Yogini Ekadashi 2026: 10 या 11 जुलाई, योगिनी एकादशी कब है? नोट करें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 9 Jul, 2026 05:05 PMYogini Ekadashi 2026: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. ये एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इस दिन पर उनकी पूजा करने से अक्षयफल की प्राप्ति होती है. योगिनी एकादशी के बारे में पद्मपुराण और कई महाग्रंथों में उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि अगर जातक इस एकादशी का व्रत विधि-विधान से करता है तो उसे 88 हजार ब्राह्म्णों को भोजन करवाने जितना फल मिलता है. इस एकादशी का पालन करने से कुष्ठ रोगों से मुक्ति मिलती है. यह एकादशी आपके सभी पापों को नष्ट कर देती है. मगर इस साल योगिनी एकादशी की तारीख को लेकर भक्तों में असमंजस बना हुआ है. ऐसे में हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताते हैं कि योगिनी एकादशी किस दिन व्रत रखें. साथ ही जानिए पारण का समय.
एकादशी कब है? (Ekadashi Kab Hai) द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में योगिनी एकादशी की तिथि का प्रारंभ 10 जुलाई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होगा. वहीं, एकादशी तिथि का समापन 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा. ऐसे में दोनों ही दिन सूर्योदय की उदयातिथि एकादशी पर नहीं पड़ रही है. योगिनी एकादशी का व्रत भी दोनों ही दिन रखा जा सकता है. बता दें कि गृहस्थों के लिए योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखना शुभ रहेगा. वहीं, वैष्णव धर्म के लोग 11 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी का व्रत रख सकते हैं. योगिनी एकादशी 2026 मुहूर्त (Yogini Ekadashi 2026 Shubh Muhurat) आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि आरंभ- 10 जुलाई शुक्रवार को सुबह 8:10 पर शुरू होगी आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि समापन- 11 जुलाई, शनिवार को सुबह 5:23 पर होगी योगिनी एकादशी 2026- 10 जुलाई 2026, शुक्रवार योगिनी एकादशी पारण का समय (Yogini Ekadashi 2026 Paran Timing) इस साल योगिनी एकादशी व्रत का पारण 11 और 12 जुलाई, दोनों दिन किया जाएगा. जो लोग 10 जुलाई को व्रत रख रहे हैं उन्हें 11 जुलाई को पारण करना होगा. इस दिन सुबह 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 8:24 तक पारण का मुहूर्त रहेगा. अब जो लोग 11 जुलाई को व्रत रख रहे हैं, उन्हें 12 जुलाई को पारण करना होगा. इसके लिए सुबह 5:32 से 8:18 तक का समय मिल रहा है. योगिनी एकादशी पूजा विधि एकादशी के दिन आपको सूर्योदय से पहले उठना है. इसके बाद स्नान आदि करके खुद को स्वच्छ कर लें. इसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के मंदिर की सफाई करें. इसके बाद वहां एक चौकी बिठाएं. चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. उस प्रतिमा पर पीले फूल चढ़ाएं, भगवान को चंदन का टीका लगाएं. उन्हें अक्षत चढ़ाएं और पीले फलों तथा दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं. इसके बाद भगवान विष्णु के सामने गाय के देसी घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं. अब भगवान विष्णु को तुलसीदल अर्पित करें. ध्यान रहे इस दिन उन्हें तुलसी अर्पित करने के लिए आपको एक दिन पहले ही तुलसी तोड़नी होगी. एकादशी पर तुलसी नहीं तोड़ते हैं क्योंकि तुलसी माता भी एकादशी व्रत रखती है. इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. इस दिन विष्णु सहस्त्रनामा का पाठ करना चाहिए. एकादशी की रात में सोना नहीं चाहिए. रात के समय आप भगवान के भजनों का पाठ करें. अगले दिन पारण मुहूर्त पर द्वादशी तिथि पर व्रत खोलों. पारण करते समय खुद भोजन करने से पहले गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन और दान-दक्षिणा जरूर दें. एकादशी के दिन क्या करें और क्या न करें? 1.पीले रंग का इस्तेमाल- भगवान विष्णु का प्रिय रंग पीला होता है. इसलिए, आपको इस दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए. 2.दान-कर्म- आपको आज के दिन जल, अन्न, छाता और वस्त्रों का दान करना चाहिए. 3.सात्विक्ता- एकादशी के दिन आपको मन, वचन और कर्म से सात्विक रहना चाहिए. इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें. 4.अपशब्दों का प्रयोग- योगिनी एकादशी पर हमें अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. इस दिन गुस्सा, गाली-गलोच और किसी से लड़ाई-झगड़ा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. 5.चावलों का सेवन- याद रहे एकादशी व्रत के नियम को पूरे परिवार का मानने होते हैं. इसलिए, एकादशी के दिन चावल घर के किसी भी सदस्य को नहीं खाने चाहिए. योगिनी एकादशी का महत्व (Yogini Ekadashi Importance) योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन के सारे पाप मिट जाते हैं और जीवन में समृद्धि और आनन्द की प्राप्ति होती है. योगिनी एकादशी का व्रत करने से स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है. योगिनी एकादशी तीनों लोकों में प्रसिद्ध है.



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