सांसों का 'सुपर साइंस': भगवान शिव का वो प्राचीन 'एल्गोरिद्म' जो बदल सकता है युवाओं की तकदीर

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Lucknow, 3 Feb, 2026 07:13 PM
सांसों का 'सुपर साइंस': भगवान शिव का वो प्राचीन 'एल्गोरिद्म' जो बदल सकता है युवाओं की तकदीर

विजय दीक्षित

(वरिष्ठ संपादक)

अमृत बाजार पत्रिका एवं युगान्तर समूह,कोलकाता

​कोलकाता: सफलता का शॉर्टकट ढूंढ रही आज की 'जेन-जी' (Gen-Z) और युवा पीढ़ी अक्सर बाहरी दुनिया में उलझी रहती है। कभी मोटिवेशनल स्पीकर्स की शरण में, तो कभी एआई (AI) के भरोसे। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली 'जीपीएस' आपके स्मार्टफोन में नहीं, बल्कि आपकी अपनी नाक के अगले हिस्से पर मौजूद है?

​भारत की ऋषि परंपरा का एक ऐसा विज्ञान जो "सांसों का ज्योतिष" कहलाता है,स्वरोदय विज्ञान । यह केवल पूजा पाठ की विधि नहीं, बल्कि सफलता, स्वास्थ्य और भविष्य को डिकोड करने का एक सटीक गणित है।


शिव-पार्वती संवाद: जहाँ से शुरू हुआ यह रहस्य

इस विज्ञान का जन्म किसी प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि कैलाश पर्वत पर हुआ था। शास्त्रों में वर्णित एक अत्यंत ही सुंदर और रहस्यमयी संवाद है, जहाँ माता पार्वती भगवान शिव से प्रश्न करती हैं।


​माता पार्वती पूछती हैं: "हे देवों के देव! इस संसार में वो कौन सा गुप्त ज्ञान है, जिससे मनुष्य अपने भविष्य, स्वास्थ्य और शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकता है? वो कौन सा रहस्य है जो सभी विद्याओं का सार है?"

​भगवान शिव मुस्कुराते हुए उत्तर देते हैं: "हे देवी! तीनों लोकों में 'स्वरोदय' से बड़ा कोई ज्ञान नहीं है। यह गुप्त से भी गुप्त है। जो साधक अपनी सांसों (स्वर) के रहस्य को जान लेता है, उसे ग्रहों की चाल या दुर्भाग्य से डरने की आवश्यकता नहीं होती। उसका शरीर ही उसका ब्रह्मांड बन जाता है।"


​भगवान शिव ने माता को बताया कि कैसे सांस की गति को बदलकर विधि के विधान को भी बदला जा सकता है। यही संवाद आज 'शिव स्वरोदय शास्त्र' का आधार है।


यूथ लाइफ हैक्स,सांसों का मैजिक

आधुनिक विज्ञान जिसे 'नेजल साइकिल' कहता है, उसे शिव ने हजारों साल पहले ही समझा दिया था। हमारी नाक के दोनों छिद्रों से हवा का प्रवाह हर 60 से 90 मिनट में बदलता है। इसे समझना ही असली 'गेम चेंजर' है। ​चंद्र स्वर (बायां नथुना): यह 'कूलिंग सिस्टम' है। जब यह चले, तो दिमाग का राइट साइड (क्रिएटिव ब्रेन) एक्टिव होता है।


कब यूज़ करें

जब कविता लिखनी हो, कोई आइडिया सोचना हो, म्यूजिक कंपोज़ करना हो या पानी पीना हो। ​सूर्य स्वर (दायां नथुना), यह 'हीटिंग सिस्टम' है। जब यह चले, तो दिमाग का लेफ्ट साइड (लॉजिकल ब्रेन) एक्टिव होता है। जब जिम में जिसे वर्कआउट करना हो, कठिन डिबेट करनी हो, खाना खाना हो या इंटरव्यू देना हो।


मंत्र,जो स्वर चले,वही पांव जमीं पर रखें

युवा अक्सर पूछते हैं कि दिन की शुरुआत कैसे करें? स्वर विज्ञान का एक बहुत ही व्यावहारिक नियम है। सुबह उठते ही बिस्तर पर लेटे-लेटे चेक करें कि आपकी कौन सी नाक से सांस चल रही है।


​अगर दायां स्वर चल रहा है, तो दायां पैर जमीन पर रखें।

​अगर बायां स्वर चल रहा है, तो बायां पैर जमीन पर रखें।

यकीन मानिए, यह छोटा सा 'हैबिट चेंज' आपको दिन भर की नकारात्मकता और दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखता है।


करियर और दिशा का विज्ञान

वास्तु-स्वर के मेल से यह बात सामने आई है कि दिशाएं भी आपकी प्रोडक्टिविटी तय करती हैं। ​अगर आप लेखक, ब्लॉगर या आर्टिस्ट हैं, तो उत्तर दिशा की ओर मुख करके काम करें। यह दिशा विचारों के प्रवाह को बढ़ाती है।​अगर आप सीईओ, मैनेजर या लीडर हैं, तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके निर्णय लें। यह दिशा आपको तेजस्वी बनाती है।


अंतः

स्वर विज्ञान हमें आत्मनिर्भर बनाता है। यह सिखाता है कि सफलता संयोग नहीं, बल्कि एक 'चॉइस' है। जब आप अपनी सांसों के रिदम को ब्रह्मांड के रिदम से मिला लेते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। जरूरत है तो बस,एक गहरी सांस लेने की और उसे पहचानने की।


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