महाशिवरात्रि पर तिथि का भ्रम दूर, जानिए व्रत और चार पहर पूजा का समय

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Lucknow, 10 Feb, 2026 08:46 PM
महाशिवरात्रि पर तिथि का भ्रम दूर, जानिए व्रत और चार पहर पूजा का समय

नई दिल्ली | 10 फ़रवरी 2026 : महाशिवरात्रि का पावन पर्व फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं और भगवान शिव की चार पहर पूजा करते हैं। इस साल महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई  है। पंचांग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी। 15 फरवरी की शाम को चतुर्दशी तिथि लगने के कारण उसी दिन व्रत रखा जाएगा।


हालांकि निशित काल की पूजा 16 फरवरी की रात में होगी। निशित काल पूजा का समय 16 फरवरी को रात 12 बजकर 28 मिनट से 1 बजकर 17 मिनट तक बताया गया है। इसके बावजूद  श्रद्धालु 15 फरवरी को ही उपवास रखेंगे और पूरी रात शिव आराधना करेंगे। इस दिन त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी का विशेष संयोग भी बन रहा है, जिसे पूजा के लिए शुभ माना जाता है।


महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा में बिल्वपत्र का विशेष महत्व है। शिवमहापुराण के अनुसार, बिना बिल्वपत्र के शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। यदि भक्त के पास कुछ भी अर्पित करने को न हो, तब भी केवल बिल्वपत्र अर्पित करने से पूजा सफल मानी जाती है। इस दिन भगवान शिव को सुगंधित पदार्थ, उत्तम तेल, धूप, गुग्गुल और अगुरु अर्पित किए जाते हैं। साथ ही कमल, शंखपुष्प, कुशपुष्प, धतूरा, मन्दार, द्रोणपुष्प, तुलसीदल और बिल्वपत्र से विशेष पूजा की जाती है।


इस अवसर पर रुद्राभिषेक का भी विशेष महत्व है। भगवान शिव का दूध, दही, घी, मधु और शक्कर से स्नान कराया जाता है, इसके बाद दूध और गंगाजल से रुद्राभिषेक किया जाता है। भष्म शृंगार, अष्टगंध शृंगार और इत्र शृंगार भी किए जाते हैं। पूजा सामग्री में भांग, रोली, धूप, दीप, भष्म, काला तिल, जौ, कपूर, नारियल, अबीर, गुलाल और अन्य वस्तुएं शामिल होती हैं।


महाशिवरात्रि के दिन भद्रा का साया भी रहेगा। भद्रा सायं 5 बजकर 05 मिनट से रात 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। इसके अलावा पूरे दिन व्यतीपात योग रहेगा और चार ग्रह एक ही राशि में होने से चतुग्रही योग भी बनेगा, जो इस पर्व को और भी खास बनाता है।


चार पहर की पूजा का समय इस प्रकार है— पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। दूसरा प्रहर रात 9 बजकर 23 मिनट से 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट तक होगा। तीसरा प्रहर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट से सुबह 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जबकि चौथा प्रहर सुबह 3 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक चलेगा। इस तरह श्रद्धालु पूरी रात भगवान शिव की आराधना कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।

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