किया, राहत शिविरों में रह रहे परिवारों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की।
“यह क्षेत्र में कई वर्षों की सबसे भीषण बाढ़”
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “यह इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ है। सौभाग्य से किसी इंसानी जान के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रभावित परिवारों को भारी नुकसान हुआ है।”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने उन कारणों की भी जांच करने को कहा, जिनकी वजह से बाढ़ की स्थिति इतनी गंभीर हुई। इनमें संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित अतिक्रमण की भूमिका की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक समेत वरिष्ठ अधिकारी अगले तीन दिनों तक क्षेत्र में रहेंगे। ये अधिकारी स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय करते हुए राहत कार्यों और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयासों की निगरानी करेंगे।
पानी घटा, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
चित्रकूट में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन मंदाकिनी नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रशासन का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत सामग्री वितरित करने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करने पर है। मौसम विभाग की ओर से पूर्वी मध्य प्रदेश में फिर बारिश की संभावना के बीच प्रशासन किसी नए जलभराव या बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए भी तैयार है।



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