दीपावली आज: शुभ मुहूर्त में करें मां लक्ष्मी-गणेश का पूजन, जानें शहरवार पूजा का सटीक समय और आरती
8 नवंबर को मनाई जा रही दीपावली, देशभर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की तैयारियां पूरी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 8 Nov, 2026 04:48 PMदीपावली के पावन पर्व पर आज, 8 नवंबर 2026 को देशभर में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण है। प्रकाश के इस पर्व पर घरों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की विशेष तैयारियां की जा रही हैं। हिंदू धर्म में दीपावली की संध्या पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है।
कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है, जो 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। वहीं, दिल्ली में लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 50 मिनट तक निर्धारित है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे पूजन से संबंधित सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर लें, ताकि निर्धारित शुभ समय में श्रद्धापूर्वक पूजा संपन्न की जा सके।
देश के प्रमुख शहरों में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार भिन्न हो सकता है। 8 नवंबर 2026 को प्रमुख शहरों में पूजा के लिए निर्धारित शुभ समय इस प्रकार है—
● दिल्ली: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
● नोएडा: शाम 5:54 बजे से रात 7:49 बजे तक
● गुरुग्राम: शाम 5:55 बजे से रात 7:51 बजे तक
● चंडीगढ़: शाम 5:52 बजे से रात 7:46 बजे तक
● जयपुर: शाम 6:03 बजे से रात 7:59 बजे तक
● कोलकाता: शाम 5:20 बजे से रात 7:18 बजे तक
● मुंबई: शाम 6:27 बजे से रात 8:27 बजे तक
● पुणे: शाम 6:24 बजे से रात 8:24 बजे तक
● अहमदाबाद: शाम 6:22 बजे से रात 8:20 बजे तक
● चेन्नई: शाम 6:07 बजे से रात 8:09 बजे तक
● हैदराबाद: शाम 6:07 बजे से रात 8:08 बजे तक
● बेंगलुरु: शाम 6:17 बजे से रात 8:20 बजे तक
भगवान गणेश की आरती
दीपावली पूजन में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की आराधना का भी विशेष स्थान है। पूजा के दौरान भगवान गणेश की आरती करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस आरती के माध्यम से विघ्नहर्ता गणेश से सुख, शांति और मंगल की कामना करते हैं।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
मां लक्ष्मी की आरती
दीपावली की शाम मां लक्ष्मी की आराधना और आरती का विशेष महत्व है। श्रद्धालु धन, वैभव, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस अवसर पर पारंपरिक रूप से गाई जाने वाली आरती इस प्रकार है—
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
श्रद्धा और दीपों के साथ मनाएं दीपावली का पर्व
दीपावली केवल दीप जलाने और घरों को सजाने का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में आस्था, प्रकाश और मंगलकामना का विशेष पर्व भी है। इस दिन श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजन, आरती और दीपदान के साथ यह पर्व श्रद्धा एवं उल्लास से मनाया जाता है। दीपों की रोशनी से जगमगाते घरों के बीच दीपावली का संदेश यही है कि जीवन में सदैव प्रकाश, सद्भाव और सकारात्मकता बनी रहे।


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