आज है विश्वकर्मा पूजा, भगवान विश्वकर्मा को समर्पित, जाने क्या संदेश देता है ये पर्व

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Lucknow, 17 Sep, 2026 09:05 AM
आज है विश्वकर्मा पूजा, भगवान विश्वकर्मा को समर्पित, जाने क्या संदेश देता है ये पर्व

विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा को समर्पित पर्व है। हिंदू परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण-कला के अधिष्ठाता माना जाता है। यह पूजा विशेष रूप से कारीगरों, इंजीनियरों, उद्योगों, कारखानों, दुकानों और उन लोगों में प्रचलित है जिनका काम औजारों, मशीनों या निर्माण से जुड़ा है। विश्वकर्मा पूजा क्यों की जाती है? औजार और मशीनों के प्रति सम्मान जिन उपकरणों और मशीनों से आजीविका चलती है, उनकी पूजा करके उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। काम में सफलता और कुशलता के लिए मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा से कार्य-कौशल, निर्माण और तकनीकी कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है। सुरक्षित और सुचारु कार्य की कामना कारखानों और कार्यस्थलों में मशीनों की पूजा करके दुर्घटनाओं से सुरक्षा और कार्य में बाधा न आने की प्रार्थना की जाती है। श्रम और हुनर का सम्मान यह पर्व केवल मशीनों की पूजा नहीं है, बल्कि कारीगरी, तकनीकी ज्ञान, मेहनत और सृजनात्मकता के सम्मान का भी प्रतीक है।

धार्मिक महत्व पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए अनेक दिव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और नगरों का निर्माण किया। इसलिए उन्हें निर्माण, वास्तुकला और शिल्प-कौशल का देवता माना जाता है। इस दिन लोग अपने औजार, वाहन, मशीन, कंप्यूटर, उपकरण और कार्यस्थल को साफ करके पूजा करते हैं। कई स्थानों पर मशीनों को उस दिन चलाने से भी परहेज किया जाता है। सरल शब्दों में: विश्वकर्मा पूजा हमें यह याद दिलाती है कि हमारी रोज़ी-रोटी के साधन, हमारा हुनर और मेहनत—इन सबका सम्मान और संरक्षण करना चाहिए।

विश्वकर्मा पूजा 2026 — विधि और मुहूर्त आज, 17 सितंबर 2026 (गुरुवार) को विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है। इस दिन कन्या संक्रांति भी है और सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश लगभग सुबह 7:49–7:58 बजे हुआ है।

शुभ पूजा समय: सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक — पूजा के लिए शुभ अवधि बताई गई है।  अभिजीत मुहूर्त: लगभग 11:57 AM से 12:45 PM (स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है)। राहुकाल: दोपहर 1:52 से 3:23 बजे — इस दौरान मुख्य पूजा शुरू करने से बचें।

सरल विश्वकर्मा पूजा विधि कार्यस्थल/दुकान/कारखाने की सफाई करें और मशीनों, औजारों तथा उपकरणों को साफ करें। पूजा की जगह पर चौकी रखकर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। दीपक और धूप जलाकर गणेश जी का स्मरण करें। भगवान विश्वकर्मा को रोली, अक्षत, चंदन, फूल और माला अर्पित करें। कलश में जल भरकर नारियल रखें और भगवान का आवाहन करें। मशीनों, औजारों और कार्य-सामग्री पर रोली-अक्षत व फूल चढ़ाएं। फल, मिठाई और प्रसाद अर्पित करें।

भगवान विश्वकर्मा का मंत्र जपें: “ॐ विश्वकर्मणे नमः।”

अंत में विश्वकर्मा जी की आरती करें और सभी कर्मचारियों/परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

पूजा सामग्री में सामान्यतः मूर्ति/चित्र, अक्षत, फूल, रोली, चंदन, धूप-दीप, कलश, नारियल, फल, मिठाई और पंचामृत आदि रखे जाते हैं

नोट: मुहूर्त शहर के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है।

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