नवरात्र में अखंड ज्योत के पास सोते समय बरतें ये सावधानियां, जानें जरूरी नियम
11 अक्टूबर से शुरू होगा शारदीय नवरात्र, अखंड ज्योत जलाने से लेकर उसकी देखभाल और पूजा स्थल पर सोने तक इन बातों का रखें ध्यान
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 9 Oct, 2026 08:23 AMपितृ पक्ष की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्र का पावन पर्व शुरू होने जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र में अखंड ज्योत प्रज्वलित करने का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि यह ज्योत पूरे नवरात्र श्रद्धापूर्वक जलती रहनी चाहिए। ऐसे में यदि आप अखंड ज्योत के पास सोते हैं, तो उसकी सुरक्षा, स्वच्छता और पूजा से जुड़े कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है।
अखंड ज्योत का क्या है धार्मिक महत्व?
अखंड का अर्थ है निरंतर जलने वाला और ज्योत का मतलब लौ होता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना के लिए नौ दिनों तक लगातार अखंड ज्योत जलाने की परंपरा है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इसे ज्ञान, बुद्धि और सृजनात्मकता का प्रतीक माना जाता है। दुर्गा सूक्तम में भी मां दुर्गा को शाश्वत अग्नि के स्वरूप से जोड़ा गया है। भक्त अखंड ज्योत प्रज्वलित कर माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं।
अखंड ज्योत जलाने की सही विधि
शारदीय नवरात्र में अखंड ज्योत स्थापित करते समय कुछ पारंपरिक विधियों का पालन किया जाता है।
● लंबी और मोटी बाती: अखंड ज्योत के लिए ऐसी बाती का उपयोग करें, जो लंबे समय तक जलने के अनुकूल हो।
● उपयुक्त दीपक: ज्योत जलाने के लिए पीतल, चांदी या मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
● तेल या घी का चुनाव: दीपक में शुद्ध तिल का तेल, सरसों का तेल या घी भरें।
● स्वच्छ स्थान पर स्थापना: अखंड ज्योत को साफ चौकी पर शुभ मुहूर्त में स्थापित करना उचित माना जाता है।
● दीपक की दिशा: पारंपरिक मान्यता के अनुसार, देवी के दाहिनी ओर घी और बाईं ओर तेल का दीपक रखा जाता है।
● मंत्रों का जाप: ज्योत प्रज्वलित करते समय मंत्रों का उच्चारण करना शुभ माना जाता है।
दीप ज्योति मंत्र
शुभं करोति कल्याणमरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥
अखंड ज्योत जलाते समय इन नियमों का करें पालन
नवरात्र में अखंड ज्योत की स्थापना के साथ उसकी निरंतरता और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे जलाते समय पवित्रता, सावधानी और मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा बनाए रखनी चाहिए।
● बाती की लंबाई और दीपक में तेल या घी की मात्रा इस तरह रखें कि ज्योत लंबे समय तक जल सके।
● समय-समय पर दीपक में तेल या घी की मात्रा जांचते रहें और जरूरत के अनुसार उसे भरें।
● ध्यान रखें कि बाती का जलता हुआ सिरा तेल या घी में डूबने न पाए।
● दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और जरूरत के अनुसार उपयुक्त कांच या धातु के सुरक्षा आवरण का इस्तेमाल करें।
● मिट्टी का दीपक इस्तेमाल करने से पहले उसे पानी में भिगोने की परंपरा कुछ स्थानों पर प्रचलित है। हालांकि, दीपक को इस्तेमाल से पहले पूरी तरह सुखाना और उसकी मजबूती जांचना जरूरी है।
अखंड ज्योत के पास क्या करने से बचें?
अखंड ज्योत की पवित्रता बनाए रखने के साथ आग से सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। इसके लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
● दीपक के आसपास बच्चों को खेलने न दें और उसे उनकी पहुंच से दूर रखें।
● ठोस घी सीधे डालने के बजाय जरूरत के अनुसार पिघला हुआ घी इस्तेमाल करें।
● दीपक को शौचालय, रसोई या अन्य अनुपयुक्त स्थानों के आसपास स्थापित करने से बचें।
● धार्मिक परंपरा के अनुसार, अखंड ज्योत को बार-बार स्थानांतरित नहीं किया जाता। इसलिए स्थापना से पहले सुरक्षित और स्थिर स्थान चुनें।
● नवरात्र के दौरान कई परिवार सात्विक भोजन करते हैं और मांसाहार, प्याज तथा लहसुन से परहेज रखते हैं। यह धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी मान्यता है।
अखंड ज्योत के सामने सोते समय किन बातों का रखें ध्यान?
नवरात्र के दौरान कुछ भक्त अखंड ज्योत की निगरानी के लिए उसी कमरे में विश्राम करते हैं। ऐसी स्थिति में धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ दीपक की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है।
1. कमरे को पूरी तरह असुरक्षित छोड़कर न जाएं
अखंड ज्योत लगातार जल रही हो, तो उसकी नियमित निगरानी की व्यवस्था रखें। मान्यता के अनुसार, नवरात्र के नौ दिनों तक ज्योत की देखभाल के लिए किसी न किसी सदस्य का ध्यान उस पर बना रहना चाहिए। हालांकि, आग का जोखिम होने के कारण सोते समय खुली लौ को बिना निगरानी छोड़ना सुरक्षित नहीं है।
2. सोने की दिशा का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अखंड ज्योत के सामने सिर या पैर करके सोने से बचना चाहिए। पूजा स्थल के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए सोने की व्यवस्था इस तरह करने की परंपरा है कि दीपक की ओर पैर न हों।
3. भूमि पर सोने की परंपरा
कुछ धार्मिक परंपराओं में नवरात्र के दौरान भूमि पर सोने को तप, संयम और साधना का हिस्सा माना जाता है। इसी कारण अखंड ज्योत वाले कमरे में बिस्तर के बजाय जमीन पर विश्राम करने की मान्यता भी प्रचलित है। हालांकि, यह नियम सभी परिवारों और परंपराओं में समान नहीं है।
4. पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखें
जिस कमरे में अखंड ज्योत स्थापित हो, वहां साफ-सफाई और सात्विक वातावरण बनाए रखना चाहिए। पूजा स्थल के आसपास गंदगी न होने दें और दीपक के आसपास कपड़े, कागज, पर्दे या अन्य ज्वलनशील वस्तुएं न रखें।
अखंड ज्योत की श्रद्धा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
शारदीय नवरात्र में अखंड ज्योत जलाना भक्तों के लिए आस्था और साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इसकी स्थापना और देखभाल में पवित्रता, अनुशासन तथा श्रद्धा का विशेष महत्व है। साथ ही, नौ दिनों तक दीपक जलाए रखने के लिए सुरक्षित स्थान, उचित निगरानी और आग से बचाव के उपाय अपनाना भी जरूरी है, ताकि पूजा श्रद्धापूर्वक और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।
नोट: अखंड ज्योत से जुड़े धार्मिक नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। सुरक्षा के लिए जलते दीपक को सोते समय बिना निगरानी न छोड़ें।



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